भूमिहीनों को जमीन देने में MP देश में दूसरे नंबर पर, आवास का सपना अब भी अधूरा

Amresh Kushwaha | Aug 24, 2026, 08:40 IST
मध्यप्रदेश में 13 लाख से अधिक घर अब भी अधूरे
मध्य प्रदेश में भूमिहीन परिवारों को जमीन देने के मामले में देश में दूसरा स्थान मिला है। प्रदेश के 95.84% पात्र परिवारों को प्लॉट मिल चुका है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में यह जानकारी दी। हालांकि मध्यप्रदेश में अभी 13.96 लाख आवास अधूरे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में 95.84% भूमिहीन परिवारों को अब जमीन मिल चुकी है।
  • इस मामले में देश में मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
  • यह जानकारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में दी।
  • वहीं, आवास की बात करे तो यह सपना अब भी लाखों परिवारों के लिए अधुरा है।
  • मध्यप्रदेश में अभी भी 13.96 लाख आवास अधूरे पड़े हैं।

मध्य प्रदेश में गरीब और भूमिहीन परिवारों के अपने पक्के घर का सपना अभी अधूरा है। सरकार ने जमीन देने में तो अच्छी रफ्तार दिखाई है। लेकिन घर बनाने का काम उतनी तेजी से नहीं चल पाया। प्रदेश में अभी भी लाखों परिवार अपने पक्के घर का इंतजार कर रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि योजना जमीनी स्तर पर पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है।



आवास लक्ष्य कितना पूरा

पीएमएवाई-जी के तहत मध्य प्रदेश में कुल 57 लाख 74 हजार 572 ग्रामीण आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 54 लाख 18 हजार 955 आवासों की स्वीकृति जारी हो चुकी है। अब तक 43 लाख 78 हजार 398 आवास पूरी तरह बन भी चुके हैं। लक्ष्य के मुकाबले अभी भी 13 लाख 96 हजार 174 आवास अधूरे हैं। यह आंकड़ा योजना के तहत बनने वाले कुल घरों का है। इसमें सामान्य और भूमिहीन दोनों तरह के लाभार्थी शामिल हैं। इसलिए इसे सिर्फ भूमिहीन परिवारों की जमीन से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।



bf94eb86-830


MP में कितने परिवारों को जमीन

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण यानी पीएमएवाई-जी (Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin) के तहत मध्य प्रदेश में कुल 38 हजार 490 भूमिहीन परिवार चिह्नित किए गए थे। इनमें से 36 हजार 890 परिवारों को अब तक जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। यानी प्रदेश के 95.84 प्रतिशत पात्र भूमिहीन परिवारों को अपना प्लॉट मिल चुका है। सिर्फ 1,600 परिवार अभी जमीन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।



इस तरह प्रदेश में सिर्फ 4.16 प्रतिशत परिवार ही जमीन का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से कई परिवारों को मालिकाना हक तो सौंपा जा चुका है। लेकिन जमीन का कब्जा मिलना अभी बाकी है। यह जानकारी खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में दी। उन्होंने यह आंकड़ा लोकसभा में एक सवाल के जवाब में पेश किया।



4412b6b3-b20


छत्तीसगढ़ है नंबर वन

प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से आगे निकल गया है। छत्तीसगढ़ में 99.81 प्रतिशत भूमिहीन परिवारों को जमीन दी जा चुकी है। यही वजह है कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है और मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर आता है। दोनों पड़ोसी राज्यों का प्रदर्शन बाकी राज्यों से बेहतर माना जा रहा है।



संख्या में कौन आगे

हालांकि कुल संख्या के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। इस मामले में मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। कुल भूमिहीन परिवारों को जमीन देने के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। महाराष्ट्र में एक लाख 21 हजार 202 परिवारों को जमीन मिल चुकी है।



इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है, जहां 63 हजार 925 परिवारों को प्लॉट मिला है। असम में भी 41 हजार 202 भूमिहीन परिवारों को जमीन दी जा चुकी है। मध्य प्रदेश इन तीन राज्यों के बाद चौथे स्थान पर आता है। लेकिन स्ट्राइक रेट यानी कुल चिह्नित परिवारों के मुकाबले असल आवंटन के लिहाज से मप्र का प्रदर्शन कहीं बेहतर है। इसी आधार पर मप्र देश में दूसरे पायदान पर आ जाता है।



37559a8a-a39


देशभर का हाल क्या है

6 अगस्त 2026 तक पूरे देश में करीब पांच लाख 62 हजार भूमिहीन परिवार पात्र के रूप में चिह्नित किए गए। इनमें से तीन लाख 26 हजार 183 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। वहीं दो लाख 35 हजार 736 परिवारों को अभी जमीन का इंतजार है। सरकार अब इस काम को तेजी से पूरा करने में जुटी है। इसके लिए राज्यों को समयबद्ध लक्ष्य और पर्याप्त फंड दिया जा रहा है।



2029 तक दो करोड़ नए घर

केंद्र सरकार ने पीएमएवाई-जी के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। इसके तहत मार्च 2029 तक देशभर में दो करोड़ अतिरिक्त घर बनाए जाएंगे। इस काम में तेजी लाने के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। डैशबोर्ड के जरिए हर राज्य की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्रामीण राजमिस्त्रियों को खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि निर्माण तेज हो सके।



