MP के नगरीय निकायों में किसी ने पत्नी के नाम की खरीदी, तो किसी ने लिया घटिया सामान, पुराने मामलों में क्या हुई कार्रवाई?
वहीं 76 की वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं। आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश भी दिए गए थे।
ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा मामले
नगरीय प्रशासन विभाग के रिकॉर्ड में कई तरह की अनियमितताओं का ब्योरा है। इनमें सरकारी सामान की खरीदी और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के मामले शामिल हैं। सरकारी योजनाओं और कर्मचारियों के संविलियन में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया था।
विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज हुए थे। इन मामलों में 32 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में थे। शहडोल संभाग में 10 मामलों से 25 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े थे।
उज्जैन संभाग में आठ मामलों में 21 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में थे। इंदौर संभाग में सात मामलों से 21 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े थे। वहीं भोपाल संभाग में चार मामलों में 16 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम दर्ज थे।
38 मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश
विभागीय जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों पर अलग-अलग कार्रवाई हुई थी। कुछ की वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं। वहीं कुछ मामलों में आर्थिक नुकसान की भरपाई के आदेश दिए गए थे।
रिपोर्ट में 38 मामलों में आर्थिक क्षति की वसूली दर्ज है। संबंधित कर्मचारियों के वेतन या सेवानिवृत्ति लाभों से रकम वसूलने के आदेश दिए गए थे।
इसके अलावा 17 मामलों में पेंशन या महंगाई राहत में कटौती हुई। यह कटौती पांच से 25 प्रतिशत तक दर्ज है। इसकी अवधि एक से पांच साल के बीच रखी गई थी।
जांच में 22 अधिकारी और कर्मचारी दोषमुक्त भी हुए थे। पांच मामलों में चेतावनी या परिनिंदा की कार्रवाई दर्ज है। वहीं दो मामलों में कर्मचारियों की मृत्यु के कारण कार्रवाई समाप्त हुई।
हालांकि ये अलग-अलग तरह की कार्रवाई के आंकड़े हैं। एक अधिकारी पर एक से ज्यादा कार्रवाई के आदेश भी हो सकते हैं।
पत्नी के नाम से संस्था बनाकर जेम पोर्टल से खरीदी
छिंदवाड़ा जिले की न्यूटनचिखली नगर परिषद में सरकारी सामान की खरीदी में बड़ी गड़बड़ी मिली थी। यहां तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे ने अपनी पत्नी के नाम से ऑनलाइन संस्था रजिस्टर कराई थी। इसके बाद उसी संस्था से जेम पोर्टल के जरिए सरकारी सामान खरीदा गया। विभागीय जांच में सामने आया कि यह खरीदी निजी फायदा उठाने के लिए की गई थी।
इस मामले में नितिन बिजवे की अगली तीन वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। इसका असर उनकी आगे की सैलरी बढ़ोतरी पर भी पड़ेगा। निलंबन के दौरान की अवधि को भी उनकी ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था।
सिवनी में महंगे दामों पर खरीदी गई थीं LED लाइटें
सिवनी नगर पालिका में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां जेम पोर्टल से हाईमास्ट पोल और लाइट महंगे दामों पर खरीदी गई थीं। इसके अलावा 26 वाट की एलईडी लाइट भी ज्यादा कीमत पर खरीदी गई थीं। शौचालय और मूत्रालय के लिए खरीदी गई सामग्री में भी गड़बड़ी सामने आई थी।
विभागीय जांच में सामान ज्यादा कीमत पर खरीदने की बात सामने आई थी। इस मामले में तत्कालीन सीएमओ पूजा बुनकर की अगली दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। साथ ही उनसे 7 लाख 16 हजार रुपए वसूलने के निर्देश दिए गए थे।
उपयंत्री विकास मेहरा और दीपक उईके पर भी कार्रवाई हुई थी। बिंदेश्वरी पन्द्रे सहित संबंधित उपयंत्रियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकी गई थी। साथ ही उनसे उनकी जिम्मेदारी के हिसाब से नुकसान की रकम वसूलने के आदेश दिए गए थे।
