2030 के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य में एमपी की बड़ी भूमिका, CM मोहन यादव का दावा
समझें क्या है पूरा मामला
- सीएम मोहन यादव दिल्ली में रिन्यूएबल एनर्जी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।
- उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब बन रहा है।
- प्रदेश की रिन्यूएबल क्षमता 12 साल में 438 से बढ़कर 11 हजार मेगावाट हुई।
- मध्य प्रदेश की बिजली से दिल्ली मेट्रो भी चल रही है।
- कार्यक्रम के बाद सीएम ने केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात की।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे 7वीं इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2026 में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश की हरित ऊर्जा योजनाओं की जानकारी दी। सीएम ने कहा कि प्रदेश अग्रणी रिन्यूएबल एनर्जी हब बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब 24 घंटे हरित ऊर्जा देने की तैयारी में है। कार्यक्रम में केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे।
रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे तेज बढ़ने वाला राज्य
मोहन यादव ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा सीमित घंटों में मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब लगातार बिजली देने की तैयारी कर रहा है। सीएम के मुताबिक उनका लक्ष्य निर्बाध हरित ऊर्जा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह संभव है, इसे साबित करना ही मकसद है। सीएम ने बताया कि पिछले 12 साल में प्रदेश ने बड़ी तरक्की की है। उनके मुताबिक प्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे तेज बढ़ने वाले राज्यों में शामिल है।
बिजली उत्पादन में भी तेज ग्रोथ
सीएम ने बताया कि प्रदेश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता तेजी से बढ़ी है। यह 12 साल पहले सिर्फ 438 मेगावाट थी। अब यह क्षमता करीब 11 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश की सबसे सस्ती बिजली बना रहा है। सीएम के मुताबिक यह बिजली दूसरे राज्यों को भी भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली मेट्रो को भी यहीं से बिजली मिल रही है। यह प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रीवा और नीमच का जिक्र
सीएम ने रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट ने देश में सबसे कम सोलर टैरिफ हासिल किया। इससे प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। सीएम ने शाजापुर और नीमच सोलर पार्क का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यहां प्रति यूनिट 2.14 रुपए का रिकॉर्ड टैरिफ मिला। यह देश के सबसे कम टैरिफ में से एक है। सीएम ने कहा कि यह प्रदेश की मजबूत नीतियों का नतीजा है।
निवेश को लेकर सरकार का प्लान
सीएम मोहन यादव ने बताया कि सरकार ने कई नई नीतियां बनाई हैं। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से बड़ा निवेश आ रहा है। सीएम के मुताबिक सरकार का लक्ष्य स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश 2030 तक देश के लक्ष्य में योगदान देगा। भारत का लक्ष्य 500 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करना है।
केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात
कॉन्फ्रेंस के बाद सीएम मोहन यादव ने दो केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से बातचीत की। इसमें जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं पर चर्चा हुई। पेयजल उपलब्धता और जल संरक्षण पर भी बात हुई। इसके बाद सीएम ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। भूपेंद्र यादव के पास वन, जलवायु परिवर्तन और श्रम मंत्रालय भी है। इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
राज्य के लिए क्यों अहम मौका
यह कॉन्फ्रेंस तीन दिन तक चलने वाला बड़ा आयोजन है। इसमें देश भर की कई बड़ी कंपनियां शामिल हो रही हैं। टाटा पावर, एनटीपीसी और अडाणी ग्रीन जैसी कंपनियां भी मौजूद रहीं। मध्य प्रदेश सरकार इस मंच से निवेशकों को आमंत्रित कर रही है।
सीएम का कहना है कि प्रदेश में तेज फैसले और साफ नीतियां हैं। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। सरकार का मकसद प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनाना है। यह देश और दुनिया की कई कंपनियों को जोड़ने वाला मंच है। मध्य प्रदेश सरकार इसे बड़े मौके के रूप में देख रही है।
सीएम मोहन यादव ने राज्य की नीतियों को निवेशकों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मंजूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में रोजगार भी बढ़ेगा। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से जुड़े उद्योगों को भी फायदा मिलेगा। सीएम ने कहा कि प्रदेश हर स्तर पर निवेशकों का साथ देगा।
आगे की योजना क्या है
सरकार पहले ही 24x7 रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू कर चुकी है। इसके लिए दिल्ली में प्री बिड मीटिंग भी हो चुकी है। इसमें कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। सीएम ने कहा था कि यह प्रोजेक्ट दावोस के वादे को पूरा करता है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को हरित ऊर्जा में राष्ट्रीय नेता बनाना है। आने वाले समय में और नई सोलर परियोजनाएं शुरू होने की उम्मीद है। इससे प्रदेश में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे।
जरूरी FAQ
मध्य प्रदेश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता कितनी बढ़ी है?
मध्य प्रदेश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता पिछले 12 साल में तेजी से बढ़ी है। यह क्षमता पहले सिर्फ 438 मेगावाट थी। अब यह करीब 11 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। सीएम मोहन यादव के मुताबिक प्रदेश देश के सबसे तेज बढ़ने वाले राज्यों में शामिल है।
मध्य प्रदेश की बिजली से दिल्ली मेट्रो कैसे जुड़ी है?
सीएम मोहन यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश देश की सबसे सस्ती बिजली बना रहा है। इस बिजली को दूसरे राज्यों को भी भेजा जा रहा है। इसी बिजली से दिल्ली मेट्रो का संचालन भी हो रहा है। यह प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता को दिखाता है।
मध्यप्रदेश सरकार का 24 घंटे ग्रीन एनर्जी का लक्ष्य क्या है?
सीएम मोहन यादव के मुताबिक सौर और पवन ऊर्जा सीमित घंटों में ही मिलती है। इसलिए सरकार अब लगातार बिजली देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए रिन्यूएबल एनर्जी, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास से जुड़ी नई नीतियां बनाई गई हैं। सरकार का मकसद 24 घंटे निर्बाध हरित ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
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