माध्यमिक खेल शिक्षक भर्ती 2024 हाईकोर्ट के आदेश के अधीन, DPI और ESB से मांगा जवाब

Neel Tiwari | Mar 10, 2026, 11:52 IST
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने माध्यमिक शिक्षक (खेल) भर्ती 2024 से जुड़े एक मामले में अहम अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस पद पर होने वाली सभी नियुक्तियां फिलहाल याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

News in short

  • हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षक (खेल) भर्ती 2024 की नियुक्तियों को अंतिम फैसले के अधीन रखा है।
  • राज्य सरकार, DPI और MPESB को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
  • याचिकाकर्ताओं ने D.P.Ed. को B.P.Ed. के समकक्ष मानने की मांग की है।
  • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय DPI ने D.P.Ed. को मान्य नहीं किया है।
  • पहले भी इस शिक्षक भर्ती का रिजल्ट हाईकोर्ट में विवादों में रह चुका है।

News in detail

9882 पदों के लिए निकली शिक्षक भर्ती के 338 पद अब हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन हो गए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने माध्यमिक शिक्षक (खेल) भर्ती 2024 से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है।



कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस भर्ती के तहत की जाने वाली सभी नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। यानी फिलहाल जो भी नियुक्ति होगी, वह कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर मानी जाएगी।



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क्या है पूरा विवाद?

यह याचिका मुरैना निवासी सुरेंद्र सिंह राजावत और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन में उनके D.P.Ed. (डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन) को B.P.Ed. के बराबर मानने से मना कर दिया गया। इसी कार्रवाई को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।



मेरिट में नाम आने के बाद खड़ा हुआ विवाद

याचिकाकर्ताओं के वकील आर्यन उरमलिया ने कोर्ट को बताया कि भर्ती के विज्ञापन में B.P.Ed. या B.P.E. अथवा समकक्ष योग्यता रखने वालों को पात्र बताया गया था। इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और परीक्षा में शामिल हुए। उनका नाम मेरिट सूची में भी आया और दस्तावेज सत्यापन भी पूरा हो गया, लेकिन बाद में मौखिक रूप से कहा गया कि D.P.Ed. को B.P.Ed. के बराबर नहीं माना जाएगा।



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पहले भी मिल चुका है समकक्ष होने का स्पष्टीकरण

याचिका में यह भी बताया गया कि जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा पूर्व में जारी पत्रों में एक वर्षीय D.P.Ed. को B.P.Ed. के बराबर माना गया था। इसके बावजूद वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के दौरान इसे मान्य नहीं किया गया। इससे अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है।





बिना लिखित आदेश के किया गया बाहर

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि दस्तावेज सत्यापन के समय उनके खिलाफ कोई लिखित आपत्ति दर्ज नहीं की गई और न ही उन्हें कोई कारण बताते हुए औपचारिक आदेश दिया गया। इसके बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।



हजारों पदों पर निकली थी भर्ती

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2024 के लिए कुल 9,882 पदों का विज्ञापन जारी किया था। इनमें माध्यमिक शिक्षक (खेल) के 338 पद शामिल थे। इस पद के लिए शारीरिक शिक्षा में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और B.P.Ed. या B.P.E. या इसके समकक्ष योग्यता मांगी गई थी।



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पहले भी कोर्ट तक पहुंच चुका है इस भर्ती से जुड़ा मामला

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षक भर्ती पहले भी विवादों में रह चुकी है। अप्रैल में परीक्षा के बाद जब परिणाम घोषित होने वाला था, तब हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की डिवीजन बेंच ने परिणाम पर रोक लगा दी थी। बाद में लंबा इंतजार करने के बाद सितंबर 2025 में रिजल्ट जारी किया गया था, वह भी कोर्ट के अगले आदेश के अधीन था।



अब खेल शिक्षक भर्ती भी कोर्ट के फैसले पर निर्भर

अब माध्यमिक शिक्षक (खेल) के पदों की नियुक्तियां भी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर हो गई हैं। जब तक इस मामले में अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक इस भर्ती से जुड़ी नियुक्तियां पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाएंगी।



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