MP के अस्पतालों में दवा सप्लाई का काम अब निजी कंपनी को, 200 करोड़ होंगे खर्च

Jitendra Shrivastava | Aug 15, 2026, 14:31 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में दवा सप्लाई और वेयरहाउस मैनेजमेंट का काम अब गुजरात की निजी कंपनी को सौंपा गया है। 10 साल के लिए यह जिम्मा दिया गया, जिस पर 200 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • गुजरात मॉडल लागू, अब दवा सप्लाई पर खर्च होंगे 200 करोड़।
  • मुफ्त में होता था काम, अब निजी कंपनी को मिला ठेका।
  • 10 साल के लिए गुजरात कंपनी संभालेगी दवा सप्लाई चेन।
  • अस्पतालों तक दवा पहुंचाने का जिम्मा अब निजी हाथों में।
  • हर साल 20 से 30 करोड़ खर्च, जानें पूरी नई व्यवस्था।

मध्यप्रदेश में दवा सप्लाई व्यवस्था बदल गई है। पहले यह काम स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बिना किसी खर्च के करते थे। अब यह जिम्मा गुजरात की एक निजी कंपनी को दिया गया है। यह ठेका 10 साल के लिए दिया गया है। इस पर सरकार करीब 200 करोड़ रुपए खर्च करेगी।



मध्यप्रदेश के अस्पतालों तक दवा पहुंचाने का तरीका अब पूरी तरह बदलने वाला है। राज्य में 18 मेडिकल कॉलेज हैं। इसके अलावा 55 जिला अस्पताल और 160 सिविल अस्पताल भी हैं। साथ ही 350 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।



अब तक इन सभी जगहों तक दवाइयां और चिकित्सा सामग्री पहुंचाने का काम स्वास्थ्य विभाग खुद करता था। वेयरहाउस मैनेजमेंट भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी संभालते थे। इसमें सरकार का कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता था।



अब निजी कंपनी संभालेगी काम

सरकार ने अब यह पूरा काम गुजरात की एक निजी कंपनी को सौंप दिया है। यह जिम्मेदारी अगले 10 साल के लिए दी गई है। इस नई व्यवस्था पर हर साल 20 से 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस तरह अगले 10 साल में सरकार करीब 200 करोड़ रुपए चुकाएगी।



पहले यह काम बिना किसी खर्च के हो रहा था। अब इसी काम के लिए सरकार को हर साल बड़ी रकम देनी होगी। हालांकि सरकार का कहना है कि इससे सप्लाई व्यवस्था बेहतर होगी।



गुजरात मॉडल पर आधारित नई व्यवस्था

नई व्यवस्था गुजरात मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है। इसके तहत कंपनी को 4 से 6 महीने का बफर स्टॉक बनाए रखना होगा। इसका मकसद यह है कि इमरजेंसी में दवाओं की कमी न हो।



दवाओं की पैकेजिंग की जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी। स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड रखना भी उसी का काम रहेगा। इसके अलावा दवाओं का सुरक्षित परिवहन और समय पर आपूर्ति भी कंपनी को सुनिश्चित करनी होगी।



टेंडर प्रक्रिया पूरी, जल्द शुरू होगा काम

इस पूरी व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अब निजी एजेंसी दवा सप्लाई और स्टोरेज का पूरा काम संभालेगी। अगले चार से छह महीने के भीतर कंपनी अपने वेयरहाउस तैयार कर लेगी। इसके बाद कंपनी पूरी तरह काम शुरू कर देगी।



सरकार का दावा है कि इस बदलाव से सप्लाई चेन पहले से ज्यादा पारदर्शी होगी। साथ ही दवाओं की आपूर्ति भी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। एमपीपीएचएससीएल (MPPHSCL – Madhya Pradesh Public Health Services Corporation Limited) के महाप्रबंधक मयंक अग्रवाल ने भी इस पहल की जानकारी साझा की है।



एक्सपर्ट कोट्स

इस खबर में मयंक अग्रवाल (महाप्रबंधक, एमपीपीएचएससीएल) का नाम स्रोत में आया है, लेकिन उनका कोई सत्यापित उद्धरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह सेक्शन छोड़ा गया है। प्रकाशन से पहले उनसे वास्तविक कोट लेकर जोड़ा जा सकता है।



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