MP के प्रमुख मंदिरों में डिजिटली देना होगा दान, राम मंदिर विवाद के बाद फैसला

Jitendra Shrivastava | Jun 21, 2026, 16:21 IST
Photograph: (THESOOTR)
UJJAIN. राम मंदिर विवाद के बाद एमपी सरकार ने महाकाल व ओंकारेश्वर सहित प्रमुख मंदिरों में ऑनलाइन दान और QR कोड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • एमपी में मंदिर दान व्यवस्था होगी डिजिटल।
  • महाकाल-ओंकारेश्वर में QR कोड से दान।
  • विशेषज्ञ समिति करेगी मंदिरों का अध्ययन।
  • CCTV निगरानी में होगी नकद राशि की गिनती।
  • अलग अकाउंटिंग सिस्टम होगा विकसित।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान विवाद [Donation Controversy] ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई।



सरकार ने महाकाल और ओंकारेश्वर समेत प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में ऑनलाइन दान प्रणाली [Online Donation System] लागू करने का बड़ा फैसला किया है। यह कदम श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।



मंदिर दान में पारदर्शिता की जरूरत

अयोध्या के राम मंदिर में हुए चंदा विवाद ने देशभर में चर्चा छेड़ दी। श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंची। मध्य प्रदेश सरकार ने इस विवाद से सबक लिया। सरकार ने मंदिर प्रबंधन (Temple Management) में बड़े बदलाव की घोषणा की।



अब प्रदेश के प्रमुख देवस्थानों में पारदर्शी दान व्यवस्था लागू होगी। यह कदम धार्मिक पर्यटन Religious Tourism) की साख बचाने के लिए भी जरूरी था। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं का एक-एक रुपया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से प्रबंधित हो।



विशेषज्ञ समिति का होगा गठन

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बड़ा ऐलान किया। ओंकारेश्वर प्रवास के दौरान उन्होंने यह जानकारी दी। सरकार जल्द ही एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) बनाएगी।



यह समिति देशभर के प्रतिष्ठित मंदिरों का दौरा करेगी। जिन मंदिरों का प्रबंधन आधुनिक और पारदर्शी है, उनका अध्ययन होगा। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।



उसी आधार पर मध्य प्रदेश के मंदिरों के लिए कार्ययोजना बनेगी। मंत्री लोधी ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। इस काम में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



डिजिटल दान को मिलेगा बढ़ावा

नई दान प्रणाली में नकद लेनदेन (Cash Transaction) को काफी हद तक कम किया जाएगा। ऑनलाइन ट्रांसफर और QR कोड से दान को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे दान की राशि सीधे मंदिर के खाते में जाएगी। बीच में किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।



डिजिटल दान (Digital Donation) से श्रद्धालु घर बैठे भी दान कर सकेंगे। यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ-साथ सुविधाजनक भी होगी। प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों में यह सिस्टम एक साथ लागू किया जाएगा।



महाकाल मंदिर की मौजूदा व्यवस्था

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पहले से कुछ बेहतर व्यवस्था है। यहां नकद दान के साथ-साथ QR कोड से भी दान लिया जाता है। भेंट पेटियों से निकलने वाले कैश को पारदर्शी कांच के कमरे में रखा जाता है।



CCTV कैमरों की निगरानी में यहां गिनती होती है। गिनती पूरी होने के बाद बैंक कर्मचारी राशि को मंदिर के मुख्य खाते में जमा करते हैं। यह व्यवस्था काफी हद तक विश्वसनीय मानी जाती है। लेकिन अब इसे और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।



ओंकारेश्वर में कैसे होता है प्रबंधन

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी दान प्रबंधन [Donation Management] की व्यवस्था सख्त है। दान पेटियों को तय तारीखों पर ही खोला जाता है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहते हैं।



पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है। शीघ्र दर्शन की राशि सीधे ऑनलाइन खाते में ट्रांसफर होती है। इस तरह की व्यवस्था पहले से मौजूद है। नई योजना के तहत इसे और मजबूत और डिजिटल बनाया जाएगा।



अलग अकाउंटिंग सिस्टम होगा शुरू

मंदिर प्रशासन एक नया अकाउंटिंग सिस्टम विकसित कर रहा है। इसमें VIP दर्शन, प्रसाद और दान के लिए अलग-अलग खाते होंगे। हर श्रेणी की आय और व्यय का स्वतंत्र हिसाब रखा जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि कौन सी राशि कहां खर्च हुई। मंदिर के चढ़ावे से मिलने वाले पैसे से मुफ्त भोजनशाला चलाई जाती है।



निर्माण कार्य और समाज सेवा के प्रकल्प भी इसी राशि से चलते हैं। नए सिस्टम से इन सभी खर्चों की जानकारी सार्वजनिक होगी। श्रद्धालुओं को पूरा भरोसा मिलेगा।



प्रदेश के मंदिरों का भविष्य

मध्य प्रदेश में तीर्थ स्थल [Pilgrimage Sites] की संख्या बहुत अधिक है। इन सभी मंदिरों में पारदर्शी व्यवस्था लागू करना बड़ी चुनौती है। लेकिन सरकार इस दिशा में दृढ़ संकल्पित है।



विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद एक एकीकृत नीति तैयार होगी। इस नीति को प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों में लागू किया जाएगा। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास बढ़ाएगी। बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश सरकार ने मंदिर दान व्यवस्था में क्या बदलाव किए हैं?
    मध्य प्रदेश सरकार ने राम मंदिर दान विवाद के बाद महाकाल और ओंकारेश्वर समेत प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में ऑनलाइन दान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत QR कोड, ऑनलाइन ट्रांसफर और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। नकद लेनदेन को कम किया जाएगा। एक विशेषज्ञ समिति देशभर के प्रतिष्ठित मंदिरों का अध्ययन करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कस्टम कार्ययोजना तैयार होगी।
  2. महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर में अभी दान की क्या व्यवस्था है?
    महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में नकद दान के साथ-साथ QR कोड और ऑनलाइन दान की व्यवस्था पहले से है। भेंट पेटियों से निकली राशि को CCTV निगरानी में पारदर्शी कांच के कमरे में गिना जाता है और सीधे बैंक खाते में जमा किया जाता है। वहीं ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में दान पेटी खोलने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और शीघ्र दर्शन की राशि सीधे ऑनलाइन खाते में जाती है।
  3. मंदिर दान का पैसा किस काम में आता है?
    मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान और चढ़ावे की राशि का उपयोग भक्तों के लिए मुफ्त भोजनशाला चलाने, मंदिर परिसर के निर्माण कार्य और समाज सेवा के विभिन्न प्रकल्पों में किया जाता है। नई व्यवस्था के तहत VIP दर्शन, प्रसाद और सामान्य दान के लिए अलग-अलग अकाउंटिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा ताकि हर रुपये का हिसाब पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक हो सके।

ये खबरें भी पढ़ें...



राम मंदिर में 60 किलो चांदी की ईंटों का हिसाब नहीं, ज्वैलर्स एसोसिएशन का आरोप



राम मंदिर दान घोटाला: चढ़ावे का पैसा कहां गया?



राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस: 6 साल के चंदे का 3 दिन में दें पाई-पाई का हिसाब



सनातन बोर्ड होता तो नहीं होती चोरी, राम मंदिर चंदा विवाद पर बोले देवकीनंदन ठाकुर



Tags:
  • ओंकारेश्वर
  • महाकाल
  • ऑनलाइन
  • दान
  • मंदिर
  • ऑनलाइन दान