खाद उठाव के आंकड़ों ने बढ़ाई हलचल, अब सिस्टम पर होगी सीधी निगरानी
ऐसे समझें मामला...
- कई जिलों में खाद उठाव कई गुना बढ़ा।
- छतरपुर में सबसे बड़ा अंतर सामने आया।
- कलेक्टरों की निगरानी में जांच होगी।
- किसान के नाम पर उठाव का सत्यापन होगा।
- स्टॉक से ज्यादा वितरण पर फोकस।
मध्यप्रदेश में रबी सीजन से पहले खाद का अग्रिम उठाव बढ़ा है। कुछ जिलों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले उठाव कई गुना अधिक दर्ज हुआ। आंकड़ों में बड़ा अंतर आने के बाद विभाग ने वितरण व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
मामला सिर्फ स्टॉक का नहीं है। अब यह देखा जाएगा कि किसान के नाम पर उठी खाद वास्तव में उसी किसान तक पहुंची या वितरण की किसी कड़ी में अंतर आया।
छतरपुर के आंकड़ों ने खींचा ध्यान
छतरपुर में पिछले साल करीब 255 मीट्रिक टन खाद का उठाव हुआ था। इस बार करीब 12 दिनों में ही यह आंकड़ा लगभग 2500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।
अशोकनगर, गुना, जबलपुर, रायसेन, सिवनी, देवास, सतना, धार और शिवपुरी में भी उठाव काफी ज्यादा दर्ज हुआ। आगर-मालवा, सीहोर, इंदौर, मंदसौर और बैतूल में भी पिछले साल के मुकाबले करीब आठ गुना तक अंतर मिला।
अब वितरण की पूरी चेन जांचेगी
जांच में मार्कफेड केंद्रों, पैक्स और खाद वितरण समितियों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। रिकॉर्ड में दर्ज किसानों की जानकारी को वास्तविक उठाव से जोड़ा जाएगा।
विभाग यह भी देखेगा कि खाद लेने वाले किसान वास्तव में मौजूद हैं और उन्होंने ही खाद प्राप्त की है। रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण में अंतर मिलने पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
ई-टोकन बंद होने के बाद बदला पैटर्न
29 जुलाई के बाद ई-टोकन व्यवस्था बंद कर खाद का वितरण सीधे शुरू किया गया था। इसके बाद 14 से 17 अगस्त के बीच स्टॉक और उठाव का मिलान किया गया।
इसी प्रक्रिया में कुछ जिलों का उठाव पिछले साल की समान अवधि से बहुत ज्यादा मिला। रबी की तैयारी में अग्रिम खाद उठाना स्वाभाविक है, लेकिन बड़े अंतर ने निगरानी की जरूरत बढ़ा दी है।
प्रदेश में खाद का स्टॉक पर्याप्त
विभाग के अनुसार प्रदेश में करीब 4.35 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। पिछले साल इसी समय करीब 1.56 लाख मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक में था।
एनपीके और डीएपी का संयुक्त स्टॉक करीब 4.40 लाख मीट्रिक टन बताया गया है। इसलिए फिलहाल मुख्य चिंता उपलब्धता से ज्यादा वितरण व्यवस्था की निगरानी को लेकर है।
रबी में मांग बढ़ना तय
गेहूं और चने की बुवाई के कारण रबी में खाद की मांग बढ़ती है। पिछले साल खरीफ में करीब 28 लाख मीट्रिक टन खाद वितरित हुई थी, जबकि रबी में खपत करीब 39 लाख मीट्रिक टन रही। अक्टूबर से दिसंबर के बीच मांग सबसे ज्यादा रहती है। इसी वजह से सरकार किसानों को पहले से खाद लेने की सुविधा दे रही है।
‘हर घर खाद’ के बीच निगरानी अहम
20 अगस्त से ‘हर घर खाद’ अग्रिम उठाव अभियान शुरू किया गया है। किसान रबी की जरूरत के लिए पहले खाद ले सकते हैं और शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा भी दी जा रही है।
ऐसे में बढ़े हुए उठाव की जांच अभियान की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। आंकड़े यह बताएंगे कि अतिरिक्त उठाव किसानों की वास्तविक जरूरत का हिस्सा है या वितरण व्यवस्था में अतिरिक्त नियंत्रण की जरूरत है। अब निगरानी का केंद्र खाद का स्टॉक नहीं, बल्कि किसान के नाम से शुरू होकर वितरण केंद्र तक पहुंचने वाली पूरी प्रक्रिया है।
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