MP उच्च शिक्षा में CR घोटाला? नियमों के खिलाफ सालों से समकक्ष ही लिख रहे गोपनीय रिपोर्ट, विभाग खामोश

Ramanand Tiwari | Apr 14, 2026, 22:44 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग में गोपनीय रिपोर्ट (CR) को लेकर बड़ा विवाद उठ गया है। समकक्ष अधिकारी एक-दूसरे की CR लिख रहे हैं, जिससे निष्पक्षता संदिग्ध हो रही है।

News In Short

  • समकक्ष अधिकारी एक-दूसरे की CR लिख रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
  • नियमित प्राचार्य के बजाय चार्ज वाले प्राचार्य CR लिख रहे हैं।
  • UGC और NAAC की गाइडलाइन की अनदेखी हो रही है।
  • CR लिखने में निष्पक्षता की कमी और आरोप बढ़े हैं।
  • विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

News In Detail

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में गोपनीय चरित्रावली (CR) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। GAD के साफ नियमों के बावजूद वर्षों से समकक्ष और कनिष्ठ अधिकारी ही एक-दूसरे की CR लिख रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विभाग को बार-बार अवगत कराने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



नियम क्या कहते हैं, और हो क्या रहा है

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 4 अगस्त 1980 के आदेश के मुताबिक, कोई भी अधिकारी यदि उच्च पद का प्रभार संभाल रहा है, तो वह अपने मूल पद के समकक्ष अधिकारियों की CR में टीका (रिमार्क) नहीं लिख सकता, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।



प्रदेश के ज्यादातर सरकारी कॉलेजों में नियमित प्राचार्य नहीं हैं और प्रभारी व्यवस्था चल रही है। ये प्रभारी प्राचार्य, जो मूल रूप से प्रोफेसर ही हैं, अपने ही समकक्ष साथियों की CR लिख रहे हैं।



‘चार्ज वाले’ प्राचार्य भी लिख रहे CR

नियमों के अनुसार, केवल नियमित (रेगुलर) प्राचार्य ही CR लिखने के अधिकृत होते हैं। इसके बावजूद चार्ज पर बैठे प्राचार्य लगातार गोपनीय प्रतिवेदन तैयार कर रहे हैं। इससे न सिर्फ नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता भी संदिग्ध हो गई है।



आपसी खींचतान ने बढ़ाई टेंशन

नई भर्ती और युवा प्रोफेसरों के चार्ज में आने के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। अब समकक्ष अधिकारी एक-दूसरे की CR खराब करने के आरोपों में घिर रहे हैं। इस ‘नूरा कुश्ती’ का असर यह है कि मामलों ने कोर्ट का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे न्यायालयों में भी केस बढ़ रहे हैं।



गाइडलाइन भी नजरअंदाज

UGC के नियम स्पष्ट कहते हैं कि समकक्ष अधिकारी CR में रिमार्क नहीं लिख सकते। वहीं NAAC की प्रक्रिया में IQAC (Internal Quality Assurance Cell) की भूमिका गुणवत्ता सुधार तक सीमित है, न कि व्यक्तिगत CR में नकारात्मक टिप्पणियां दर्ज करने की। इसके बावजूद “पढ़ाई में रुचि नहीं”, “शासकीय कार्य में सहयोग नहीं” जैसे रिमार्क धड़ल्ले से लिखे जा रहे हैं।



कौन लिखे CR? यह है तय प्रक्रिया

विशेषज्ञों के अनुसार, CR में अंतिम टिप्पणी और मूल्यांकन उच्च स्तर की कमेटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए, जैसे आयुक्त कार्यालय स्तर पर गठित समिति। समकक्ष स्तर पर केवल तथ्यात्मक जानकारी दी जा सकती है, न कि मूल्यांकनात्मक रिमार्क।



संघ का हमला: ‘विभाग लाचार और बेबस’

प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. आनंद शर्मा ने इस पूरे मामले पर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि GAD के नियमों के विरुद्ध वर्षों से CR लिखी जा रही है।



इस मुद्दे को कई बार विभाग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।



बड़ा सवाल: आखिर कब रुकेगा यह खेल?

सवाल सीधा है-जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर उनका पालन क्यों नहीं हो रहा? अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह विवाद न केवल विभाग की साख को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालेगा।



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