कोटर में बाजार से महंगे दामों पर खरीदे गए टैंकर
सतना जिले की कोटर नगर परिषद में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां तीन हजार लीटर क्षमता वाले पानी के टैंकर खरीदे गए थे। इसके साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली भी खरीदी गई थी। विभागीय जांच में सामने आया कि इनकी कीमत बाजार दर से काफी ज्यादा थी।
इस मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ अंबिका प्रसाद साहू और उपयंत्री देवरत्न सोनी के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
अंबिका प्रसाद साहू का निधन हो चुका था। इसलिए उन पर कोई दंड नहीं लगाया गया। हालांकि उनके बकाया सेवानिवृत्ति लाभों से 3 लाख 95 हजार 215 रुपए की वसूली की गई।
वहीं उपयंत्री देवरत्न सोनी की एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। साथ ही उनसे 1 लाख 45 हजार 215 रुपए वसूलने के आदेश भी दिए गए थे।
गुना में कचरा वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी
गुना नगर पालिका में भी कचरा वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक जरूरी मंजूरी लिए बिना वाहन खरीदे गए थे। यहां 20 कचरा वाहनों की जगह सिर्फ 10 वाहन खरीदे गए थे। इस खरीदी में नियमों का पालन नहीं किया गया था।
इस मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ संजय श्रीवास्तव और प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी हरीशबाबू शाक्यवार पर कार्रवाई हुई थी। दोनों अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। हालांकि इसका असर उनकी आगे की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ना था।
इसी नगर पालिका में कीटनाशक सामग्री खरीदने में भी गड़बड़ी मिली थी। यहां टेंडर की प्रक्रिया से बचने के लिए अलग-अलग फाइलें बनाई गई थीं। हर फाइल में खरीदी की रकम एक लाख रुपए से कम रखी गई थी। इसके बाद बिना नियमित टेंडर निकाले कोटेशन के आधार पर सामान खरीदा गया था।
इस मामले में भी संजय श्रीवास्तव और हरीशबाबू शाक्यवार की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई थी।
घटिया सामान खरीदने से 26 लाख रुपए का नुकसान
निवाड़ी जिले की तरीचरकलां नगर परिषद में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां बाजार से ज्यादा कीमत पर घटिया सामान खरीदा गया था। विभागीय जांच में सामने आया कि सामान की गुणवत्ता तय मानकों के अनुसार नहीं थी।
इस खरीदी से नगर परिषद को 26 लाख 16 हजार रुपए का नुकसान हुआ था। मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ श्रवण कुमार द्विवेदी पर कार्रवाई हुई थी। वे नौकरी से रिटायर हो चुके थे।
विभाग ने उनके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम से 13 लाख 8 हजार रुपए वसूलने के आदेश दिए थे। साथ ही उनकी पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में 10 प्रतिशत कटौती की गई थी। यह कटौती दो साल के लिए तय की गई थी।
धार में सड़क बनाने की सामग्री की खरीदी में गड़बड़ी
धार नगर पालिका में भी सड़क बनाने की सामग्री खरीदने में गड़बड़ी मिली थी। यहां डामर और सड़क किनारे लगाए जाने वाले डेलीनेटर की खरीदी में अनियमितता सामने आई थी। डेलीनेटर सड़क पर वाहन चालकों को रास्ता दिखाने के लिए लगाए जाते हैं।
इस मामले में रिटायर अधिकारी विजय कुमार शर्मा पर कार्रवाई हुई थी। उनकी पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में कटौती की गई थी। साथ ही उनसे 1 लाख 43 हजार 325 रुपए वसूलने के आदेश भी दिए गए थे।
वहीं अधिकारी पुनीत तिवारी की दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। उनसे भी 1 लाख 43 हजार 325 रुपए वसूलने के आदेश हुए थे। हालांकि जांच में उपयंत्री दिव्या सोलंकी को दोषमुक्त कर दिया गया था।
शहडोल में कर्मचारियों की गलत नियुक्ति से 3.20 करोड़ का नुकसान
नगरीय निकायों में सिर्फ सरकारी सामान की खरीदी में ही गड़बड़ी नहीं मिली थी। कर्मचारियों को नगर परिषदों में शामिल करने की प्रक्रिया में भी नियम तोड़े गए थे।
शहडोल संभाग की चार नई नगर परिषदों में ऐसा मामला सामने आया था। इनमें डूमरकछार, डोला, बनगवां और बकहो शामिल थीं। यहां पंचायतों में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमों के खिलाफ नगर परिषदों में शामिल किया गया था। इसे संविलियन कहा जाता है। विभागीय जांच में इस गड़बड़ी से करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान सामने आया था।
इस मामले में संयुक्त संचालक मकबूल खान सहित छह अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से नुकसान की रकम वसूलने के निर्देश भी दिए गए थे। वहीं रीना राठौर की एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी।
गोहद में डस्टबिन की खरीदी में गड़बड़ी
भिंड जिले की गोहद नगर पालिका में भी डस्टबिन खरीदने में गड़बड़ी मिली थी। यह मामला साल 2017 का था। जांच में सामने आया कि डस्टबिन खरीदते समय तय नियमों का पालन नहीं किया गया था।
इस मामले में सुरेंद्र शर्मा और राघवेंद्र शर्मा पर कार्रवाई हुई थी। दोनों अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। साथ ही दोनों से 39-39 हजार रुपए की वसूली भी की गई थी।
इसी तरह ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। इस मामले में रिटायर सीएमओ पीके सिंह की पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में कटौती की गई थी।
वहीं उपयंत्री धर्मेंद्र भदौरिया की दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। हालांकि जांच में उपयंत्री राहुल सिंह पर लगे आरोप साबित नहीं हुए थे। इसलिए उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया था।
ACS संजय दुबे के वायरल वीडियो से फिर उठे सवाल
मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह एसीएस संजय दुबे का वायरल वीडियो है। वीडियो भोपाल में हुई नगरीय प्रशासन विभाग की बैठक का है। इसमें संजय दुबे सरकारी सामान की कीमतों में भारी अंतर पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। इसके बाद से नगरीय निकायों में खरीदी की अनियमितताओं को लेकर चर्चा तेज है।
बैठक में तीन साल की सरकारी खरीदी का विश्लेषण पेश किया गया है। इसके मुताबिक 374 नगरीय निकायों ने करीब 1,134 करोड़ रुपए का सामान खरीदा है। कई निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है।
एक निकाय ने कचरा गाड़ी दो लाख रुपए में खरीदी। दूसरे निकाय ने इसी तरह की गाड़ी पर छह लाख रुपए खर्च किए। इस गाड़ी के साथ चार डस्टबिन भी शामिल थे।
वहीं एक नगर पालिका में 200 एलईडी बल्ब खरीदने का मामला भी सामने आया है। इन बल्बों पर 60 लाख रुपए खर्च होने की शिकायत मिली थी।
विभागीय विश्लेषण में करीब 250 करोड़ रुपए की संभावित बचत का अनुमान जताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक औसत दरों पर खरीदी से इतनी रकम बच सकती थी। हालांकि यह केवल अनुमान है। इसे सीधे घोटाले की राशि नहीं माना जा सकता।
मंत्री प्रतिमा बागरी ने की हाईलेवल जांच की बात
सरकारी खरीदी पर उठे सवालों के बाद सरकार भी सक्रिय हुई है। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। मंत्री का कहना है कि विभाग सभी खरीदी और निर्माण कार्यों की निगरानी करता है। पहले भी गड़बड़ियां सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
प्रतिमा बागरी के मुताबिक वायरल वीडियो से सामने आई जानकारी की जांच कराई जाएगी। सामान की कीमतों में इतना अंतर क्यों है। इसकी वजह भी पता की जाएगी। जांच में खरीद प्रक्रिया की कमियों को भी देखा जाएगा। किसी ने इन कमियों का गलत फायदा तो नहीं उठाया। इस पहलू की भी पड़ताल होगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि पुराने रिकॉर्ड में दर्ज 62 मामले नई हाईलेवल जांच का हिस्सा नहीं हैं। ये पहले दर्ज अलग-अलग विभागीय मामलों में हुई कार्रवाई का विवरण हैं। नई खरीदी में वास्तविक गड़बड़ी और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।