युवा IAS को ग्राउंड टेस्ट: आदिवासी जिलों में पहली पोस्टिंग, मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक दांव

Ramanand Tiwari | Apr 25, 2026, 24:06 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. सीएम मोहन यादव ने 2025 बैच के 8 IAS अधिकारियों को आदिवासी और पिछड़े जिलों में तैनात किया। यह निर्णय उन्हें जमीनी अनुभव देने के लिए है।

मध्यप्रदेश में नए IAS अधिकारियों की पहली पोस्टिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2025 बैच के 8 युवा अधिकारियों को सीधे आदिवासी और पिछड़े जिलों में सहायक कलेक्टर बनाकर भेजने का निर्णय लिया है। साफ है सरकार चाहती है कि ये अधिकारी शुरुआत से ही जमीनी हकीकत समझें, न कि सिर्फ दफ्तरों तक सीमित रहें।



क्या है पूरा फैसला?

राज्य सरकार ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 8 परिवीक्षाधीन IAS अधिकारियों को मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात किया है। इनकी पोस्टिंग खास तौर पर ऐसे जिलों में की गई है, जहां प्रशासनिक चुनौतियां ज्यादा हैं और विकास की जरूरत भी।



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मुख्य बातें एक नजर में...

  • 2025 बैच के 8 IAS अधिकारियों की पहली पोस्टिंग।
  • पद: सहायक कलेक्टर।
  • फोकस: आदिवासी और ग्रामीण जिले।
  • ट्रेनिंग के बाद सीधे फील्ड में तैनाती।
  • उद्देश्य: जमीनी अनुभव और बेहतर प्रशासनिक समझ।

क्यों अहम है ये फैसला?

यह सिर्फ एक रूटीन पोस्टिंग नहीं है। सरकार का साफ संदेश है कि अफसरों को शुरुआत से ही असली भारत—गांव, आदिवासी इलाके और चुनौतियों भरे क्षेत्र को समझना होगा।



ऐसे इलाकों में काम करने से अधिकारी नीतियों को जमीन पर लागू करने की असली कठिनाई समझते हैं, जिससे आगे चलकर फैसले ज्यादा व्यावहारिक बनते हैं।



ये जिले बने ‘प्रशासनिक पाठशाला’

मध्यप्रदेश के कई जिले लंबे समय से विकास की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।



  • झाबुआ
  • धार
  • बड़वानी
  • मंडला
  • सिंगरौली
  • कटनी
  • खंडवा
  • बैतूल

इन इलाकों में काम करना किसी भी नए अधिकारी के लिए सीधी परीक्षा माना जाता है।



किन अधिकारियों को कहां मिली जिम्मेदारी?

आयुषी बंसल- झाबुआ


आशी शर्मा- धार


माधव अग्रवाल- बड़वानी


सौम्या मिश्रा- सिंगरौली


श्लोक वाइकर- कटनी


शिल्पा चौहान- खंडवा


खोट पुष्पराज नानासाहेव- बैतूल


शैलेन्द्र चौधरी- मंडला



कब संभालेंगे कार्यभार?

ये सभी अधिकारी 17 अप्रैल 2026 को मसूरी से ट्रेनिंग के बाद कार्यमुक्त हुए हैं। निर्धारित जॉइनिंग अवधि के बाद अपने-अपने जिलों में कार्यभार संभालेंगे।



सरकार का बड़ा मैसेज क्या है?

सरकार इस फैसले के जरिए यह दिखाना चाहती है कि प्रशासन सिर्फ फाइलों से नहीं चलता, बल्कि जमीन पर मौजूद लोगों की जरूरतों को समझकर चलता है। यानी आने वाले समय में ऐसे अफसर तैयार करने की कोशिश है, जो सिर्फ आदेश देने वाले नहीं, बल्कि लोगों के बीच काम करने वाले हों।



मोहन यादव सरकार का यह कदम प्रशासनिक प्रयोग से ज्यादा एक रणनीतिक निवेश की तरह दिखता है। अगर ये अधिकारी यहां से सही अनुभव लेकर निकलते हैं, तो भविष्य में प्रदेश को ज्यादा संवेदनशील और प्रभावी प्रशासन मिल सकता है। IAS अधिकारी



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