बिना मंजूरी के भोपाल और इंदौर-उज्जैन महानगर क्षेत्र खुद बदल सकेंगे मास्टर प्लान

Aman Vaishnav | Jul 20, 2026, 09:31 IST
भोपाल और इंदौर-उज्जैन महानगर
मध्य प्रदेश सरकार ने महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम-2026 लागू कर दिया है। अब भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के विकास प्राधिकरण खुद मास्टर प्लान बना और बदल सकेंगे। इसके लिए मंत्रालय की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

मध्य प्रदेश में नया महानगर क्षेत्र नियोजन नियम लागू हो गया है।



अब भोपाल और इंदौर-उज्जैन के विकास प्राधिकरण खुद मास्टर प्लान बना सकेंगे।



हर बार मंत्रालय से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।



सरकार ने इन्हें नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की खास शक्तियां दी हैं।



इंदौर विकास प्राधिकरण पहले से ही इस व्यवस्था के तहत काम कर रहा है।



नियम में क्या बदला

मध्य प्रदेश सरकार ने महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम-2026 लागू कर दिया है। इससे भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों की प्लानिंग व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है।



अब इन क्षेत्रों के विकास प्राधिकरण खुद मास्टर प्लान बना सकेंगे। वे उसमें बदलाव भी कर सकेंगे और नई योजनाएं भी लागू कर सकेंगे। इसके लिए बार-बार वल्लभ भवन स्थित मंत्रालय से मंजूरी लेने की जरूरत खत्म हो गई है।



सरकार ने इन प्राधिकरणों को नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 से 60 तक की शक्तियां सौंप दी हैं। यही अधिकार अब तक सीमित स्तर पर मंत्रालय के पास थे।



इंदौर में पहले से लागू व्यवस्था

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) इन्हीं अधिकारों के आधार पर पहले ही करीब एक दर्जन टाउन प्लानिंग स्कीम लागू कर चुका है। अब यही व्यवस्था भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भी लागू होगी।



इसका सीधा असर भोपाल, सीहोर और रायसेन पर पड़ेगा। साथ ही इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर के चिन्हित क्षेत्र भी इसके दायरे में आएंगे। इन जगहों पर टाउनशिप, सड़क, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अब तेजी से मंजूर हो सकेंगे।



40 हेक्टेयर जमीन की शर्त जरूरी

बता दें कि निजी डेवलपर तभी मास्टर प्लान या लैंड यूज बदलवा सकेंगे, जब उनके पास एकमुश्त कम से कम 40 हेक्टेयर यानी करीब 100 एकड़ जमीन होगी। इससे कम जमीन पर लैंड यूज नहीं बदलेगा।



आवेदन के साथ डेवलपर को 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर फीस जमा करनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन दर का 15% शुल्क भी देना होगा।



लैंड यूज बदलने से पहले संबंधित क्षेत्र के अखबारों में सूचना छापी जाएगी। इसमें आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके अलावा महानगर प्राधिकरण को टाउन प्लानिंग स्कीम लागू करने की पूरी शक्ति मिलेगी।



ट्रैफिक के लिए बनेगी एक अथॉरिटी

भोपाल और इंदौर-उज्जैन क्षेत्र के लिए यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) बनाई जाएगी। इसमें मुख्य सचिव, महानगर आयुक्त, एनएचएआई, रेलवे, पुलिस, विमानन और प्रदूषण विभाग शामिल होंगे।



ये सभी विभाग मिलकर पूरे महानगर क्षेत्र की ट्रैफिक योजना तैयार करेंगे। इससे शहरों के बीच आवाजाही और परिवहन योजना बेहतर ढंग से बन सकेगी।



हित टकराव पर सख्त प्रावधान

नए नियम में पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है। अगर किसी सदस्य का किसी योजना में निजी आर्थिक हित पाया जाता है, तो राज्य सरकार उसे पद से हटा सकेगी।



बैठकों में किसी प्रतिनिधि को भेजने की अनुमति नहीं होगी। सदस्य को खुद उपस्थित रहना होगा। इसके अलावा सभी पीपीपी परियोजनाओं में निजी भागीदारों का चयन पारदर्शी ऑनलाइन टेंडर के जरिए ही होगा।



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