धान घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टरों को जांच के निर्देश, जबलपुर की तारीफ
समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर में धान परिवहन में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई थी।
- तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की सतर्कता से मामला खुला।
- जांच में दूसरे जिलों तक गड़बड़ी पहुंचने का शक हुआ।
- सरकार ने धान घोटाला को लेकर27 जिलों में जांच के निर्देश दिए थे।
- अब हाई कोर्ट ने पूरे प्रदेश में जांच के आदेश दिए।
जबलपुर से खुला मामला, अब प्रदेश की बारी
जबलपुर में धान परिवहन की गड़बड़ी ने बड़ा सवाल खड़ा किया। मामला अब सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहा।
हाई कोर्ट ने इसकी जांच का दायरा बढ़ा दिया। इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले पी जी नाजपांडे के अनुसार अब पूरे प्रदेश में धान परिवहन की जांच होगी। कोर्ट ने सभी कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में नागरिक उपभोक्ता मंच ने याचिका लगाई थी। पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव याचिकाकर्ता हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। सुनवाई में दूसरे जिलों की गड़बड़ियों का मुद्दा उठा। इसके बाद कोर्ट ने राज्य स्तर पर जांच के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने की तत्कालीन कलेक्टर की तारीफ
सुनवाई में जबलपुर के तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की भूमिका चर्चा में रही। कोर्ट ने उनकी सतर्कता को खास तौर पर रेखांकित किया। दीपक सक्सेना की सतर्कता से गड़बड़ी सामने आई थी।।कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई महत्वपूर्ण थी।
अगर जांच नहीं होती, तो मामला सामने नहीं आता।
कोर्ट ने इसी बात को दूसरे जिलों से जोड़ा। सवाल उठा कि वहां ऐसी सतर्कता क्यों नहीं दिखी। कोर्ट ने दूसरे कलेक्टरों से भी कार्रवाई की उम्मीद जताई। इस टिप्पणी ने पूरे मामले को नया मोड़ दिया।
अब हर जिले में ऐसी गड़बड़ी खोजी जाएगी।
27 जिलों में जांच से सामने आई मामले की गहराई
सुनवाई के दौरान 27 जिलों का आंकड़ा सामने आया। सरकार पहले ही इन जिलों में जांच के निर्देश दे चुकी है। इससे मामला सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं दिखा। धान परिवहन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का शक बढ़ा। अब हाई कोर्ट ने जांच को पूरे प्रदेश तक बढ़ाया।
मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी का भी जिक्र हुआ। इन जिलों में कुछ मामलों पर कार्रवाई हुई है। याचिकाकर्ता ने इसे पर्याप्त नहीं बताया था। उनका कहना था कि जांच और व्यापक होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने इसी मांग को गंभीरता से लिया।
अब सभी कलेक्टरों को क्या करना होगा
हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। उन्हें अपने जिलों में धान परिवहन की जांच करनी होगी। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी होगी। जांच की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी होगी।
इससे सभी जिलों की स्थिति सामने आ सकेगी।
जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। वाहनों की वास्तविक क्षमता भी जांची जाएगी। परिवहन दस्तावेजों का भी मिलान किया जाएगा। भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
धान परिवहन में किन चीजों की होगी जांच
जांच में सबसे पहले परिवहन के रिकॉर्ड देखे जाएंगे। वाहन में वास्तव में कितना धान गया, यह देखा जाएगा। रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा से इसका मिलान होगा। वाहन की क्षमता भी जांच का हिस्सा बनेगी। इससे कागज और जमीन की हकीकत सामने आएगी।
परिवहन से जुड़े दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। भुगतान किस आधार पर हुआ, यह भी देखा जाएगा। किसे भुगतान हुआ, इसकी भी पड़ताल हो सकती है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच में आएगी। इससे गड़बड़ी की पूरी कड़ी सामने आ सकती है।
सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन से कोर्ट ने मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने सिविल सप्लाइज कारपोरेशन से जवाब मांगा है। कारपोरेशन को शपथपत्र के जरिए जानकारी देनी होगी। उसे जबलपुर मामले की कार्रवाई का ब्योरा देना होगा। प्रदेश स्तर पर उठाए कदम भी बताने होंगे। अब तक की जांच की जानकारी भी देनी होगी।
कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि कार्रवाई कहां तक पहुंची। इससे सरकारी कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी। जबलपुर की घटना के बाद क्या कदम उठे, पता चलेगा। दूसरे जिलों में क्या हुआ, यह भी सामने आएगा।
ईओडब्ल्यू को भी जांच की स्थिति बतानी होगी
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भी इस मामले में जांच कर रहा है। हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच की मौजूदा स्थिति बतानी होगी।।अब तक हुई कार्रवाई का विवरण भी देना होगा। इससे कोर्ट को जांच की दिशा पता चलेगी।
ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट मामले में अहम साबित हो सकती है। इससे जांच की गंभीरता और स्थिति साफ होगी। सरकार और जांच एजेंसी की भूमिका भी सामने आएगी। इसके बाद कोर्ट आगे के निर्देश दे सकता है।
कलेक्टर की सतर्कता बनी पूरे मामले की कुंजी
इस पूरे मामले में जबलपुर की कार्रवाई अहम रही। तत्कालीन कलेक्टर की सतर्कता से गड़बड़ी पकड़ी गई। हाई कोर्ट ने भी इस भूमिका को रेखांकित किया। यही कार्रवाई अब प्रदेशभर की जांच का आधार बनी। एक जिले की जांच ने पूरे सिस्टम पर सवाल उठाए।
कोर्ट की टिप्पणी ने प्रशासनिक जिम्मेदारी भी सामने रखी। सवाल सिर्फ गड़बड़ी पकड़ने का नहीं है। सवाल यह भी है कि पहले निगरानी क्यों नहीं हुई। अब दूसरे जिलों में भी जवाब तलाशे जाएंगे। इससे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर नजर रहेगी।
हाई कोर्ट के आदेश से आगे क्या होगा
अब प्रदेश के सभी जिलों में जांच का रास्ता खुला है। 27 जिलों में पहले से जांच के निर्देश हैं। बाकी जिलों में भी जांच की प्रक्रिया शुरू होगी।
कलेक्टर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेंगे। सिविल सप्लाइज कारपोरेशन भी अपना जवाब देगा। ईओडब्ल्यू अपनी जांच की स्थिति भी बताएगा। इन सभी रिपोर्टों से मामले की तस्वीर साफ होगी। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। जांच से धान परिवहन की पूरी व्यवस्था भी सामने आएगी। जबलपुर की सतर्कता अब प्रदेश की कसौटी बन गई है।
एक जिले की सतर्कता ने खड़ा किया बड़ा सवाल
जबलपुर में शुरू हुई जांच अब बड़ा रूप ले चुकी है। तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की सतर्कता ने मामले को सामने लाया। हाई कोर्ट ने भी इस कार्रवाई को महत्व दिया। अब पूरे प्रदेश में उसी तरह जांच की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल गड़बड़ी की असली सीमा का है।
क्या ऐसी गड़बड़ी दूसरे जिलों में भी हुई? क्या रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत अलग थी? क्या परिवहन और भुगतान में भी अंतर मिला?
इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से मिलेंगे। अब प्रदेश की नजर हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट पर रहेगी।
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