इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड सिर्फ 14 हजार, महीना कैसे चले, मगर मरीज क्यों भुगतें?

Manya Jain | Sept 09, 2026, 12:23 IST
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मध्य प्रदेश में स्टायपेंड बढ़ाने की मांग पर इंटर्न डॉक्टर हड़ताल पर हैं। ओपीडी और ऑपरेशन ठप होने से मरीज बेहाल हैं। जानिए डॉक्टरों और सरकार के पक्ष पर Thesootr की पूरी रिपोर्ट।

मप्र की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर हैं। स्टायपेंड बढ़वाने के लिए इंटर्न डॉक्टर हड़ताल पर हैं। OPD ठप पड़ी हैं। जरूरी ऑपरेशन कई दिनों से टाले जा रहे हैं और सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज खुद दुआ कर रहे हैं कि- कैसे भी करके ये हड़ताल टल जाए और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दोबारा ढर्रे पर आ जाएं….



यह भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों की आज की तस्वीर है। यह सही है कि इंटर्न डॉक्टर्स की मांगें सही हो सकती हैं, मगर मरीजों की जान से खिलवाड़ क्यों? ऐसा नहीं है कि सरकार इंटर्न के लिए कुछ नहीं करती। आपको शायद ही पता हो कि हर साल सरकार इंटर्न की फीस का एक लाख रुपए अपनी जेब से भरती है… खैर हड़ताल के बीच समझते हैं पूरे विवाद के पीछे क्या कुछ है…



Thesootr की इस पड़ताल में आज हम इंटर्न डॉक्टर्स और सरकारी पक्ष दोनों को बारे में विस्तार से बात करेंगे…



समझें क्या है मामला

मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर का मौजूदा स्टाइपेंड सिर्फ 14 हजार 337 रुपए है। वे इसे 30 हजार रुपए महीना करने की मांग पर अड़े हैं। सोमवार यानी 7 सितंबर 2026 को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।



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इसके बाद विरोध और तेज हो गया। बुधवार को आंदोलन का तीसरा दिन है और प्रदेशभर की OPD सेवाएं ठप हो गई हैं। दरअसल इंटर्न डॉक्टर ही OPD में मरीजों की पहली जांच करते हैं। पर्चे बनाते हैं। वार्ड में ड्यूटी संभालते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में अस्पताल का पूरा ढांचा लड़खड़ा जाता है।



तो क्या ये मांग अचानक उठी या फिर इसका कोई इतिहास भी है?



पूरी टाइमलाइन समझिए

दरअसल यह आंदोलन अचानक नहीं फूटा। इसकी जड़ें कई साल पीछे जाती हैं।



मप्र के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 5 अक्टूबर 2018 को एक आदेश जारी किया था। आदेश में लिखा था कि इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI के आधार पर अपने आप बढ़ेगा। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2022 से लागू होनी थी। जून 2021 में स्टाइपेंड 10 हजार से बढ़कर 12 हजार हुआ। इसके बाद 13 मार्च 2026 को यह बढ़कर 14 हजार 337 रुपए हो गया।



लेकिन असल बात यह है कि 2025-26 की वार्षिक वृद्धि 1 अप्रैल 2025 से लागू होनी थी। वह समय पर आई ही नहीं। इसके बाद जून 2025 में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JUDA) मध्य प्रदेश ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को इस देरी पर पत्र लिखा।



फिर 9 मार्च 2026 से जूनियर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू किया। हड़ताल की चेतावनी भी दी। डिप्टी सीएम और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त से बैठक के बाद यह आंदोलन 16 मार्च तक के लिए स्थगित हो गया, लेकिन स्टाइपेंड में बढ़ोतरी तब भी नहीं हुई।



गर्मी बीतते-बीतते इंटर्न डॉक्टर्स का सब्र टूट गया। 9 जुलाई 2026 से इंटर्न डॉक्टरों ने लगातार ज्ञापन, पदयात्रा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। जब कुछ असर नहीं हुआ, तो 1 अगस्त 2026 से प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब 3 हजार 600 इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। सरकार ने एक महीने में फैसले का आश्वासन दिया। डेढ़ महीना बीत गया, लिखित आदेश ही नहीं आया। नतीजा, सोमवार को इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल से मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकाला, जहां पुलिस से झड़प हुई।



अगर सिर्फ 2026 की गिनती करें तो इंटर्न की इस मांग को लेकर मार्च 2026 से सितंबर तक यह तीसरा दौर है।



इंटर्न डॉक्टर किसे कहते हैं और यह क्यों जरूरी है

इंटर्न डॉक्टर वो छात्र होते हैं जो साढ़े चार साल की MBBS पढ़ाई और अंतिम परीक्षा पूरी कर चुके हैं। इसके बाद उन्हें एक साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी होती है। इसे CRMI यानी Compulsory Rotatory Medical Internship कहा जाता है। यह नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की CRMI रेगुलेशन 2021 के तहत अनिवार्य है।



इस दौरान छात्र मेडिसिन, सर्जरी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स जैसे अलग-अलग विभागों में घूम-घूम कर काम सीखते हैं। इसका बेसिक मकसद यही है कि डिग्री मिलने से पहले छात्र मरीजों पर निगरानी में असली क्लिनिकल अनुभव ले लें। बिना यह इंटर्नशिप पूरी किए न तो MBBS डिग्री मिलती है।



न मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होता है। ना ही NEET PG परीक्षा दी जा सकती है। यानी इंटर्नशिप कोई वैकल्पिक चरण नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने की अनिवार्य सीढ़ी है। पूरा MBBS कोर्स इस तरह साढ़े पांच साल का बनता है।



वॉटर कैनन चलाने से बिगड़े हालात

सोमवार को पुलिस और डॉक्टरों में झड़प हुई। वाटर कैनन चला। इस कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर बल प्रयोग गलत था। इसके बाद गांधी मेडिकल कॉलेज यानी GMC भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स भी समर्थन में उतर आए हैं। नियमित OPD और इलेक्टिव ऑपरेशन थिएटर का बहिष्कार कर दिया है। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं हर जगह जारी हैं।



लेकिन सवाल यह है, आखिर मांग कितनी जायज है? आंकड़े देखें तो जवाब साफ मिलता है।



doctors stipend


यानी ओडिशा और मध्य प्रदेश के बीच हर महीने करीब 30 हजार रुपए का फर्क है। सालाना हिसाब से यह अंतर साढ़े तीन लाख रुपए के आसपास बैठता है।


बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हाल ही में इंटर्न डॉक्टरों ने 12 हजार 300 रुपए स्टाइपेंड के विरोध में हड़ताल की थी। वहां भी 30 हजार रुपए की मांग उठी है। उत्तर प्रदेश ने अगस्त 2026 में ही अपना स्टाइपेंड 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया है। जिसका फायदा करीब 20 हजार एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरको मिलेगा।



कुल मिलाकर तस्वीर यही बनती है कि 12 से 14 घंटे की ड्यूटी के बदले मध्य प्रदेश का स्टाइपेंड देश के औसत से काफी नीचे है।



इंटर्न को स्टाइपेंड के अलावा और क्या सुविधाएं मिलती हैं

अब दूसरा बड़ा सवाल यह है कि क्या स्टाइपेंड के अलावा इंटर्न डॉक्टरों को कोई और आर्थिक सहायता मिलती है? यहां दो चीजों को अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि अक्सर इन्हें मिलाकर देखा जाता है।



पहली, मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना यानी MMVY। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सालाना फीस एक लाख 14 हजार रुपए है। जिसमें एक लाख रुपए ट्यूशन फीस और 14 हजार रुपए कॉशन मनी है। पात्र छात्रों को MMVY के तहत पूरी एक लाख रुपए ट्यूशन फीस सरकार भरती है। छात्र को सिर्फ 14 हजार रुपए कॉशन मनी देनी पड़ती है।



निजी मेडिकल कॉलेज में तो यह राहत और बड़ी है। क्योंकि वहां सालाना फीस अब बढ़कर 18.08 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। पूरे साढ़े चार साल के कोर्स की फीस 60 से 80 लाख रुपए तक जा सकती है। MMVY के तहत यह पूरी फीस भी सरकार भर सकती है, बशर्ते छात्र पात्रता की शर्तें पूरी करे।



दूसरी, SC, ST और अन्य वर्गों के लिए अलग से मिलने वाली पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं। ये योजनाएं सामाजिक न्याय विभाग के जरिए चलती हैं। आमतौर पर स्कूल- कॉलेज की सामान्य पढ़ाई के दौरान लागू होती हैं। साफ कहें तो, फीस माफी की सुविधा भरपूर है, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान रोजमर्रा के खर्च के लिए स्टाइपेंड ही एकमात्र नियमित आय है। और यही असली विवाद की जड़ है।



आगे क्या होगा

फिलहाल सरकार मुख्यमंत्री के लौटने के बाद फैसला लेने की बात कह रही है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल चर्चा का भरोसा दे चुके हैं। लेकिन इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश से कम पर मानने को तैयार नहीं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और लंबा खिंच सकता है, और मरीजों की परेशानी बढ़ती रहेगी।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि इंटर्न डॉक्टर अभी सीख ही रहे हैं, इसलिए कम पैसे मिलना स्वाभाविक है। लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी अस्पतालों की OPD और इमरजेंसी का बड़ा हिस्सा यही इंटर्न डॉक्टर संभालते हैं। यानी सिस्टम जिन पर सबसे ज्यादा निर्भर है, उन्हीं को सबसे कम भुगतान मिल रहा है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

यह मामला संवैधानिक अधिकारों के दो पहलुओं को छूता है। एक तरफ अनुच्छेद 19 के तहत डॉक्टरों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, दूसरी तरफ अनुच्छेद 21 के तहत मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवा पाने का अधिकार है। पुलिस बल प्रयोग की सीमा और सरकारी आश्वासनों की जवाबदेही, दोनों ही लोकतांत्रिक और नैतिक रूप से अहम सवाल हैं।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टर का वर्तमान स्टाइपेंड कितना है और मांग क्या है?
    वर्तमान स्टाइपेंड 14,337 रुपए प्रतिमाह है। इंटर्न डॉक्टर इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं, यह मांग जुलाई 2026 से लगातार जोर पकड़ रही है।
  2. इंटर्न डॉक्टर किसे कहा जाता है?
    MBBS की साढ़े चार साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप, यानी CRMI, करने वाले छात्रों को इंटर्न डॉक्टर कहा जाता है। यह डिग्री और रजिस्ट्रेशन के लिए अनिवार्य है।
  3. दूसरे राज्यों में इंटर्न डॉक्टर को कितना स्टाइपेंड मिलता है?
    ओडिशा में सबसे ज्यादा 44,319 रुपए, झारखंड में 30 हजार, तेलंगाना में 29,192 रुपए मिलते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश से थोड़ा ज्यादा 15,900 रुपए स्टाइपेंड मिलता है।

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