पुराने शिक्षाकर्मियों की टीईटी छूट पर हाईकोर्ट का निर्देश, 60 दिन में फैसला लेगी सरकार; प्रमोशन पर टिकी नजरें

Neel Tiwari | Oct 13, 2026, 19:31 IST
पुराने शिक्षाकर्मियों की TET छूट पर हाईकोर्ट का निर्देश।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों की टीईटी से छूट की मांग पर शासन को निर्देश दिए हैं। शासन को 60 दिन में निर्णय लेना होगा। मामला 1997 से 1999 के बीच नियुक्त शिक्षाकर्मियों का है। हालांकि, कोर्ट ने छूट पर कोई फैसला नहीं दिया है। प्रमोशन की योग्यता पर भी कोई फैसला नहीं हुआ है।
The Madhya Pradesh High Court has directed the government regarding the demand for a TET exemption for *Shiksha Karmis* (education workers). The government is required to make a decision within 60 days.

पुराने शिक्षाकर्मियों की मांग पर हाईकोर्ट का निर्देश

पुराने शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट मिलेगी या नहीं, इसका फैसला शासन करेगा। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अनिल कुमार तोमर और अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया। शासन को संबंधित आवेदनों पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा।



कोर्ट ने कहा कि अधिकारी कानून के हिसाब से फैसला करें। आदेश में फैसले के पीछे के कारण भी स्पष्ट होने चाहिए। इससे टीईटी से छूट की मांग कर रहे शिक्षाकर्मियों को उम्मीद मिली है। अब सभी की नजर शासन के फैसले पर है।



1997 से 1999 के बीच नियुक्त हुए थे शिक्षाकर्मी

याचिकाकर्ताओं के वकील जितेंद्र आर्य ने कोर्ट में शिक्षाकर्मियों का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इन शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति 1997 से 1999 के बीच हुई थी। इनकी नियुक्तियां वर्ग-दो और वर्ग-तीन के पदों पर की गई थीं। ये सभी नियुक्तियां 3 सितंबर 2001 से पहले हुई थीं। अब प्रमोशन के लिए टीईटी पास करना जरूरी होने का सवाल सामने आया है। इसी वजह से संबंधित शिक्षाकर्मी टीईटी से छूट की मांग कर रहे हैं।



उनका कहना है कि नियुक्ति के समय लागू नियमों को ध्यान में रखा जाए। वे चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति की तारीख के आधार पर मामलों पर विचार हो। साथ ही, उस समय लागू कानूनी प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाए।



सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग के समर्थन में कई अदालती फैसलों का हवाला दिया है। इनमें अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट से जुड़ा मामला भी शामिल है। इसके अलावा, रामदास समराव सोलास्कर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का भी जिक्र किया गया है।



याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति की तारीख को ध्यान में रखा जाए। साथ ही, उस समय लागू कानूनी नियमों पर भी विचार किया जाए। उनका तर्क है कि इन आधारों पर टीईटी की अनिवार्यता से छूट मिलनी चाहिए।



हालांकि, इन अदालती फैसलों का उनके मामले पर क्या असर होगा, यह अभी तय नहीं है। शासन को कानूनी स्थिति के आधार पर इस बारे में फैसला लेना होगा।



60 दिन में देना होगा कारण सहित फैसला

हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को इस मामले में आदेश जारी किया। कोर्ट ने शासन के संबंधित अधिकारी को 60 दिनों में फैसला लेने को कहा है। यह फैसला शिक्षाकर्मियों के लंबित आवेदनों पर लेना होगा।



कोर्ट ने कहा कि फैसला स्पष्ट होना चाहिए और उसके कारण भी बताने होंगे। यानी शासन को शिक्षाकर्मियों की मांग पर विचार करके अपना पक्ष साफ करना होगा। तय समय के भीतर फैसला लेने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।



टीईटी से छूट नहीं मिली, प्रमोशन पर भी फैसला बाकी

इस आदेश का मतलब टीईटी से छूट या प्रमोशन का अधिकार मिलना नहीं है। हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट नहीं दी है। कोर्ट ने प्रमोशन की योग्यता पर भी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। फिलहाल शासन को लंबित आवेदनों पर कानून के अनुसार फैसला लेना है। इसलिए अब संबंधित शिक्षाकर्मियों की नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हैं।



अगर शासन उनकी मांग मानता है, तो उन्हें राहत मिल सकती है। अगर सरकार मांग खारिज करती है, तो आगे का रास्ता तय करना होगा। यह रास्ता सरकार के आदेश और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर निर्भर करेगा।



अब आगे क्या होगा, यह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा

पुराने शिक्षाकर्मियों के लिए यह मामला सिर्फ टीईटी पास करने की शर्त का नहीं है। इसका असर उनकी प्रमोशन के मौकों पर भी पड़ता है। सवाल यह है कि नियुक्ति के समय के नियम और आज की योग्यता के नियम आपस में कैसे मेल खाएंगे।



हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सरकार को तय समय में अपना फैसला देना होगा। उसके बाद ही साफ होगा कि इन शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट मिलती है या नहीं। राहत न मिलने पर उन्हें आगे कानूनी रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं।



FAQs



  1. हाईकोर्ट के निर्देश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    हाईकोर्ट ने शासन को 60 दिनों के भीतर शिक्षाकर्मियों की टीईटी से छूट की मांग पर फैसला लेने का आदेश दिया है।
  2. टीईटी से छूट के लिए शिक्षाकर्मियों के तर्क क्या हैं?
    शिक्षाकर्मियों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति 1997 से 1999 के बीच हुई थी और उस समय लागू नियमों के अनुसार टीईटी की अनिवार्यता ठीक नहीं है।
  3. यदि शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट नहीं मिलती, तो उनके पास क्या विकल्प हैं?
    यदि शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट नहीं मिलती, तो उन्हें आगे कानूनी विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं, जो सरकार के आदेश और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
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