कर्मचारी ने की चोरी, मालिक ने किया सैटलमेंट, जबलपुर हाईकोर्ट ने ठोका जुर्माना

Anjali Dwivedi | Apr 15, 2026, 20:21 IST
mp high court fined employer
जबलपुर में 97 लाख रुपए की हेराफेरी के मामले में FIR के बाद समझौता करना कार डीलर को भारी पड़ा। हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर 50 हजार का जुर्माना लगाया।

मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट से एक ऐसी खबर सामने आई है जो उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है, जो कानूनी सिस्टम को अपनी मर्जी के हिसाब से चलाना चाहते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग पहले गुस्से में या दबाव बनाने के लिए FIR दर्ज कराते हैं और फिर पर्दे के पीछे सेटिंग कर लेते हैं। लेकिन इस बार जबलपुर के एक मामले में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून कोई खिलौना नहीं है।



जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने न केवल इस रवैये पर नाराजगी जताई, बल्कि शिकायतकर्ता पर ही तगड़ा जुर्माना ठोक दिया। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला।



शोरूम में 97 लाख की हेराफेरी

यह कहानी जबलपुर के एक जाने-माने कार डीलर महेश केमतानी से जुड़ी है। केमतानी ने अपने ही शोरूम में काम करने वाले तीन कर्मचारियों- संदीप कुमार मिश्रा, नेहा विश्वकर्मा और नसीम खान पर भरोसा किया था। लेकिन आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर शोरूम के खातों में 97 लाख रुपए की बड़ी हेराफेरी (Fraud) कर दी।



मामला मदन महल थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी संदीप मिश्रा को गिरफ्तार किया और उसके पास से 12 लाख रुपए की नकदी भी बरामद कर ली।



जेल की सलाखों के बीच गुपचुप समझौता

मामले में असली ट्विस्ट तब आया जब मुख्य आरोपी संदीप मिश्रा ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि अब झगड़ा खत्म हो चुका है क्योंकि शिकायतकर्ता महेश केमतानी और आरोपियों के बीच आपसी समझौता हो गया है। जैसे ही कोर्ट को इस आउट ऑफ कोर्ट सैटलमेंट की भनक लगी, माहौल पूरी तरह बदल गया।



हाईकोर्ट की फटकार

जब सरकारी वकील ने इस गुप्त समझौते पर आपत्ति जताई, तो जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहले पुलिस और कोर्ट का कीमती वक्त बर्बाद करना और फिर अपनी शर्तों पर समझौता कर लेना सीधे तौर पर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग (Abuse of Legal Process) है। कोर्ट ने कहा कि FIR कोई निजी औजार नहीं है जिसे वसूली के लिए इस्तेमाल किया जाए।



आरोपी को मिली बेल

अदालत ने मामले की गंभीरता और समझौते को देखते हुए आरोपी संदीप मिश्रा को जमानत तो दे दी, लेकिन शिकायतकर्ता महेश केमतानी को नहीं बख्शा। कोर्ट ने उन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह रकम इसलिए वसूली जा रही है क्योंकि शिकायतकर्ता ने अपनी मर्जी से कानूनी मशीनरी का इस्तेमाल किया और फिर उसे निजी हित के लिए बीच में ही छोड़ दिया।



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