MP के IFS अफसरों ने टाइगर रिजर्व के पास खरीदी जमीनें, संपत्ति का ब्योरे में खुलाासा
मध्य प्रदेश में वन और पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले आईएफएस (IFS - Indian Forest Service) अफसरों की संपत्ति के ब्योरे ने चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आईएएस और आईपीएस अफसरों की तरह ही आईएफएस अधिकारी (IFS) भी संपत्ति के मामले में पीछे नहीं हैं। खास बात यह है कि इन अफसरों ने देश के बड़े शहरों के अलावा उन क्षेत्रों में भी संपत्ति खरीदी है जो टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) के आसपास स्थित हैं।
इन IFS अफसरों के पास सबसे ज्यादा संपत्ति
मोहन लाल मीना के पास 13 संपत्तियां
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन लाल मीना ने संपत्ति की संख्या के आधार पर टॉप में हैं। उनके पास कुल 13 प्रॉपर्टी हैं, जो विभिन्न शहरों में फैली हुई हैं।
कहां-कहां है IFS अफसरों की प्रॉपर्टी?
इन अफसरों ने अपनी प्रॉपर्टी की जानकारी में बताया है कि उन्होंने देश और प्रदेश के बड़े शहरों जैसे इंदौर (Indore), भोपाल (Bhopal), जबलपुर (Jabalpur) सहित छोटे शहरों जैसे बालाघाट (Balaghat), सिवनी (Seoni), छिंदवाड़ा (Chhindwara), खरगोन (Khargone), खंडवा (Khandwa), महेश्वर (Maheshwar) में भी जमीन, मकान और प्लॉट खरीदे हैं। खास बात यह है कि इन जिलों के जिन इलाकों में जमीन खरीदी गई हैं, वह टाइगर रिजर्व के आसपास आते हैं।
सीनियर IFS अफसरों के पास 1 करोड़ से कम संपत्ति
प्रॉपर्टी डिक्लेरेशन में कुछ हाई प्रोफाइल IFS अफसरों ने कोई संपत्ति नहीं होने की बात कही है। इनमें बसवराज अन्नेगिरी, बासु कनौजिया जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। वहीं, एचएस मोहंता, डॉ. समीता राजौरा, देव प्रसाद जे, रमेश चंद्र विश्वकर्मा जैसे अधिकारियों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ से कम बताई है।
कई अधिकारियों ने अपनी संपत्ति निल बताई
वन विभाग के 187 आईएफएस अधिकारियों में से 58 ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है, जिनमें वाइल्ड लाइफ चीफ शुभरंजन सेन जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन अधिकारियों ने भी अपनी संपत्ति का विवरण देते हुए इसे शून्य बताया है। इसके अलावा, कुछ अधिकारियों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ रुपये से कम घोषित की है। सभी आईएफएस अधिकारियों को अपनी और अपने जीवनसाथी के नाम पर मौजूद संपत्तियों का विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
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