तुम जैसे हजार पति... पत्नी के ताने को HC ने माना उकसावा, पति की उम्रकैद घटाई

Anjali Dwivedi | Jul 04, 2026, 19:25 IST
पत्नी के ताने को कोर्ट ने माना उकसावा, उम्रकैद 7 साल में बदली
BHOPAL. हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी पति की उम्रकैद घटाकर सात साल की। कोर्ट ने माना कि पत्नी का ताना गंभीर उकसावा था और यह हत्या पहले से सोची-समझी साजिश नहीं, बल्कि अचानक गुस्से का नतीजा थी।

मध्यप्रदेश हाईकोर्टने एक चौंकानेवाला फैसलासुनाया है। पत्नी की हत्याकेआरोपी पति कीउम्रकैद घटाकर सातसाल कर दी गई।कोर्ट ने माना कियह हत्याअचानक आए गुस्सेमें हुई।पत्नी के एकताने को कोर्टने गंभीरउकसावा माना है।यह मामलाछिंदवाड़ा जिले सेजुड़ा है।



क्या था पूरा मामला

छिंदवाड़ा जिले के चौराई ब्लॉक में यह घटना हुई थी। शिव कहार नाम के व्यक्ति पर अपनी पत्नी किरण की हत्या का आरोप था। किरण उस समय सात महीने की गर्भवती थीं।



प्रॉसिक्यूशन के अनुसार शिव ने पत्थर से किरण के सिर पर वार किया था। इसी वजह से किरण की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद शिव ने खुद ही अपने ससुर को फोन किया। यह पूरा मामला जुलाई 2021 का है।



पहले मिली थी उम्रकैद की सजा

घटना के बाद छिंदवाड़ा जिला अदालत ने शिव को दोषी करार दिया था। जिला अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए IPC की धारा 304 पार्ट के तहत दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ शिव ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपील दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने की।



हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने माना कि यह हत्या पहले से सोची-समझी नहीं थी। बेंच ने कहा कि पास पड़े पत्थर का इस्तेमाल अचानक हुए झगड़े में किया गया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि घटना के बाद आरोपी ने खुद पुलिस और परिजनों को सूचना दी थी।



गवाहों के अनुसार झगड़े के दौरान किरण ने शिव से कुछ कह दिया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि वे उस जैसे हजार पति रख सकती हैं। कोर्ट ने इस टिप्पणी को पति के अस्तित्व पर सीधा प्रहार माना। बेंच ने कहा कि यह बात व्यक्ति को बेकार साबित करने वाली थी। इसी को कोर्ट ने गंभीर और अचानक उकसावा करार दिया।



धारा में हुआ बदलाव

हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 304 पार्ट-1 की जगह धारा 304 पार्ट-2 लागू की। इसका मतलब है कि यह हत्या जानबूझकर नहीं, बल्कि अचानक हुए आवेश में हुई मानी गई। कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त नहीं किया, सिर्फ सजा की धारा बदली। ट्रायल कोर्ट का जुर्माना बरकरार रखा गया है।



किसने रखी दलीलें

इस मामले में आरोपी की तरफ से अधिवक्ता जगत कुमार देहारिया ने पैरवी की। वहीं राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील अजय शुक्ला पेश हुए। गवाही में परिजनों ने बताया कि आरोपी ने घटना के तुरंत बाद खुद अपना जुर्म कबूल किया था। इन्हीं गवाहियों के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला दिया।



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