एमपी में बढ़ रहे बाल विवाह के मामले, लड़कियों से ज्यादा लड़कों की हो रही शादी
समझें क्या है पूरा मामला
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) ने बाल विवाह पर नए आंकड़े जारी किए हैं।
- मध्य प्रदेश में लड़कियों से ज्यादा लड़कों का बाल विवाह हो रहा है।
- राज्य में हर 100 में से 25 लड़कों की शादी तय उम्र से पहले हुई।
- लड़कों के बाल विवाह का यह आंकड़ा नेशनल एवरेज से 9% अधिक है।
- स्कूल ड्राप आउट यानी पढ़ाई छूटते ही बच्चों पर शादी का दबाव बढ़ जाता है।
एमपी में लड़कों का बाल विवाह क्यों बढ़ रहा है
Child marriage case in MP: मध्य प्रदेश से बाल विवाह को लेकर एक हैरान करने वाली रियलिटी सामने आई है। अब तक माना जाता था कि केवल लड़कियों की शादी कम उम्र में होती है। अब ताजा रिपोर्ट ने इस पुराने अनुमान को पूरी तरह से बदल दिया है।
अब राज्य में लड़कों के बाल विवाह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे यानी एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट इसके सीधे गवाह पेश करती है। इस सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े काफी चिंताजनक दिखाई देते हैं। आइए जानें क्या है इस रिपोर्ट में...
क्या है NFHS-6 की रिपोर्ट डेटा
इस सर्वे के डेटा के मुताबिक, एमपी में लड़कों की स्थिति बेहद खराब है। यहां हर 100 में से 25 लड़कों का विवाह समय से पहले हुआ है। लड़कों के लिए शादी की कानूनी उम्र सरकार ने 21 साल तय की है।
इसके बावजूद 25 प्रतिशत लड़के इस उम्र से पहले ही दूल्हा बन रहे हैं। ये आंकड़ा भारत के राष्ट्रीय औसत 15.9 प्रतिशत से करीब 9% ज्यादा दर्ज हुआ है। इस वजह से राज्य की सोशल पॉलिसी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या लड़कियों के बाल विवाह मामलों में सुधार हुआ
अगर हम लड़कियों (एमपी में बाल विवाह का मामला) की बात करें तो स्थिति में थोड़ा सुधार जरूर देखा गया है। राज्य में 18 साल से पहले शादी करने वाली महिलाएं 20% हैं। पिछले सर्वे यानी चार साल पहले की तुलना में इसमें 3.1% की गिरावट आई है।
पहले यह आंकड़ा करीब 23.1 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया गया था। अब महिलाओं के मामले में मध्य प्रदेश राष्ट्रीय औसत से थोड़ा बेहतर स्थिति में है। भारत में महिलाओं के बाल विवाह का नेशनल एवरेज 20.1 प्रतिशत है।
ग्रामीण-शहरी इलाकों के आंकड़ों में अंतर है
मध्यप्रदेश में बाल विवाह की ये गंभीर समस्या सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रही है। गांवों में आज भी पुरानी परंपराओं के नाम पर शादियां हो रही हैं। डेटा के मुताबिक गांवों में 28% लड़कों की शादी कानूनी उम्र से पहले हो गई।
इसके विपरीत शहरी इलाकों में यह आंकड़ा केवल 16.2 प्रतिशत ही मिला है। लड़कियों के मामले में भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बहुत बड़ा अंतर है। गांवों में 23.4% लड़कियों की शादी हुई, जबकि शहरों में यह सिर्फ 9% है।
पढ़ाई छूटने का बाल विवाह से क्या है कनेक्शन
इस पूरी रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा हुआ है। डेटा दिखाता है कि पढ़ाई छूटते ही शादी का दबाव बढ़ जाता है। मध्य प्रदेश में केवल 33.7% महिलाएं ही 10वीं क्लास तक अपनी पढ़ाई कर पाती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और खराब है, जहां सिर्फ 26% लड़कियां वहां पहुंचती हैं। लड़कों में भी 10 साल या उससे ज्यादा पढ़ने वालों का संख्या सिर्फ 42% है। स्कूल बंद होते ही घरों में शहनाई बजना शुरू हो जाती है।
बाल विवाह रोकने के लिए कानून में क्या सजा तय है
भारत के बाल विवाह कानून के मुताबिक, तय उम्र से कम में शादी कराना एक बड़ा अपराध है। इसके लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (Prohibition of Child Marriage Act) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाती है। कम उम्र में शादी कराने पर माता-पिता और रिश्तेदारों को जेल की सजा हो सकती है।
इसके साथ ही उन पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। अगर आपको कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत एक्शन लें। आप चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं।
FAQ
- एनएफएचएस-6 के मुताबिक मध्य प्रदेश में पुरुषों के बाल विवाह का क्या प्रतिशत है?
एनएफएचएस-6 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 25% पुरुषों का विवाह 21 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हो जाता है। यह आंकड़ा भारत के राष्ट्रीय औसत 15.9% से लगभग 9% अधिक है, जो राज्य में लड़कों की कम उम्र में शादी के बढ़ते ट्रेंड को दिखाता है। - क्या मध्य प्रदेश में लड़कियों के बाल विवाह के मामलों में कमी आई है?
हां, मध्य प्रदेश में लड़कियों के बाल विवाह में सुधार हुआ है। पिछले चार सालों में यह आंकड़ा 23.1% से घटकर 20% पर आ गया है। अब राज्य की स्थिति इस मामले में राष्ट्रीय औसत 20.1% से थोड़ी बेहतर हो गई है, हालांकि चुनौती अब भी बड़ी है। - बाल विवाह की शिकायत करने के लिए सरकार ने कौन से हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं?
यदि आपके आसपास कहीं भी बाल विवाह हो रहा है, तो आप तुरंत सरकारी चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके इसकी जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं की सहायता और किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए महिला हेल्पलाइन नंबर 181 भी हमेशा उपलब्ध रहता है।
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