सरकारी से प्राइवेट होंगे अस्पताल, 4000 करोड़ के 9 मेडिकल कॉलेज संभालेगी प्राइवेट कंपनियां
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार 9 सरकारी मेडिकल कॉलेज पीपीपी मोड पर देने जा रही है।
- इनमें नीमच, श्योपुर और सिंगरौली के दो साल पुराने कॉलेज भी शामिल हैं।
- हर कॉलेज बनाने में करीब 325 करोड़ रुपए का खर्च आया है।
- कुल मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपए के कॉलेज निजी हाथों में जाएंगे।
- 2021 में उज्जैन कॉलेज पर विरोध हुआ था, इस बार भी सवाल उठे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार अब अपने मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। सरकार ने नौ मेडिकल कॉलेज पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर देने की योजना बनाई है। इनमें से तीन कॉलेज पिछले दो साल से चल रहे हैं। यह फैसला कई सवाल भी खड़े कर रहा है। जमीन, भवन और मशीनें सरकारी हैं, फिर संचालन निजी हाथों में क्यों दिया जा रहा है।
कौन-कौन कॉलेज होंगे शामिल
सूची में नीमच, श्योपुर और सिंगरौली के कॉलेज शामिल हैं। ये तीनों कॉलेज दो साल से 100-100 सीटों के साथ चल रहे हैं। इनके अलावा मंडला और राजगढ़ के कॉलेज भी सूची में हैं। ये सभी कॉलेज प्रवर्तित योजना के तहत बनाए गए थे। इस सूची में तीन बड़े नेताओं के इलाके भी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र बुदनी का कॉलेज सूची में है। सांसद वीडी शर्मा के क्षेत्र छतरपुर का कॉलेज भी शामिल है। मंत्री प्रहलाद पटेल के क्षेत्र दमोह का कॉलेज भी इसमें आता है। ये सभी कॉलेज पूरी तरह सरकार ने बनाए हैं।
हर कॉलेज पर 325 करोड़ खर्च
हर मेडिकल कॉलेज के भवन पर औसतन 325 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस खर्च में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 60% रही है। बाकी 40% राशि राज्य सरकार ने खर्च की है। चालू कॉलेजों में भवन, मशीनें और फर्नीचर पर अलग से खर्च हुआ है।
इन सुविधाओं पर करीब 500 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपए के कॉलेज पीपीपी पर जाएंगे। यही बड़ी रकम इस फैसले को अहम बना रही है।
2021 का उज्जैन वाला विवाद
साल 2021 में उज्जैन मेडिकल कॉलेज को भी पीपीपी पर देने की तैयारी थी। उस समय इस फैसले का जोरदार विरोध हुआ था। विरोध के बाद सरकार ने कॉलेज को अपने नियंत्रण में ही रखा। अब नई सूची में उज्जैन की जगह दूसरे कॉलेज शामिल किए जा रहे हैं। पहले चरण में उज्जैन का प्रस्ताव हटा दिया गया है। इसकी जगह अन्य कॉलेजों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
18 सीएचसी भी लिस्ट में
इस पूरी प्रक्रिया में 18 सीएचसी (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर) भी शामिल हैं। इनमें रीवा जिले के आठ सीएचसी हैं। दमोह जिले के चार सीएचसी भी सूची में हैं। बाकी छह सीएचसी अन्य जिलों से लिए गए हैं। आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) में सभी 18 सीएचसी को एक ही प्रोजेक्ट माना गया है। यह टेंडर सीधे अस्पताल चलाने के लिए नहीं है। यह टेंडर पीपीपी मॉडल तैयार करने वाले सलाहकार चुनने के लिए है।
कैसे तय होगा पूरा मॉडल
सबसे पहले एक ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा। यह सलाहकार तय करेगा कि कॉलेज कैसे चलेंगे। वह यह भी देखेगा कि कितना निवेश जरूरी होगा। निजी पार्टनर की जिम्मेदारी क्या रहेगी, यह भी वही तय करेगा। सरकार की जिम्मेदारियां और शर्तें भी सलाहकार तय करेगा। तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय मॉडल के आधार पर पार्टनर चुना जाएगा। इसके बाद निजी कंपनी से अनुबंध किया जाएगा।
सलाहकार को 75 दिन का समय
सलाहकार को काम कई चरणों में पूरा करना होगा। पहले 15 दिन में शुरुआती रिपोर्ट देनी होगी। अगले 45 दिन में व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होगी। पूरे 75 दिन में बोली के दस्तावेज तैयार करने होंगे। यही समयसीमा सभी 18 कॉलेजों पर लागू होगी। इस रोडमैप के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
वीजीएफ से मिलेगी मदद
सलाहकार पढ़ाई की सुविधा और एडमिशन का आकलन करेगा। वह अस्पताल के संचालन का भी आकलन करेगा। यदि कोई कॉलेज निजी कंपनी के लिए फायदेमंद नहीं है, तो विकल्प है। ऐसे मामलों में वायबिलिटी गैप फंडिंग यानी वीजीएफ (वायबिलिटी गैप फंडिंग) से मदद दी जा सकती है। इससे सरकार आर्थिक सहायता देकर निजी भागीदारी को बढ़ावा देगी।
मंत्री बोले, मंजूरी पहले ही मिली
उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब मॉडल में कुछ संशोधन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नीति आयोग के टेंडर दस्तावेज राज्य में लागू होंगे। यह मॉडल वीजीएफ की गैप फंडिंग से जुड़ा हुआ है। मंत्री के इस बयान से साफ है कि प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
आगे क्या होगा अब
सरकार अगले कुछ महीनों में सलाहकार चुनने का काम पूरा करेगी। इसके बाद हर कॉलेज का बारीकी से आकलन शुरू होगा। साफ है कि आने वाले समय में तस्वीर बदल सकती है। मरीजों और छात्रों दोनों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अभी सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
ये खबरें भी पढ़िए...
16 सालों में 32 IAS ने दिया इस्तीफा, MP के 1, CG के 3 और राजस्थान के 2 अफसर शामिल
खत्म होगा सालों का इंतजार! एक साल में पूरी होगी विभागीय जांच, समय पर मिलेगा प्रमोशन
दवा के बाद शराब में जहर, फिर भी बेपरवाह FDA? जानिए क्यों नाकाम हो रहा MP का सिस्टम
काम के वक्त नो रील्स, नो स्क्रॉलिंग! अधिकारियों के लिए आ रहा सोशल मीडिया कोड