एमपी में शराब होगी महंगी! नई आबकारी नीति तैयार, कैबिनेट से मिलेगी मंजूरी

Sourabh Bhatnagar | Jan 16, 2026, 09:25 IST
mp new excise policy 2026
मध्यप्रदेश सरकार ने अगले साल यानी 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति बना ली है। इसके तहत शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार ने 19,000 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।

News In Short

  • नई नीति: शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं, 19,000 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य।
  • नीलामी: शराब दुकानों की नीलामी 20% अधिक कीमत पर होगी, नई दुकानें नहीं खुलेंगी।
  • ठेकेदार समस्याएं: कुछ जिलों में ठेकेदारों ने ठेका छोड़ दिया, देवास में आत्महत्या हुई।
  • मोनोपॉली: कुछ इलाकों में शराब महंगी बेची जा रही है और देसी शराब की कमी है।
  • फर्जीवाड़ा रोकना: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केवल ई-चालान और ई-बैंक गारंटी मान्य होंगे।

News In Detail

एमपी की नई शराब नीति:मध्यप्रदेश सरकार ने अगले साल यानी 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति तैयार कर ली है, जिसमें शराब की कीमतें बढ़ने की संभावना है।



सरकार ने अगले साल शराब से 19,000 करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल से 3,000 करोड़ रुपए ज्यादा है। इस कदम से सरकार को वित्तीय तौर पर मजबूती मिल सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के लिए ज्यादा पैसा जुटाना है।



नई नीति की प्रमुख बातें

एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के अनुसार, मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई हाई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में नई आबकारी नीति (एमपी की शराब नीति) का मसौदा मंजूर कर लिया गया है।



इस नीति का प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भी किया गया है। अब इसे आखिरी मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।



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Excise policy in MP: चुनौतियां और समस्याएं

नई नीति (2025-26) के बावजूद कुछ दिक्कतें सामने आई हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में ठेकेदारों को लेकर समस्याएं आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सतना, देवास, मंदसौर, रतलाम और इंदौर में कई ठेकेदारों ने बीच में ही ठेका छोड़ दिया, जिसकी वजह से इन जिलों में फिर से नीलामी करनी पड़ी। देवास में तो एक ठेकेदार ने आत्महत्या कर ली, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।



इसके अलावा, कुछ इलाकों में शराब की कीमतों को लेकर मोनोपॉली की भी शिकायतें आई हैं। भोपाल, उज्जैन, सागर, टीकमगढ़ और मुरैना जैसे जिलों में शराब को एमआरपी से ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है। इन जिलों में देसी शराब की भी कमी हो गई है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।



सूत्र Knowledge

क्या होती है शराब नीति?

शराब नीति वह नियम और दिशानिर्देश होते हैं, जिन्हें सरकार शराब के उत्पादन, बिक्री, वितरण और उपभोग को नियंत्रित करने के लिए बनाती है। इसका उद्देश्य शराब की बिक्री को व्यवस्थित करना, राजस्व प्राप्त करना, शराब के दुरुपयोग को कम करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना होता है।



मुख्य रूप से शराब नीति में निम्नलिखित पहलु शामिल होते हैं:



  1. कर और टैक्स: शराब पर लगाए जाने वाले कर और टैक्स की दरें तय की जाती हैं, जिससे सरकार को राजस्व मिलता है।
  2. शराब की बिक्री और लाइसेंस: शराब बेचने वाली दुकानों और ठेकेदारों को लाइसेंस देने के नियम, साथ ही शराब की दुकानें कहां और किस तरह से खोली जा सकती हैं।
  3. मूल्य निर्धारण: शराब की कीमत तय करने के लिए नियम, ताकि शराब की बिक्री संतुलित तरीके से हो सके और किसी भी प्रकार की मोनोपॉली न हो।
  4. शराब की खपत पर नियंत्रण: शराब पीने की उम्र, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी, शराब पीने से संबंधित स्वास्थ्य चेतावनियाँ आदि।
  5. नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी: शराब के दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाना, जैसे शराब पीने के बाद वाहन चलाने पर रोक आदि।

कंपोजिट शराब की दुकानें और समीक्षा

नई एमपी शराब नीतिके तहत, सरकार ने पिछले साल कुछ कंपोजिट शराब की दुकानें खोली थीं, जहां देसी और अंग्रेजी दोनों तरह की शराब मिलती है। यह मॉडल उत्तर प्रदेश से लिया गया था।



इसे लागू करने से राज्य सरकार को अच्छी खासी आमदनी हुई है। अब सरकार इस मॉडल की समीक्षा करेगी और अगले तीन महीनों में इसके नतीजों पर गौर करेगी।



ई-चालान और ई-बैंक गारंटी रुकेगा फर्जीवाड़ा

फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने अब सिर्फ ई-चालान और ई-बैंक गारंटी को मान्यता देने का फैसला किया है। इससे पहले इंदौर में शराब गोदाम से शराब उठाने के लिए 100 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ था, जिसमें चालान में रकम बढ़ाकर शराब उठाई गई थी। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है, ताकि ऐसे धोखाधड़ी को रोका जा सके।



2025-26 की शराब नीति में क्या है?

मध्य प्रदेश की शराब नीति (2025-26) में कई बड़े बदलाव किए गए थे। इसमें धार्मिक जगहों पर शराब पर पूरी तरह से बैन लगाया गया था, "कम अल्कोहल वाले पेय बार" शुरू किए गए थे।



शराब की दुकानों में POS मशीन लगाना अनिवार्य किया गया था। इसके अलावा, राजस्व बढ़ाने और अवैध शराब को रोकने पर भी जोर दिया गया था।



शराब नीति के मुख्य बिंदु:



  1. धार्मिक स्थलों पर बैन: उज्जैन, ओंकारेश्वर, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर, अमरकंटक, सलकनपुर, कुंडलपुर, बांदकपुर, बरमानकलां और बरमानखुर्द जैसे 19 धार्मिक शहरों और गांवों में 1 अप्रैल 2025 से शराब की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया था।
  2. दूरी और स्थान: शराब की दुकानों को स्कूल, कॉलेज और मंदिरों से कम से कम 150 मीटर दूर रखा गया था। इसके अलावा, शराब की दुकानें हाईवे से भी नजर नहीं आनी चाहिए थी।
  3. POS मशीन अनिवार्य: अब सभी शराब की दुकानों पर POS मशीन का होना जरूरी किया गया था। अगर किसी दुकान में यह मशीन नहीं थी, तो शराब बेचना मना कर दिया गया था और जुर्माना भी लगाया गया था। अगर यह नियम तोड़ा गया तो लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।

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