योजना कब और कहां से शुरू हुई

भूमिहीन और गरीब परिवारों को प्लॉट देने के लिए मध्य प्रदेश में एक खास योजना बनाई गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनवरी 2023 में यह योजना शुरू की थी। यह विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का समय था।



योजना की शुरुआत टीकमगढ़ जिले की बकपुरा ग्राम पंचायत से हुई थी। इस मौके पर 10 हजार 918 हितग्राहियों को आवासीय भूखंड के पट्टे बांटे गए थे। इन प्लॉट की कुल कीमत करीब 129 करोड़ 37 लाख रुपए आंकी गई थी। पूरे प्रदेश से इस योजना के लिए करीब 14 लाख आवेदन आए थे। इससे साफ पता चलता है कि लोगों में इस योजना को लेकर कितनी दिलचस्पी रही है।



सरकारी जमीन न हो तो क्या होगा

योजना शुरू करते वक्त शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा भरोसा दिया था। उन्होंने कहा था कि हर गरीब परिवार को जरूरत के हिसाब से जमीन जरूर मिलेगी। जहां सरकारी जमीन उपलब्ध होगी, वहां वही जमीन दी जाएगी। जहां सरकारी जमीन नहीं होगी, वहां जमीन खरीदकर प्लॉट दिया जाएगा। इस भरोसे ने योजना को गांव-गांव तक लोकप्रिय बना दिया।



योजना में कौन होगा पात्र

इस योजना का फायदा उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनके पास खुद का घर नहीं है। जिस परिवार के पास पांच एकड़ से कम जमीन है, वह भी पात्र माना जाता है। पीडीएस यानी पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (Public Distribution System) की दुकान से राशन लेने वाले परिवार भी आवेदन कर सकते हैं। परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता नहीं होना चाहिए। साथ ही परिवार में कोई सरकारी नौकरी में भी नहीं होना चाहिए। आवेदक का नाम 1 जनवरी 2021 की मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है।



f1ae880c-8f0


पति-पत्नी दोनों को मिलेगा हक

योजना के तहत पात्र परिवार के पति और पत्नी दोनों को संयुक्त मालिकाना हक मिलेगा। भूखंड बिना किसी प्रीमियम या भू-भाटक के बिल्कुल मुफ्त दिया जाएगा। भूखंड का अधिकतम क्षेत्रफल 60 वर्गमीटर यानी 600 वर्गफीट तय किया गया है। अगर आबादी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध नहीं होती तो कलेक्टर के पास खास अधिकार है। वे मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के तहत जमीन को आबादी घोषित कर सकते हैं।



आवेदन कैसे करें, कौन से दस्तावेज लगेंगे

योजना में आवेदन के लिए सबसे पहले SAARA पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। होम पेज पर मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करने के बाद Apply बटन दबाना होगा। इसके बाद फॉर्म में जिला, तहसील, पटवारी हल्का और गांव की जानकारी भरनी होगी। साथ ही मोबाइल नंबर जैसी निजी जानकारी भी देनी होगी। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पहचान पत्र और निवास प्रमाणपत्र जरूरी दस्तावेज हैं। इनके अलावा आय प्रमाणपत्र, आयु प्रमाणपत्र, बैंक डिटेल्स और फोटो भी लगेगी।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में कितने आवास अभी अधूरे हैं?
    मध्य प्रदेश में पीएमएवाई-जी के तहत कुल 57.74 लाख घरों का लक्ष्य था। अब तक सिर्फ 43.78 लाख घर बन पाए हैं। इस तरह प्रदेश में 13.96 लाख आवास अभी भी अधूरे हैं। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में दी है।
  2. मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
    जिस परिवार के पास खुद का घर नहीं है, वह इस योजना के लिए पात्र है। 5 एकड़ से कम जमीन वाले परिवार भी आवेदन कर सकते हैं। परिवार में कोई आयकरदाता या सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। आवेदक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है।
  3. मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत कितनी जमीन और किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
    योजना के तहत अधिकतम 600 वर्गफीट यानी 60 वर्गमीटर भूखंड मुफ्त दिया जाता है। यह भूखंड पति-पत्नी दोनों के संयुक्त नाम पर होता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पहचान पत्र, निवास और आय प्रमाणपत्र जरूरी हैं। इसके साथ बैंक डिटेल्स और फोटो भी देनी होती है।

ये खबरें भी पढ़िए...



जमीन बांटने में CG अव्वल, दूसरे स्थान पर MP, हजारों परिवारों को मिला अपना प्लॉट



MP के सरकारी खजाने पर डकैती: अफसरों ने पत्नी और रिश्तेदारों के खाते में डाले 600 करोड़



97 हजार आंगनवाड़ियां राशन को तरसीं, मध्य प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद



वीबी-जीरामजी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: मौत के सालों बाद भी लोग कर रहे मजदूरी!



Tags:
  • शिवराज सिंह चौहान
  • केंद्र सरकार
  • मध्य प्रदेश
  • प्रधानमंत्री आवास योजना
  • आवास
  • प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण