मध्य प्रदेश में हर दिन लापता हो रही 40 बच्चियां, अब तक नौ हजार से अधिक गायब, भोपाल-इंदौर समेत पांच जिले रेड जोन में
एमपी के पुलिस थानों में इस साल 2026 में अब तक बच्चियों के लापता होने के 9760 नए मामले दर्ज हुए हैं। पिछले साल के 2627 लंबित मामले जोड़ें तो कुल 12387 मामले थे, जिनमें से 3303 बच्चियां अब भी लापता हैं।
12387 में से 3303 अब भी लापता
पुलिस ने इस साल लापता बालिकाओं (Madhya Pradesh missing girls) की तलाश में 9084 बच्चियों को ढूंढ निकाला। लेकिन 3303 बच्चियों की अब भी कोई खबर नहीं है। यानी हर चार में से करीब एक मामला खुला है।
यह आंकड़ा सिर्फ आठ महीने का है। इसके बाद के महीनों में यह बढ़ भी सकता है।
पुलिस का दावा, 93 फीसदी मामलों में सफलता
स्पेशल अनिल कुमार के मुताबिक गुमशुदा बालिकाओं के मामलों की लगातार मॉनिटरिंग हो रही है। उन्होंने कहा कि इस साल करीब 93 फीसदी से अधिक मामलों में पुलिस को सफलता मिली है। लंबित मामलों की भी संबंधित जिलों से लगातार पड़ताल कराई जा रही है।
यानी पुलिस की नजर में तस्वीर इतनी बुरी नहीं है। फिर भी 3303 बच्चियां अब भी तलाश के दायरे में हैं।
पांच साल में कितनी बच्चियां तलाश से बाहर
पिछले पांच साल का विश्लेषण बताता है कि हर साल बड़ी संख्या में बच्चियां तलाश से बाहर रह जाती हैं। साल के अंत में लापता बच्चियों की संख्या इस तरह रही:
- 2021 में 2830
- 2022 में 2944
- 2023 में 3764
- 2024 में 4001, जो सबसे ज्यादा है
- 2021 से 2024 के बीच यह आंकड़ा करीब 41 फीसदी बढ़ा।
2025 में राहत, 2026 में फिर बढ़त
वर्ष 2025 में पुलिस ने लंबित मामलों सहित 14520 बच्चियों को तलाशने में सफलता पाई। इससे साल के अंत में लंबित मामले घटकर 2627 रह गए। यह 2024 के 4001 से करीब 34 फीसदी कम है। लेकिन राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी। इस साल अगस्त तक यह संख्या फिर बढ़कर 3303 हो गई। यानी करीब 676 की बढ़ोतरी हुई।
रेड लिस्ट में कौन से जिले, इंदौर सबसे ऊपर
गुमशुदा बच्चियों के मामले में रेड जोन के जिलों की सूची में इंदौर पहले नंबर पर है। इंदौर में लापता बच्चियां 772 हैं।
यह सूची इस तरह है:
- इंदौर: 772
- धार: 559
- जबलपुर: 504
- भोपाल: 493
- सागर: 439
- रतलाम: 417
भोपाल और इंदौर के आंकड़े
इस साल के आठ महीने के हिसाब से इंदौर में औसतन रोज करीब तीन बच्चियां लापता हुईं। भोपाल में लापता बच्चियां औसतन रोज करीब दो रहीं। यह आकलन सिर्फ मोटा औसत है, असल रोजाना आंकड़ा अलग हो सकता है।
इंदौर और भोपाल, दोनों जिले रेड जोन की सूची में हैं। सूची में छठे नंबर पर रतलाम है, जहां 417 बच्चियां लापता दर्ज हैं।
पुलिस का एक्शन प्लान क्या है
पुलिस मुख्यालय महिला शाखा गुमशुदा बच्चियों पर तीन स्तर की व्यवस्था चला रही है।
मासिक समीक्षा बैठक
पुलिस मुख्यालय महिला शाखा हर महीने समीक्षा बैठक करती है। इसमें जिलावार चर्चा होती है।
ग्रेडिंग सिस्टम
गुमशुदा मामलों के आधार पर जिलों की ग्रेडिंग की जाती है। इसमें तीन कैटेगरी हैं। एसपी को उनके जिले की स्थिति बताई जाती है।
विशेष समीक्षा
खराब परफॉर्मेंस वाले जिलों की अलग समीक्षा होती है। इसमें डीजी जिलों से वन टू वन बात करते हैं। हालांकि सोर्स में यह नहीं बताया गया कि ग्रेडिंग की तीनों कैटेगरी क्या हैं। साथ ही किस जिले को कौन सी श्रेणी मिली, यह भी साफ नहीं है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर बच्चियों की सुरक्षा और परिवारों की चिंता से जुड़ी है। हर दिन 40 बच्चियां गायब होने का मतलब है कि सैकड़ों परिवार हर महीने तलाश में जुट रहे हैं। पुलिस 93 फीसदी सफलता का दावा करती है, फिर भी 3303 बच्चियों का पता नहीं है। इसलिए आंकड़े और जमीनी हकीकत, दोनों पर नजर रखना जरूरी है। गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे बहुत अहम माने जाते हैं। इसलिए रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी नहीं होनी चाहिए। यह खबर प्रशासन और समाज, दोनों से जवाबदेही मांगती है।