ई-अटेंडेंस का नया नियम: स्कूल से नहीं किया लॉगआउट तो अटक सकती है शिक्षकों की सैलरी
ऐसे समझें पूरा मामला..
- स्कूल परिसर से ही लॉगइन और लॉगआउट दोनों अनिवार्य।
- बाहर से लॉगआउट करने पर उपस्थिति अधूरी मानी जा सकती है।
- ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन प्रभावित होने की आशंका।
- एप अपडेट के बाद बिना पूर्व सूचना कई शिक्षक हुए परेशान।
- बारिश और कमजोर नेटवर्क भी बने बड़ी चुनौती।
मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस का नियम अब पहले से ज्यादा सख्त हो गया है। लोक शिक्षण विभाग ने हमारे शिक्षक एप में ऐसा बदलाव किया है, जिसके बाद केवल स्कूल परिसर में पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराना ही नहीं, बल्कि वहीं से लॉगआउट करना भी अनिवार्य होगा। नियम लागू होते ही कई शिक्षक लॉगआउट नहीं कर सके, जिससे वेतन कटने की चिंता बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
लोक शिक्षण विभाग ने जून में सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य की थी। विभाग ने स्पष्ट किया था कि जिस दिन ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होगी, उस दिन का वेतन भी प्रभावित हो सकता है। एक जुलाई से अब तक अधिकांश शिक्षक इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं।
पहले क्या व्यवस्था थी?
शुरुआत में शिक्षकों को केवल स्कूल के निर्धारित लोकेशन (कोऑर्डिनेट) पर पहुंचकर लॉगइन करना होता था। इसके बाद वे किसी भी स्थान से लॉगआउट कर सकते थे। इसी व्यवस्था का कुछ मामलों में गलत इस्तेमाल होने की शिकायत विभाग तक पहुंची।
अब क्या बदल गया?
एप अपडेट होने के बाद नियम पूरी तरह बदल गया है। अब शिक्षक जिस स्कूल परिसर से लॉगइन करेंगे, उन्हें वहीं से लॉगआउट भी करना होगा। यदि लॉगआउट किसी दूसरे स्थान से करने की कोशिश की गई तो उपस्थिति अधूरी मानी जा सकती है।
शिक्षकों को कैसे हुई जानकारी?
कई शिक्षकों को नए नियम की जानकारी तब मिली, जब उन्होंने स्कूल से बाहर निकलने के बाद लॉगआउट करने की कोशिश की। एप ने लॉगआउट स्वीकार नहीं किया। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से पता चला कि अब यह सुविधा केवल स्कूल परिसर में ही उपलब्ध है।
बारिश और नेटवर्क ने बढ़ाई मुश्किल
लगातार बारिश और कमजोर इंटरनेट नेटवर्क के कारण भी कई शिक्षकों को ई-अटेंडेंस और लॉगआउट करने में दिक्कतें आईं। कई जगह एप समय पर काम नहीं कर सका, जिससे शिक्षकों की चिंता और बढ़ गई।
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