त्रेतायुग से पुराना है एमपी के गुना का केदारनाथ धाम, सावन पर मचेगी धूम
MP Kedarnath Dham: जब भी केदारनाथ का नाम आता है, तो उत्तराखंड की बर्फीली वादियों और भव्य मंदिर की तस्वीर सामने आ जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के घने जंगलों के बीच भी प्राचीन शिव मंदिरकेदारनाथ धाम छिपा हुआ है?
गुना जिले का ये अलौकिक मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पुराने इतिहास के लिए मशहूर है। लेकिन पिछले तीन साल से यहां सन्नाटा पसरा है। शिव भक्त अपने आराध्य के दर्शन को तरस रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस जागृत महादेव मंदिर के द्वार पर ताला लटकाना पड़ा? आइए इस धाम के रहस्यों के बारे में जानें...
तीन साल से बंद हैं मंदिर के पट
पिछले तीन सालों से इस मंदिर में सन्नाटा पसरा हुआ है। चट्टानों में आई दरारों के कारण इसे बंद किया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए यह कड़ा कदम उठाया। भक्त लंबे समय से मंदिर खोलने की मांग कर रहे हैं। अब सावन के पावन महीने से पहले उम्मीद जागी है। भक्त चाहते हैं कि वे इस बार भोलेनाथ को जल चढ़ाएं।
इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होगा। सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ने वाला है। सनातन धर्म में इस महीने का बहुत बड़ा महत्व है। सालों से भक्त इस पवित्र महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दौरान लोग शिव भक्ति में पूरी तरह लीन हो जाते हैं। वे भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
घने जंगलों के बीच बसा है यह धाम
यह पवित्र मंदिर गुना शहर से 30 किलोमीटर दूर है। यह बमोरी विधानसभा के महोदरा गांव के जंगलों में है। कतरीली पहाड़ियों के बीच यह धाम बेहद खूबसूरत दिखता है। यह प्रसिद्ध स्थल बेहतरीन पर्यटन केंद्र के रूप में जाना जाता है।
यहां के प्राकृतिक झरने लोगों का मन मोह लेते हैं। हर कोई इस अद्भुत नजारे को देखना चाहता है। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने इस मंदिर को घेरा है। कतरीली चट्टानों में आई दरारें किसी खतरे से कम नहीं हैं।
इसी वजह से यहां आम लोगों की एंट्री बंद है। हाल ही में भोपाल से वैज्ञानिकों की एक टीम आई थी। वैज्ञानिकों ने मंदिर परिसर का चार घंटे तक बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने तीन हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने का वादा किया है।
रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं भक्त
वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही अगला फैसला होगा। क्या इस साल भी भक्तों को बाहर से दर्शन करना होगा? या फिर मंदिर के मुख्य द्वार को खोल दिया जाएगा?
मंदिर के महंत शिवनाथ गणेश गिरी महाराज ने इस पर बात की। उन्होंने कहा कि अभी प्रशासन से कोई नई सूचना नहीं मिली है। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट का सबको बहुत बेसब्री से इंतजार है। महंत जी ने बताया कि दूर-दूर से श्रद्धालु आ रहे हैं। लेकिन वे मुख्य गुफा या नीचे मंदिर में नहीं जा सकते।
वे महाराज जी के आश्रम में रखे सिंहासन के दर्शन करते हैं। सिंहासन के दर्शन करके ही भक्त वापस अपने घर लौट रहे हैं। भक्तों के मन में भोलेनाथ के दर्शन की तीव्र इच्छा है। वे लगातार भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
त्रेतायुग से भी पुराना है इतिहास
इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। मान्यताओं के मुताबिक, यह मंदिर त्रेतायुग से भी पहले का है। पौराणिक कथाओं में भी इस क्षेत्र का खास जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव ने स्वयं विश्राम किया था।
सदियों से यह स्थान तपस्वियों की तपोभूमि रहा है। इसकी अलौकिक शक्ति श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है। प्रशासन ने जुलाई 2024 में मुख्य द्वार पर ताला लगाया था। भारी बारिश के कारण चट्टानें खिसकने का डर बना रहता है।
किसी भी बड़ी जनहानि को रोकने के लिए यह जरूरी था। जनसुनवाई में भी मंदिर खोलने के लिए कई आवेदन दिए गए। स्थानीय लोग और भक्त लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस सावन में रास्ता जरूर निकलेगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
शिवलिंग की पूजा से मिलते हैं अद्भुत लाभ, जानें शिव महापुराण में क्या है लिखा
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
गीता में कृष्ण ने क्यों कहा मैं वृक्षों में पीपल हूं, जानें पीपल पूजा के नियम
शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व