एमपी के राज्यपाल का कार्यकाल खत्म, नहीं हुई नई नियुक्ति, HC ने फैसला सुरक्षित रखा
मध्य प्रदेश के राज्यपाल की नियुक्ति का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। समाजसेवी एमए खान ने इस संबंध में याचिका दायर की है। याचिका में राज्यपाल के मौजूदा कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि कार्यकाल 7 जुलाई 2026 को पूरा हो चुका है। इसके बाद भी नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हुई है।
पांच साल की नियुक्ति का दिया गया आधार
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में भारत सरकार के राजपत्र का हवाला दिया है। यह राजपत्र 8 जुलाई 2021 को जारी हुआ था। याचिका के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति पांच साल के लिए हुई थी। इसी आधार पर कार्यकाल 7 जुलाई 2026 को पूरा बताया गया है। याचिकाकर्ता ने इसके बाद नई नियुक्ति नहीं होने पर सवाल उठाया है।
राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के अधिकारियों को पक्षकार बनाया
याचिका में राष्ट्रपति के सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है। भारत सरकार के विधि मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है। राज्यपाल के सचिव को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने सभी संबंधित पक्षों से जल्द फैसला लेने की मांग की है।
कार्यवाहक राज्यपाल की व्यवस्था का हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से पुराने मामलों की व्यवस्था भी बताई गई है। इसमें कार्यवाहक राज्यपाल नियुक्त करने के उदाहरणों का जिक्र हुआ। दलील में संबंधित राज्य के चीफ जस्टिस का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा स्थिति में ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई है।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच में सुनवाई
मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में हुई। सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पैरवी की। अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह भी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए।
सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित
हाई कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी की। इसके बाद जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा ने फैसला सुरक्षित रखा। अब इस मामले में हाई कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है। अदालत के आदेश से राज्यपाल की नियुक्ति से जुड़े विवाद की स्थिति साफ होगी।
अब हाई कोर्ट के आदेश पर टिकी नजर
इस मामले में अभी अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने केवल सुनवाई पूरी करके आदेश सुरक्षित रखा है। इसलिए राज्यपाल के पद को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही याचिका में उठे सवालों पर स्थिति साफ होगी।
मामले की अहमियत बढ़ी
राज्यपाल संवैधानिक पद है और इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। ऐसे में कार्यकाल से जुड़ा सवाल सीधे संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ता है। हालांकि याचिका में लगाए गए दावों पर अंतिम फैसला कोर्ट को करना है। फिलहाल अदालत के आदेश का इंतजार सबसे अहम है।
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