फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में फंसे एमपी के 16 पुलिसकर्मियों को मिला प्रमोशन
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 194 एएसआई को एसआई पद पर पदोन्नत किया।
- इनमें 16 पुलिसकर्मी फर्जी मेडिकल बिल घोटाले के आरोपी हैं।
- इन पर 66.43 लाख रुपए की सरकारी वसूली चल रही है।
- नियम कहता है, वसूली पूरी होने तक पदोन्नति नहीं हो सकती।
- शिकायत के बाद जांच शुरू, दोषी मिलने पर नाम हटेगा।
एमपी पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में 194 सहायक उप निरीक्षकों यानी एएसआई (Assistant Sub Inspector) को सहायक निरीक्षक यानी एसआई (Sub Inspector) पद पर पदोन्नत किया है।
इस सूची में 16 ऐसे पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिन पर फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में सरकारी वसूली चल रही है। यह आदेश 13 जुलाई को जारी हुआ।
क्या है पूरा घोटाला
फरवरी 2025 में पुलिस मुख्यालय (phq bhopal) की कल्याण और लेखा शाखा ने बिलों की जांच शुरू की थी। जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था।
48 पुलिसकर्मियों ने फर्जी प्रोलॉन्ग सर्टिफिकेट के सहारे भुगतान लिया था। साल 2023-24 और 2024-25 के बीच करीब 2.87 करोड़ रुपए का गलत भुगतान हुआ था। मामले में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया था।
लेखा शाखा में तैनात रहे तीन कर्मचारी सूबेदार नीरज अहिरवार, एएसआई हरिहर सोनी और हर्ष वानखेड़े गिरफ्तार हुए थे। इन पर फर्जी प्रोलोंग सर्टिफिकेट बनाने का आरोप था।
जांच में हर्ष वानखेड़े पर 35 लाख रुपए की रिकवरी निकली। हरिहर सोनी पर 25 लाख और नीरज अहिरवार पर 20 लाख रुपए बकाया मिला। तीनों ने यह पूरी राशि एकमुश्त जमा कर दी है।
किन पर कितनी वसूली
घोटाले में शामिल 16 पुलिसकर्मियों पर कुल 66.43 लाख रुपए की वसूली निकाली गई। सबसे ज्यादा रिकवरी गौरव आरोनकर पर है, जो करीब 11 लाख रुपए है।
पूनम बघेल पर करीब 9 लाख और अंतिमा जैन पर करीब 8 लाख रुपए की वसूली है। राकेश त्रिपाठी और लीलाधर तिवारी मासिक किस्तों में राशि चुका रहे हैं। बाकी सभी पुलिसकर्मियों ने अपनी रकम एकमुश्त जमा कर दी है।
शिकायत और आरोप
पदोन्नति सूची जारी होते ही विवाद (पुलिस प्रमोशन में बड़ा खेल!) शुरू हो गया। एएसआई प्रभांशु सिंह ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अफसरों से की है। उनका कहना है कि अपात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देकर पात्र लोगों का हक मारा गया। उन्होंने रिव्यू डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति (Departmental Promotion Committee) कराने की मांग रखी है। पुलिस मुख्यालय ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जा रही है।
नियम क्या कहता है
एमपी के पदोन्नति नियम 2025 में साफ प्रावधान है। जिस कर्मचारी से सरकार को हुए नुकसान की वसूली चल रही हो, वह पदोन्नति के लायक नहीं माना जाता। वसूली पूरी होने के बाद भी एक साल तक उसे पदोन्नति नहीं मिल सकती। इसी नियम के आधार पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। पात्र कर्मचारियों को इससे सीधा नुकसान होने की बात कही जा रही है।
अफसर ने क्या कहा
डीआईजी यानी उप महानिरीक्षक (Deputy Inspector General) प्रशासन रियाज इकबाल ने इस पर सफाई दी है। उनका कहना है कि प्रमोशन के लिए तय समय सीमा थी। कई विभागों से जांच की जानकारी समय पर नहीं आ सकी। इस वजह से आपत्तियों पर फैसला नहीं हो पाया। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी की जांच चल रही है, तो उसकी पदोन्नति निरस्त की जाएगी।
आगे क्या होगा
शिकायतकर्ता का दावा है कि पात्र पुलिसकर्मी पदोन्नति सूची से बाहर रह गए। ऐसे में उनके करियर पर भी असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर पुलिस मुख्यालय की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। अगर आरोप सही साबित हुए तो सूची में बदलाव तय माना जा रहा है। तब तक यह मामला विभाग में चर्चा का विषय बना रहेगा।
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