प्रमोशन और ओबीसी आरक्षण: हाईकोर्ट में कल दो स्पेशल बेंच करेंगी सुनवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रमोशन में आरक्षण और ओबीसी आरक्षण दोनों अलग-अलग मामले हैं।
- प्रमोशन मामले में कुल सात याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
- ओबीसी आरक्षण मामले में कुल 91 याचिकाएं लंबित हैं।
- दोनों मामलों के लिए अलग-अलग स्पेशल डिवीजन बेंच बनाई गई हैं।
- मंगलवार 14 जुलाई को दोनों मामलों की अहम सुनवाई होगी।
14 जुलाई को आरक्षण के दो बड़े मामलों पर फोकस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court)में मंगलवार 14 जुलाई का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। आरक्षण से जुड़े दो बड़े मामलों की सुनवाई अलग-अलग स्पेशल डिवीजन बेंच के सामने होगी। पहला मामला प्रमोशन में आरक्षण का है। दूसरा मामला ओबीसी आरक्षण से जुड़ी 91 याचिकाओं का है। दोनों मामलों का असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। इसलिए पूरे प्रदेश की नजर मंगलवार की सुनवाई पर टिकी हुई है।
प्रमोशन में आरक्षण मामले के लिए बनी नई स्पेशल बेंच
सोमवार की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक रूसिया ने स्वयं को प्रमोशन में आरक्षण मामले से अलग कर लिया था। इसके बाद इस प्रकरण के लिए नई स्पेशल डिवीजन बेंच गठित कर दी गई है। अब जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। पहले अदालत ने कहा था कि मामला अगले सप्ताह सूचीबद्ध होगा। लेकिन नई स्पेशल बेंच का रोस्टर जारी होने के बाद अब सुनवाई मंगलवार 14 जुलाई को ही तय हो गई है। कॉज लिस्ट के अनुसार यह सुनवाई दोपहर 2:30 बजे होगी। इस बेंच के सामने डॉ. स्वाति तिवारी सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
ओबीसी आरक्षण की 91 याचिकाएं भी मंगलवार को ही सूचीबद्ध
ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। पहले इन मामलों की सुनवाई 15 जुलाई को प्रस्तावित थी। अब इन्हें एक दिन पहले, यानी 14 जुलाई को सूचीबद्ध कर दिया गया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की स्पेशल डिवीजन बेंच इन मामलों की सुनवाई करेगी। इस विशेष बेंच के समक्ष कुल 91 याचिकाएं लंबित हैं। मंगलवार को इनमें से सूचीबद्ध 19 मामलों से नियमित सुनवाई की शुरुआत होगी। इसके बाद सभी संबंधित याचिकाओं पर क्रमवार सुनवाई आगे बढ़ेगी।
दो अलग मामले, दो अलग बेंच, लेकिन नजर पूरे प्रदेश की
प्रमोशन में आरक्षण और ओबीसी आरक्षण दोनों अलग-अलग कानूनी विवाद हैं। दोनों की याचिकाएं, कानूनी मुद्दे और पक्षकार भी अलग हैं। प्रमोशन में आरक्षण मामला मध्य प्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 से जुड़ा है। वहीं ओबीसी आरक्षण मामला वर्ष 2019 से लंबित आरक्षण विवाद से संबंधित है। दोनों मामलों की सुनवाई अलग-अलग स्पेशल बेंच करेगी। ऐसे में मंगलवार का दिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब दोनों मामलों की सुनवाई पर टिकी हैं उम्मीदें
प्रमोशन में आरक्षण मामले में कर्मचारी नई बेंच की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं ओबीसी आरक्षण मामले में भी लंबे समय से अंतिम बहस की उम्मीद बनी हुई है। दोनों मामलों के अगले चरण पर पूरे प्रदेश की नजर है। मंगलवार की कार्यवाही से आगे की न्यायिक दिशा साफ हो सकती है। अब अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और प्रस्तुत कानूनी तर्कों पर ही निर्भर करेगा।
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