वन्यजीव अभयारण्य: जंगलों से गुजरी सड़कों पर 14 माह में 149 तेंदुओं ने गंवाई जान

Sanjay Sharma | Jun 16, 2026, 23:39 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. RTI से खुलासा: MP में 14 महीने में 149 तेंदुए मारे गए। एक तिहाई मौत सड़क दुर्घटना से, 19 तेंदुए अभ्यारण्यों से गुजरने वाले हाईवे पर। बाकी करंट, आपसी संघर्ष और बुढ़ापे से मरे।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • 14 महीने में सड़कों पर बेमौत मारे गए 50 तेंदुए।
  • RTI में खुलासा, सड़क हादसों ने ली तेंदुओं की जान।
  • 19 अभ्यारण्यों से गुजरे हाईवे पर सबसे ज्यादा मौत।
  • हाईवे बने किलर जोन, कॉरिडोर पर भी बढ़ा खतरा।
  • अभयारण्य से गुजरे मार्गों पर जीवों की सुरक्षा ताक पर।

मध्य प्रदेश सरकार के दावों के बावजूद वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। सूचना के अधिकार के माध्यम से सामने आई जानकारी ने वन्यजीव प्रेमियों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है।



दरअसल मध्य प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से गुजरी सड़कें ही जंगली जानवरों का दुश्मन बन गई हैं। इन सड़कों के निर्माण के समय सरकार ने वाइल्ड लाइफ की सुरक्षा के जो दावे किए थे वे कोरे साबित हुए हैं।



इन सड़कों के नीचे से वन्यजीवों के विचरण के लिए एलिवेटेड कॉरीडोर नहीं बनाए गए। वहीं वन्य जीव विचरण क्षेत्र की सड़कों पर जाली भी नहीं लगाई गईं। इस वजह से वन्यजीव सड़क से गुजरते समय तेज रफ्तार वाहनों के नीचे रौंदे जा रहे हैं।



149 तेंदुओं की गई जान

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे के अनुसार मध्य प्रदेश में वन क्षेत्रों से गुजरे मार्गों पर हर साल हजारों छोटे- बड़े वन्यजीव मारे जा रहे हैं। बीते 14 महीनों में अभयारण्य क्षेत्र में 149 तेंदुएं मारे गए हैं। इनमें 50 की मौत सड़कों पर वाहनों द्वारा रौंदे जाने से हुई है।



यानी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनाए गए अभयारण्य क्षेत्र की सड‍़कें ही उनका काल गई गईं हैं। इनमें से 19 तेंदुए तो अत्यंत सुरक्षा वाले स्थान पर मारे गए हैं। जबकि शेष 99 तेंदुओं की मौत वृद्धावस्था, बीमारी, टेरिटोरियल फाइट सहित दूसरी वजहों से हुई है।



सरकारी दावों से उठा पर्दा

मध्य प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए सरकार लगातार दावे करती आई है। अभयारण्य क्षेत्र से सड़कों के निर्माण के समय ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ऐलिवेटेड कॉरीडोर की प्राथमिकता तय की गई है।



यानी अभयारण्य क्षेत्रों में सघन वनों में वन्यजीवों के विचरण स्थल चिन्हित कर वहां ऐसी सड़कें बनाई जानी हैं जहां वन्य जीव नीचे से बेरोकटोक गुजर सकें।



वन्यजीव सड़कों पर वाहन की चपेट में न आएं इसके लिए इन इलाकों में दोनों ओर ऊंची जाली लगाने का भी प्रावधान किया गया है। हांलाकि एक- दो स्थानों को छोड़कर ये व्यवस्थाएं अमल में नहीं लाई गई है।



आंकड़ों से चिंतित वन्यजीव प्रेमी

टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में तेंदुओं की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। इसी वजह से एमपी देश का तेंदुआ स्टेट भी है। हाल ही में सूचना के अधिकार के तहत सामने आए आंकड़ों ने वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है।



14 महीनों में 50 तेंदुओं की सड़कों पर मौत वन विभाग के प्रयासों की हकीकत उजागर कर रही हैं। वाइल्ड लाइफ प्रेमियों का कहना है सरकार विकास के कामों की लंबी फेहरिस्त गिनाती है, लेकिन अभयारण्य क्षेत्र की सड़कों पर वन्यजीवों को बचाने के लिए कोई काम नहीं हुआ है।



दो अभयारण्य क्षेत्रों को छोड़ दें तो कहीं भी बफर जोन से गुजरे मार्गों को वन्यजीवों के लिए दुर्घटनामुक्त नहीं किया गया है।



ये वजह भी हैं जानलेवा

वन विभाग का आंकड़ा बताता है कि मध्य प्रदेश में पिछले 14 माह में 149 तेंदुआ मारे गए हैं। इनमें सड़क हादसों में हुई 50 मौत को हटा दें तो करीब 99 वन्यजीव दूसरी वजहों से मारे गए हैं। जिन वजहों से तेंदुओं की मौत हुई है उनमें सबसे बड़ी वजह उनकी वृद्धावस्था है।



एक निश्चित उम्र पूरी करने के बाद वृद्ध तेंदुए शारीरिक दुर्बलता का शिकार हो जाते हैं। कई प्रकार की बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। इसके अलावा जंगलों में मांसाहारी जीवों की बढ़ती संख्या टेरिटोरियल फाइट को भी बढ़ा रही है। इन तमाम वजहों से 99 तेंदुए मारे गए हैं। ये कारण वन्यजीवों के लिए सामान्य हैं। इसलिए चिंता सड़क हादसों ने बढ़ाई है।



संरक्षण पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के अभयारण्य क्षेत्र से गुजरी सड़कों पर तेंदुओं की मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल अभयारण्य क्षेत्र की इन सड़कों पर ऐलिवेटेड कॉरीडोर के निर्माण का काम लगभग ठप है।



बीते एक दशक में केवल दो मार्गों पर ही ऐलिवेटेड कॉरीडोर बन पाए हैं। जबकि अभयारण्य क्षेत्रों में वन्य जीवों के सुरक्षित विचरण के लिए सड़कों के नीचे अंडर पास भी बनाए जाने हैं।



वाहनों की स्पीड को नियंत्रित करने के साथ ही सड़कों पर संकेतक बोर्ड भी लगाए जाने हैं। हांलाकि, ये सब जमीनी हकीकत नहीं बन पाया है। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे से लेकर जिला मार्गों को भी अब तक वन्यजीवों के लिए सुरक्षित नहीं किया जा सकता है।



FAQ

  1. RTI में तेंदुओं की मौत का क्या आंकड़ा आया?
    RTI के जवाब में बताया गया कि MP में 14 महीने में 149 तेंदुए मारे गए। एक तिहाई मौत सड़क दुर्घटना से हुई।
  2. कितने तेंदुए हाईवे पर कितने तेंदुए की मौत हुई और क्यों?
    49-50 तेंदुए सड़क हादसों में मरे। इनमें 19 तेंदुए अभ्यारण्यों से गुजरने वाले हाईवे पर कुचले गए, क्योंकि कॉरिडोर टूटने से उन्हें सड़क पार करनी पड़ती है।
  3. तेंदुओं की मौत के दूसरे कारण क्या हैं?
    खेतों में लगे अवैध करंट, आपसी संघर्ष और बुढ़ापा/बीमारी भी मौत की वजह बने। पर सड़क और करंट इंसानी वजह से सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

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