2020 में बने नियम, फिर भी नहीं मिली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग! हाईकोर्ट की फैमिली कोर्ट को फटकार
समझें क्या है पूरा मामला
- 2020 से मध्य प्रदेश के जिला और फैमिली कोर्टों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम लागू हैं।
- बालाघाट और नर्मदापुरम फैमिली कोर्ट में लंबित वैवाहिक मामले में महिला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मांग की थी।
- जस्टिस विवेक जैन ने मांग को उचित मानते हुए सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
- कोर्ट ने ई-फाइलिंग के माध्यम से दस्तावेज स्वीकार करने पर भी जोर दिया।
- बालाघाट, नर्मदापुरम और जबलपुर के संबंधित न्यायालयों को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं विकसित करने के आदेश दिए गए।
नियम बने छह साल पहले, सुविधा अब भी अधूरी
मध्य प्रदेश में जिला और कुटुंब न्यायालयों के लिए वर्ष 2020 में कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंगतथा ऑडियो-विजुअल इलेक्ट्रॉनिक लिंक संबंधी नियम लागू किए गए थे। इनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ना था। इससे दूर-दराज के पक्षकारों को बार-बार अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इसके बावजूद कई स्थानों पर इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। ऐसे ही बालाघाट और नर्मदापुरम फैमिली कोर्ट के दो मामले सामने आए है। जहां एक वैवाहिक विवाद में पक्षकार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने की सुविधा नहीं मिल रही थी।
ट्रांसफर की मांग से शुरू हुआ मामला
यह मामले सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 24 के तहत हाईकोर्ट पहुंचे थे। आवेदन में बालाघाट और नर्मदापुरम के कुटुंब न्यायालय में लंबित दो अलग अलग वैवाहिक प्रकरणों को जबलपुर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
हालांकि सुनवाई के दौरान आवेदको की ओर से पेश अधिवक्ता ने अपनी मांग सीमित करते हुए कहा कि यदि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सुविधा मिल जाए तो फिलहाल स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं रहेगी।
नियम फैमिली कोर्ट पर भी लागू -जस्टिस जैन
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक जैन ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के "डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स ऑफ मध्य प्रदेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एंड ऑडियो विजुअल इलेक्ट्रॉनिक लिंकेज रूल्स, 2020" केवल जिला न्यायालयों तक सीमित नहीं हैं। ये नियम कुटुंब न्यायालयों पर भी समान रूप से लागू होते हैं।
कोर्ट ने माना कि आवेदक की मांग उचित है और उसे नियमों के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
ई-फाइलिंग को भी बढ़ावा देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जहां तक संभव हो, कुटुंब न्यायालय ई-फाइलिंग के माध्यम से दस्तावेज स्वीकार करने पर भी विचार करे। इससे पक्षकारों को बार-बार अदालत आने की आवश्यकता कम होगी। न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन सकेगी। डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण निर्देश माना जा रहा है।
न्यायालयों को व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश
हाईकोर्ट ने बालाघाट, नर्मदापुरम और जबलपुर के संबंधित न्यायालयों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे वर्ष 2020 के नियमों के अनुसार आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, किसी विशेष मामले में जरूरत महसूस होने पर फैमिली कोर्ट पक्षकार की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए अलग से आदेश जारी कर सकता है। इसी के साथ मामले का निपटारा कर दिया गया।
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