ग्राम रोजगार सहायकों को साधने के लिए घोषणाओं की झड़ी, क्या नाराजगी शांत करने की कोशिश
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान: सीएम मोहन यादव ने ग्राम रोजगार सहायकों की सेवा आयु बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी।
- अवकाश की नई सुविधा: महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और पुरुषों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलेगा।
- आर्थिक सहायता का वादा: मृत कर्मचारियों के परिवारों को 10 लाख और घायलों को उचित आर्थिक मदद मिलेगी।
- किसानों को बड़ी राहत: स्लॉट बुक करने वाले किसानों के लिए गेहूं खरीदी की तारीख 28 मई तक बढ़ाई।
- नाराजगी दूर करने की कोशिश: चुनाव के मद्देनजर ग्रामीण नेटवर्क पर पकड़ मजबूत करने के लिए सरकार का मास्टरस्ट्रोक।
भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित ग्राम रोजगार सहायकों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक के बाद एक कई बड़े ऐलान किए। 62 साल तक सेवा, मातृत्व-पितृत्व अवकाश, पुनर्नियुक्ति की गारंटी और मृत कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता जैसी घोषणाओं ने कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया।
लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अब सवाल उठ रहा है कि क्या ये फैसले वास्तव में व्यवस्था सुधारने के लिए हैं या फिर लंबे समय से नाराज चल रहे ग्राम रोजगार सहायकों को साधने की रणनीति? क्योंकि कई मांगें वर्षों से लंबित थीं और अब अचानक बड़े मंच से भरोसे की बारिश होने लगी है।
रोजगार सहायकों को लेकर सरकार का नया “सॉफ्ट स्टैंड”
सम्मेलन में सीएम ने साफ संकेत दिए कि सरकार अब ग्राम रोजगार सहायकों को सिर्फ संविदा कर्मी की तरह नहीं, बल्कि गांव विकास की मुख्य कड़ी के रूप में पेश करना चाहती है।
सीएम ने कहा कि सरकार बिना मांगे भी कर्मचारियों की चिंता कर रही है और विकास के हर लक्ष्य के पीछे रोजगार सहायकों की बड़ी भूमिका है। यानी सरकार अब सीधे यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि ग्रामीण सिस्टम में उनकी अहमियत बढ़ाई जा रही है।
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62 साल तक सेवा का ऐलान, लेकिन सवाल भी कई
मुख्यमंत्री ने रोजगार सहायकों की सेवा आयु 62 साल तक रखने की बात कही। यह घोषणा कर्मचारियों के लिए राहत मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
क्योंकि पंचायत सचिवों के रिक्त पद, नियमितीकरण, स्थायी सेवा संरचना और वेतन विसंगति जैसे मूल मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। ऐसे में सिर्फ आयु सीमा बढ़ाने से क्या वर्षों पुरानी असुरक्षा खत्म हो पाएगी? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
सरकार ने दिए ये बड़े संकेत : सम्मेलन में हुई प्रमुख घोषणाएं
▪️ सेवा आयु 62 साल तक- ग्राम रोजगार सहायकों को 62 वर्ष तक कार्य करने का अवसर मिलेगा।
▪️ महिलाओं को मातृत्व और प्रसूति अवकाश- महिला रोजगार सहायकों को मातृत्व, प्रसूति और ऐच्छिक अवकाश देने की घोषणा।
▪️ पुरुष कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश- पुरुष ग्राम रोजगार सहायकों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलेगा।
▪️ निर्दोष साबित होने पर नौकरी वापसी- यदि किसी रोजगार सहायक पर आपराधिक मामला दर्ज होता है और बाद में वह निर्दोष साबित होता है, तो उसे दोबारा सेवा में लेने की गारंटी सरकार देगी।
▪️ मृत कर्मचारियों के परिवारों को सहायता- सम्मेलन में मृत दो रोजगार सहायकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए देने की घोषणा।
▪️ घायलों को आर्थिक मदद- गंभीर घायलों को 1 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की बात कही गई।
क्या सरकार दबाव में आई?
पिछले कुछ समय से ग्राम रोजगार सहायकों की तरफ से लगातार वेतन, नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और सामाजिक लाभों को लेकर आवाज उठाई जा रही थी। कई जिलों में विरोध और ज्ञापन का दौर भी चला। ऐसे में अब सरकार का अचानक नरम रुख कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण नेटवर्क में रोजगार सहायकों की मजबूत पकड़ होती है और पंचायत स्तर पर उनका सीधा संपर्क जनता से रहता है। इसलिए सरकार किसी भी तरह की नाराजगी को बढ़ने नहीं देना चाहती।
“सम्मान” की बात, लेकिन स्थायी समाधान अब भी दूर
सीएम ने मंच से कहा कि सरकार रोजगार सहायकों के हितों की सुरक्षा और सम्मान के साथ गांव के विकास को जोड़कर देख रही है।
लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सम्मान सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्थायी नीति और स्पष्ट सेवा नियमों से आता है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ये घोषणाएं कितनी जल्दी सरकारी आदेशों में बदलती हैं और जमीनी स्तर पर उनका कितना असर दिखाई देता है।
गेहूं खरीदी पर भी बड़ा ऐलान
23 मई नहीं, अब 28 मई तक खरीद
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में किसानों को भी राहत देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने स्लॉट बुकिंग कर ली है, लेकिन किसी कारण से गेहूं नहीं बेच पाए, उनका गेहूं अब 28 मई तक खरीदा जाएगा। सरकार के अनुसार इस बार मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है।
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अब आगे क्या?
मोहन सरकार ने रोजगार सहायकों के लिए कई भावनात्मक और प्रशासनिक घोषणाएं कर दी हैं। लेकिन असली परीक्षा अब अमल की होगी।
क्योंकि ग्रामीण कर्मचारियों को सिर्फ भरोसा नहीं, बल्कि स्पष्ट नियम, स्थायी सुरक्षा और समय पर फैसले चाहिए। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जंबूरी मैदान की घोषणाएं सिर्फ मंच तक सीमित रहती हैं या वास्तव में सिस्टम में बदलाव का रास्ता खोलती हैं।