MP बनेगा देश का आयुष हब, भोपाल या इंदौर में खुलेगा पहला आयुष विश्वविद्यालय
News In Short
- प्रदेश सरकार भोपाल या इंदौर में अलग आयुष विश्वविद्यालय स्थापित करने पर विचार कर रही है।
- विश्वविद्यालय बनने से आयुष क्षेत्र में सुपर-स्पेशलिटी कोर्स और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
- प्रदेश में 8 नए आयुर्वेद कॉलेजों को एक्सेप्टेन्स मिली है, जिससे कुल कॉलेजों की संख्या 17 हो जाएगी।
News In Detail
मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का केंद्र बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आयुष विभाग ने एक अलग विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है। इस विश्वविद्यालय के लिए भोपाल या इंदौर के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
रिसर्च और स्पेशलिटी को मिलेगा नया आयाम
इस नई यूनिवर्सिटी के अस्तित्व में आने से आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के क्षेत्र में स्पेशलिटी और सुपर-स्पेशलिटी कोर्स (Super Specialty) शुरू हो सकेंगे।
इससे न केवल रिसर्च की संभावनाएं बढ़ेंगी, बल्कि अर्थराइटिस, लकवा, लिवर की समस्याओं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए, आधुनिक और पारंपरिक पद्धतियों का मेल भी देखने को मिलेगा। साथ ही, मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मेडिकल यूनिवर्सिटी का बोझ होगा कम
वर्तमान में प्रदेश के आयुष कॉलेज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन हैं। जहां काम का अधिक बोझ होने के कारण आयुष शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा पाता। अलग यूनिवर्सिटी बनने से आयुष कॉलेजों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। इससे कोर्सेज में आधुनिक पद्धतियों का शामिल करना आसान होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
8 नए आयुर्वेद कॉलेजों को हरी झंडी
प्रदेश में आयुष शिक्षा का विस्तार करने के लिए सरकार ने 8 नए आयुर्वेद कॉलेजों को मंजूरी दी है। इनमें साल 2024-25 में नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर और साल 2025-26 में झाबुआ, सुजालपुर एवं डिंडोरी शामिल हैं।
इनमें से पांच कॉलेजों के भवन निर्माण का कार्य लगभग लास्ट स्टेज में है। इनके लिए पदों का सृजन भी कर दिया है और पांच कॉलेजों के भवन भी लगभग पूर्ण होने को है। इसके बाद प्रदेश में 17 आयुष कॉलेज हो जाएंगे। अभी 7 शासकीय आयुर्वेद कॉलेज भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, बरहानपुर में चल रहे हैं।
पुराने प्रयासों को अब मिलेगी नई गति
गौरतलब है कि विभाग (मध्यप्रदेश आयुष विभाग) ने अलग विश्वविद्यालय का प्रस्ताव साल 2023 में भी बनाया था, लेकिन उस समय यह आगे नहीं बढ़ सका था। उसी दौर में उज्जैन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की चर्चाएं भी तेज हुई थीं। अब सरकार इसे प्राथमिकता पर लेते हुए जल्द से जल्द धरातल पर उतारना चाहती है ताकि पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में मध्य प्रदेश देश का नेतृत्व कर सके।
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