पीएम मोदी के जन्मदिन पर MP में महीनेभर का मिशन, सेवा या सियासी संदेश?
ऐसे समझें पूरा मामला...
- 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान।
- 13 बड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार हुई।
- महाकाल लोक में हजारों दीप जलेंगे।
- हर विधानसभा में सेवा सेतु शिविर लगेंगे।
- वंदे मातरम से रिकॉर्ड की तैयारी होगी।
मध्यप्रदेश में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को सिर्फ एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है। 17 सितंबर से शुरू होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ पूरे एक महीने चलेगा और 17 अक्टूबर को इसका समापन प्रस्तावित है।
बीजेपी इसे नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने से जोड़ रही है। पार्टी के मुताबिक यह यात्रा सत्ता की उपलब्धियों से ज्यादा सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी है।
लेकिन राजनीतिक नजर से देखें तो इतने बड़े पैमाने पर होने वाले कार्यक्रम अपने आप में एक संदेश भी देते हैं। सवाल यही है कि क्या यह अभियान सेवा गतिविधियों के साथ प्रधानमंत्री की राजनीतिक यात्रा को जनता तक पहुंचाने की रणनीति भी है?
महाकाल से गांव तक दिखेगा आयोजन
17 सितंबर को उज्जैन के महाकाल लोक में हजारों दीप जलाने की तैयारी है। जिन परियोजनाओं का प्रधानमंत्री ने लोकार्पण किया है, वहां भी बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
स्कूलों में ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। गांवों में नुक्कड़ नाटक होंगे। आंगनवाड़ी केंद्रों पर माताओं के सम्मान की योजना है। लाभार्थियों से उनकी ‘कहानी बदलाव की’ साझा कराई जाएगी। यानी सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों को अभियान की कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।
विधानसभा स्तर पर भी पहुंचेगा संदेश
अभियान का सबसे बड़ा राजनीतिक असर विधानसभा स्तर पर दिखाई दे सकता है। हर विधानसभा में ‘सेवा सेतु’ शिविर लगाने की तैयारी है।
इन शिविरों के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लोगों को जोड़ने का प्रयास होगा।
इसके साथ रक्तदान, पौधरोपण, स्वच्छता और स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाएंगे। यानी अभियान का फोकस सिर्फ मंच और भाषण पर नहीं रहेगा। संगठन की कोशिश है कि कार्यक्रम सीधे लोगों के बीच दिखाई दें।
गिनीज रिकॉर्ड क्यों चर्चा में है?
17 अक्टूबर को अभियान का समापन ‘जनसेवक महाकुंभ’ से होगा। इसमें देशभर के सरपंच और जनप्रतिनिधियों को जोड़ने की योजना है।
इसी दौरान ‘वंदे मातरम’ के छह छंदों का सामूहिक गायन कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी बताई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और विकसित भारत का संकल्प भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
यहीं से अभियान का पैमाना सामान्य सेवा कार्यक्रम से बड़ा दिखाई देने लगता है। रिकॉर्ड बनाने की कोशिश इसे राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में लाने का जरिया भी बन सकती है।
क्या मोदी को खुश करने की कवायद?
यही वह सवाल है जिस पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। एक तरफ बीजेपी इसे सेवा और जनभागीदारी का अभियान बता रही है। दूसरी तरफ विपक्ष इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन को राजनीतिक आयोजन का रूप देने की कोशिश के तौर पर देख सकता है।
कांग्रेस पहले भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होने वाले आयोजनों को लेकर सवाल उठाती रही है। इस बार फर्क यह है कि आयोजन का दायरा एक दिन से बढ़ाकर पूरे महीने तक किया गया है।
इसलिए असली परीक्षा कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि यह होगी कि जमीन पर इनका असर कितना दिखता है। अगर सेवा गतिविधियां केंद्र में रहती हैं तो अभियान सामाजिक कार्यक्रम के तौर पर देखा जाएगा।
अगर पूरा फोकस मोदी की उपलब्धियों और राजनीतिक संदेश पर रहा, तो इसे बीजेपी की संगठनात्मक ब्रांडिंग की कवायद भी माना जाएगा।
25 साल की यात्रा का राजनीतिक फ्रेम
7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की संवैधानिक यात्रा शुरू हुई थी। अब बीजेपी उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल को एक बड़े पड़ाव के रूप में पेश कर रही है।
मध्यप्रदेश में होने वाला यह अभियान इसी यात्रा को स्थानीय कार्यक्रमों और लाभार्थियों की कहानियों से जोड़ने की कोशिश है। यानी जन्मदिन सिर्फ तारीख नहीं रह गया है। इसे सेवा, संगठन, सरकार की योजनाओं और मोदी की राजनीतिक यात्रा, चारों को एक मंच पर लाने के अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
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