IELTS परीक्षा में बड़ा बदलाव: पेन-पेपर मोड खत्म, सीबीटी से होगा एग्जाम
Manya Jain | Mar 29, 2026, 16:50 IST
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IELTS परीक्षा में जून 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पेन-पेपर वाली परीक्षा पूरी तरह बंद होगी। सभी छात्रों को कंप्यूटर पर ही टेस्ट देना होगा ताकि रिजल्ट जल्दी और सुरक्षित मिल सके।
Education News. विदेश जाकर पढ़ाई करने या नौकरी पाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी खबर है। अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी भाषा परीक्षण प्रणाली यानी IELTS (International English Language Testing System) की परीक्षा सिस्टम में जून 2026 से बदलाव होने जा रहे हैं। आईडीपी (IDP) और ब्रिटिश काउंसिल ने संयुक्त रूप से ऐलान किया है कि अब पारंपरिक पेन-पेपर आधारित परीक्षा को पूरी तरह बंद कर इसे डिजिटल यानी कंप्यूटर आधारित बनाया जाएगा।
यह फैसला वैश्विक स्तर पर परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। यदि आप भी आने वाले समय में ये परीक्षा देने का प्लान बना रहे हैं, तो इन बदलावों (विदेश में अध्ययन) को समझना आपके लिए जरूरी है।
IELTS परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के अनुसार, जून 2026 के बाद सभी उम्मीदवारों को कंप्यूटर पर ही परीक्षा देनी होगी। हालांकि, छात्रों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एक विशेष छूट दी गई है।
जिन छात्रों को कीबोर्ड पर टाइप करने में समस्या महसूस होती है या जिनकी टाइपिंग स्पीड कम है, वे राइटिंग सेक्शन (IELTS Exam) के लिए कागज पर लिखने का विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि, इसके लिए शर्त यह है कि बाकी तीन सेक्शन—लिसनिंग, रीडिंग और स्पीकिंग—अनिवार्य रूप से कंप्यूटर पर ही देने होंगे।
IELTS उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर 'सिंगल सेक्शन री-टेक' (Single Section Retake) की सुविधा है। पहले यदि किसी छात्र का स्कोर किसी एक मॉड्यूल में कम रह जाता था, तो उसे पूरी परीक्षा दोबारा देनी पड़ती थी, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते थे।
![Single section re take]()
नया नियम: यदि उम्मीदवार लिसनिंग, रीडिंग, राइटिंग या स्पीकिंग में से किसी एक में कम स्कोर करता है, तो वह 60 दिनों के भीतर केवल उस विशिष्ट सेक्शन की परीक्षा दोबारा दे सकता है।
लाभ: इससे छात्रों को अपना ओवरऑल बैंड स्कोर सुधारने में मदद मिलेगी और उन्हें पूरी तैयारी दोबारा शुरू नहीं करनी होगी।
IELTS की तैयारी कर रहे छात्रों की जेब पर थोड़ा बोझ पड़ने वाला है। वर्तमान में इस परीक्षा का शुल्क 18 हजार रुपए है। आधिकारिक ऐलान के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से इसे बढ़ाकर 19 हजार रुपए कर दिया जाएगा। इसलिए, जो छात्र पुराने शुल्क पर परीक्षा देना चाहते हैं, उन्हें मार्च के अंत तक अपना स्लॉट बुक कर लेना चाहिए।
Listening (लिसनिंग): 30 मिनट में 40 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।
Reading (रीडिंग): 60 मिनट के समय में 40 प्रश्नों को सॉल्व करना होता है।
Writing (राइटिंग): 60 मिनट में दो टास्क (निबंध और ग्राफ एनालिसिस) पूरे करने होते हैं।
Speaking (स्पीकिंग): 11 से 14 मिनट का आमने-सामने का इंटरव्यू या वीडियो कॉल।
पेपर मोड को समाप्त कर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (Computer Based Test - CBT) अपनाने के कई रणनीतिक लाभ हैं।
IELTS परीक्षा के लिए न्यूनतम आयु 16 वर्ष निर्धारित है। उम्मीदवार के पास एक वैध पासपोर्ट होना जरूरी है। इस परीक्षा के स्कोर को दुनिया भर के 12 हजार से अधिक संस्थानों द्वारा स्वीकार किया जाता है।
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यह फैसला वैश्विक स्तर पर परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। यदि आप भी आने वाले समय में ये परीक्षा देने का प्लान बना रहे हैं, तो इन बदलावों (विदेश में अध्ययन) को समझना आपके लिए जरूरी है।
जून 2026 से लागू होंगे नए नियम
राइटिंग सेक्शन में विकल्प (Option in Writing Section)
अब एक सेक्शन में अंक सुधारने का मौका
Single section re take
नया नियम: यदि उम्मीदवार लिसनिंग, रीडिंग, राइटिंग या स्पीकिंग में से किसी एक में कम स्कोर करता है, तो वह 60 दिनों के भीतर केवल उस विशिष्ट सेक्शन की परीक्षा दोबारा दे सकता है।
लाभ: इससे छात्रों को अपना ओवरऑल बैंड स्कोर सुधारने में मदद मिलेगी और उन्हें पूरी तैयारी दोबारा शुरू नहीं करनी होगी।
परीक्षा शुल्क में वृद्धि: 1 अप्रैल से लगेंगे अधिक पैसे
IELTS परीक्षा का पैटर्न एक नजर में
Reading (रीडिंग): 60 मिनट के समय में 40 प्रश्नों को सॉल्व करना होता है।
Writing (राइटिंग): 60 मिनट में दो टास्क (निबंध और ग्राफ एनालिसिस) पूरे करने होते हैं।
Speaking (स्पीकिंग): 11 से 14 मिनट का आमने-सामने का इंटरव्यू या वीडियो कॉल।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के फायदे
- तेज परिणाम (Fast Results): पेपर मोड में परिणाम आने में 13 दिन लगते थे, जबकि कंप्यूटर आधारित परीक्षा का रिजल्ट मात्र 3 से 4 दिनों में आ जाएगा।
- वर्ड काउंट की सुविधा (Word Count Tool): राइटिंग टास्क के दौरान कंप्यूटर खुद शब्दों की गिनती करता रहेगा, जिससे छात्रों का समय बचेगा।
- हैंडराइटिंग की समस्या खत्म: कई बार खराब हैंडराइटिंग के कारण परीक्षकों को समझने में दिक्कत होती थी और अंक कट जाते थे। डिजिटल मोड में यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
- बेहतर स्क्रीन लेआउट: रीडिंग सेक्शन में पैसेज और उससे संबंधित प्रश्न एक ही स्क्रीन पर अगल-बगल दिखेंगे, जिससे बार-बार पेज पलटने की जरूरत नहीं होगी।
एलिजिबिलिटी और ग्लोबल एक्सेप्टेंस
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