भीषण गर्मी की मार से हांफीं फैक्ट्रियां, प्रोडक्शन 20 प्रतिशत गिरा... MP में कंपनियों ने बदली शिफ्ट

Manya Jain | May 16, 2026, 14:40 IST
MP MSME Industry Heatwaves Impact
मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी और लू के कारण एमएसएमई उद्योगों का उत्पादन 20 प्रतिशत तक घट गया है। इंदौर और भोपाल के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को गर्मी बचाने के लिए अब नाइट शिफ्ट और ज्यादा इंसेंटिव का सहारा लिया जा रहा है।

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी के कारण कारखानों में काम करना मुश्किल हो गया है।
  • गर्मी के चलते एमएसएमई सेक्टर के उत्पादन में 20% तक गिरावट आई है।
  • शॉप फ्लोर पर बढ़ते तापमान से हजारों मजदूरों की सेहत बिगड़ रही है।
  • बचाव के लिए कई फैक्ट्रियों ने अब नाइट शिफ्ट शुरू कर दी है।
  • मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 12 जून तक मानसून आ सकता है।

मध्यप्रदेश इस वक्त भीषण गर्मी की आग में झुलस रहा है। हालात ऐसे हैं कि फैक्ट्रियों में अब सिर्फ मशीनें ही नहीं, मजदूरों के शरीर भी तप रहे हैं। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर पर गर्मी ने सीधा हमला बोला है। इससे उत्पादन क्षमता में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। जबकि हजारों मजदूर थकावट, चक्कर, कमजोरी और लगातार बिगड़ती सेहत से जूझ रहे हैं।



mp tempreature


प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में शुमार इंदौर में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। भोपाल समेत प्रदेश के कई शहर भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि रात में भी राहत नहीं मिल रही है। रात का पारा 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक बना हुआ है। इसका सीधा असर फैक्ट्री फ्लोर पर दिख रहा है। जहां मशीनों की गर्मी के बीच लगातार काम करना अब मजदूरों के शरीर पर भारी पड़ रहा है।



मशीनों के बीच टिकना मुश्किल

पीथमपुर, सांवेर रोड, देवास, मंडीदीप, पालदा और ग्वालियर के मालनपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हालात खराब हैं। खास तौर पर कन्फेक्शनरी, इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन, प्लास्टिक, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर पर गर्मी की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।



इन उद्योगों में काम का बड़ा हिस्सा लगातार शॉप फ्लोर पर सक्रिय रहकर करना पड़ता है, लेकिन अब दोपहर के समय मजदूरों के लिए मशीनों के बीच टिक पाना मुश्किल होता जा रहा है।



रात में काम करने पर इंसेंटिव

गर्मी के चलते उद्योगों को अपनी पूरी वर्किंग बदलनी पड़ रही है। दोपहर की शिफ्टें कमजोर पड़ रही हैं और काम को शाम व रात की तरफ शिफ्ट किया जा रहा है। कई फैक्ट्रियों ने नाइट शिफ्ट शुरू कर दी है, ताकि मजदूर कम तापमान में काम कर सकें।



कुछ इकाइयां तो रात में काम करने वाले कर्मचारियों को करीब दो हजार रुपए तक अतिरिक्त इंसेंटिव भी दे रही हैं।



दोपहर में काम करना मुश्किल

एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र के अध्यक्ष योगेश मेहता ने कहा कि गर्मी अब एमएसएमई इकाइयों के लिए संकट बन रही है। दोपहर में मजदूरों की कार्यक्षमता तेजी से गिर रही है। उत्पादन बचाने के लिए उद्योग अब ठंडे समय में काम शिफ्ट कर रहे हैं। कई इकाइयों ने नाइट शिफ्ट लागू कर दी है और कर्मचारियों को अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जा रहा है।



उद्योगपति प्रमोद दफारिया ने कहा कि उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ उत्पादन घट रहा है, दूसरी तरफ खर्च लगातार बढ़ रहा है। फैक्ट्रियां अब कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मजदूरों की सुविधाओं पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।



वहीं, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव ने उद्योगों और प्रशासन को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए।



प्रदेश में 20 लाख से ज्यादा MSME

भारत सरकार के उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल के अनुसार मध्यप्रदेश में 20 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME Sector) रजिस्टर्ड हैं। इनमें 20 लाख 26 हजार 790 सूक्ष्म, 19 हजार 524 लघु और एक हजार 174 मध्यम इकाइयां शामिल हैं।



mp msme data


महिला उद्यमिता में भी पिछले दो वर्षों में 15 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंसियल ईयर 2023-24 की तुलना में 2024-25 में रजिस्टर्ड फर्म की संख्या में एक लाख 24 हजार 279 की वृद्धि हुई है। सरकार ने 2026 तक 25 लाख एमएसएमई इकाइयों का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य रखा है।



राहत की उम्मीद…12 जून तक आ सकता है मानसून

फैक्ट्रियों में सबसे ज्यादा असर दोपहर की शिफ्ट पर दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण मजदूरों की कार्यक्षमता तेजी से गिर रही है। उद्योगों का कहना है कि उत्पादन लाइन को लगातार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।



हालांकि तपते मध्यप्रदेश के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान है कि इस बार मानसून सामान्य से पहले आगे बढ़ सकता है और 12 जून तक इसके मध्यप्रदेश में प्रवेश करने की संभावना है।



आमतौर पर मानसून 10 से 15 जून के बीच प्रदेश में पहुंचता है। वहीं, केरल में मानसून के 26 मई के आसपास पहुंचने के संकेत हैं, जबकि सामान्य तौर पर इसकी एंट्री 1 जून को होती है।



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