MP प्रमोशन में आरक्षण मामला: जस्टिस विवेक रूसिया अलग, बनेगी नई स्पेशल बेंच

Neel Tiwari | Jul 13, 2026, 15:19 IST
mp highcourt promotion reservation case
प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई एक हफ्ते के लिए टल गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस ने खुद को केस से अलग किया। स्पेशल बेंच करेगी सुनवाई। फिलहाल सरकारी प्रमोशन पर कोई रोक नहीं है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • प्रमोशन नियम 2025 को चुनौती देने वाली सात याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं।
  • सरकार ने हाल ही में प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
  • सभी प्रमोशन अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन किए जा रहे हैं।
  • आज सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक रूसिया ने खुद को मामले से अलग किया।
  • अब इस मामले की सुनवाई नई स्पेशल बेंच करेगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दस्तावेजों की जांच में जस्टिस विवेक रूसिया का नाम पुराने आर.बी. राय मामले में अधिवक्ता के रूप में सामने आया।



इसके बाद उन्होंने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। कोर्ट ने नई स्पेशल बेंच गठित करने के निर्देश दिए। फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।



प्रमोशन आरक्षण मामले में सुनवाई के दौरान आया बड़ा मोड़

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को प्रमोशन (mp Promotion) में आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया। करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों में तीखी बहस चली। इसी दौरान रिकॉर्ड की जांच करते समय जस्टिस विवेक रूसिया को एक पुराने सुप्रीम कोर्ट प्रकरण में अपना नाम अधिवक्ता के रूप में दिखाई दिया।



इसके बाद उन्होंने निष्पक्षता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। साथ ही नई स्पेशल बेंच गठित करने के निर्देश भी दिए। अदालत ने संकेत दिया कि मामले को अगले सप्ताह फिर सूचीबद्ध किया जाएगा।



सभी प्रमोशन अंतिम फैसले के अधीन हैं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रमोशन नहीं होने के कारण प्रशासन प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में पद खाली हैं और कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा जारी सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन किए जा रहे हैं।



उन्होंने यह भी कहा कि पहले दिया गया मौखिक आश्वासन किसी न्यायिक आदेश में दर्ज नहीं था। इसलिए उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने भी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए प्रमोशन प्रक्रिया का आधार रखा।



प्रमोशन पर रोक और आदेश रद्द करने की मांग

सामान्य वर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष शर्मा ने सरकार के कदम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को प्रमोशन शुरू करने थे तो पहले हाईकोर्ट के सामने आकर अनुमति लेनी चाहिए थी।



उनका कहना था कि बिना अदालत की अनुमति प्रमोशन शुरू करने से आगे फिर नए विवाद खड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि अब तक जारी किए गए प्रमोशन आदेश निरस्त किए जाएं और आगे की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।



सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ याचिकाकर्ता प्रतिनियुक्ति पर हैं और प्रमोशन का सीधा प्रभाव उन पर नहीं पड़ता। इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों में बहस हुई।



कोर्ट ने फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई

सुनवाई के अंत में सबसे बड़ा घटनाक्रम जस्टिस विवेक रूसिया के स्वयं को मामले से अलग करने का रहा। इसके बाद अदालत ने इस याचिका के लिए नई स्पेशल बेंच गठित करने के निर्देश दिए। हालांकि अदालत ने आज की सुनवाई में प्रमोशन प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई।



इसका अर्थ यह है कि फिलहाल सरकार की जारी प्रक्रिया पर कोई न्यायिक स्थगन आदेश नहीं है। अब सभी पक्षों की नजर नई बेंच के गठन और अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई पर रहेगी, जहां इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय होगी।



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