भोपाल कलेक्टर और टीटी नगर तहसीलदार तलब, कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट पर देना होगा जवाब
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- हाई कोर्ट ने भोपाल कलेक्टर और टीटी नगर तहसीलदार को तलब किया।
- 12 मई 2026 के आदेश का अब तक पालन नहीं होने पर कोर्ट नाराज।
- तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से और कलेक्टर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित होने का निर्देश।
- बैंक को संपत्ति का कब्जा दिलाने संबंधी आदेश पांच साल से लंबित।
- कोर्ट ने अवमानना कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए भोपाल जिला प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान पाया कि 12 मई 2026 को दिए गए निर्देशों का अब तक पालन नहीं किया गया है।
इसके बाद कोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और टीटी नगर (राजधानी परियोजना) के तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से जबलपुर स्थित हाई कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि तहसीलदार यह बताएं कि 12 मई के आदेश का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
डिवीजन बेंच ने मामले को 30 जून 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए दोनों अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट का यह रुख प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला मेसर्स लेक सिटी कम्युनिकेशन एवं अन्य बनाम महानगर नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित से जुड़ा है। बैंक की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि वह एक सुरक्षित लेनदार (Secured Creditor) होने के नाते संपत्ति का कब्जा लेने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन टीटी नगर तहसीलदार आवश्यक सहयोग नहीं कर रहे हैं।
बैंक का आरोप था कि कब्जा दिलाने की प्रक्रिया में जिला प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही, जिसके कारण वर्षों से मामला लंबित पड़ा हुआ है।
पांच साल से लंबित है आदेश
हाई कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी आया कि सरफेसी अधिनियम, 2002 की धारा 14 के तहत संपत्ति का कब्जा दिलाने संबंधी आदेश 25 जनवरी 2021 को पारित हुआ था। इसके बावजूद पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बैंक को कब्जा नहीं मिल सका।
12 मई 2026 के आदेश में तत्कालीन डिवीजन बेंच ने जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि इस तरह की देरी सरफेसी कानून के मूल उद्देश्य को ही विफल कर रही है, जिसका मकसद बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराना है।
पहले ही दी थी कलेक्टर को चेतावनी
12 मई के आदेश में हाई कोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को निर्देश दिया था कि बैंक को बिना किसी और देरी के कब्जा दिलाया जाए। कोर्ट ने साफ कहा था कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो कलेक्टर को भी स्वयं उपस्थित होकर कारण बताना होगा।
साथ ही तहसीलदार को देरी के कारणों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने उस समय राज्य सरकार के उप महाधिवक्ता को भी कलेक्टर और तहसीलदार के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया था।
30 जून को प्रशासन को देना होगा जवाब
अब जबकि कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन नहीं हुआ है, मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई में भोपाल कलेक्टर और टीटी नगर तहसीलदार को हाईकोर्ट के सामने जवाब देना होगा।
सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आदेश के पालन में हुई देरी का क्या कारण बताता है और हाईकोर्ट इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
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