नर्सिंग घोटाले पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं होंगी परीक्षाएं
News in short
- हाईकोर्ट ने बिना अनुमति नर्सिंग परीक्षाओं पर लगाई रोक।
- 600 से अधिक कॉलेज CBI जांच में पाए गए अमानक।
- 117 कॉलेजों के छात्रों को ट्रांसफर किए बिना परीक्षा का विरोध।
- परीक्षाओं के लिए नर्सिंग काउंसिल को कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य।
- 28 अप्रैल को चीफ जस्टिस बेंच में अगली सुनवाई।
News in detail
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग घोटाले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि उसकी अनुमति के बिना किसी भी अपात्र नर्सिंग कॉलेज से जुड़े छात्रों की परीक्षा नहीं होगी।
सीबीआई जांच में सैकड़ों कॉलेज फर्जी या अमानक पाए गए थे, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट गहरा गया है। अब इस फैसले के बाद विवादित सत्र और अपात्र कॉलेज से जुड़े सभी छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं प्रभावित होगी।
बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं होंगी परीक्षाएं
मध्य प्रदेश में चर्चित नर्सिंग घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अविनेंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी विवादित नर्सिंग कॉलेज की परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी।
इस फैसले का प्रभाव नर्सिंग घोटाले के विवादित सत्र के छात्रों पर भी पड़ेगा। कोर्ट ने इस संबंध में एमपी नर्सिंग काउंसिल की अंडरटेकिंग रिकॉर्ड पर लेते हुए यह आदेश पारित किया।
फर्जी कॉलेजों का खुलासा, CBI जांच में चौंकाने वाले तथ्य
इस पूरे मामले की शुरुआत लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका से हुई थी, जिसमें वर्ष 2020-21 में खुले सैकड़ों नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में सामने आया कि करीब 800 में से 600 कॉलेज या तो पूरी तरह फर्जी हैं या फिर बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कई कॉलेज सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे थे, जबकि शिक्षकों और प्रिंसिपलों को एक साथ कई संस्थानों में दर्शाया गया था।
छात्रों के ट्रांसफर के बजाय परीक्षा की तैयारी
याचिकाकर्ता संस्था ने कोर्ट में आवेदन पेश कर आरोप लगाया कि 117 ऐसे नर्सिंग कॉलेज, जो सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए हैं, उनके छात्रों को योग्य कॉलेजों में स्थानांतरित करने के बजाय एमपी नर्सिंग काउंसिल सीधे उनकी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने जा रहा है। यह परीक्षाएं 28 अप्रैल से प्रस्तावित थीं, जिससे छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई थी।
पहले हाईकोर्ट से अनुमति, फिर परीक्षा
हाईकोर्ट ने इस मामले में साफ कर दिया है कि अब किसी भी परीक्षा के आयोजन से पहले नर्सिंग काउंसिल को कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए हैं कि छात्रों के हितों की भी अनदेखी किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी और पूरी प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी जारी रहेगी।
28 अप्रैल को अहम सुनवाई: चीफ जस्टिस बेंच करेगी फैसला
मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच के समक्ष होगी, जहां इस पूरे विवाद पर अंतिम दिशा तय हो सकती है। अब सभी की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसी के आधार पर नर्सिंग कॉलेजों की परीक्षाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
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