राजभवन की दौड़ तेज! मंगूभाई को एक्सटेंशन या मध्य प्रदेश को मिलेगा नया राज्यपाल?
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल का पांच वर्षीय कार्यकाल 8 जुलाई को पूरा हो रहा है। इसी के साथ राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें कार्यकाल विस्तार मिलेगा या फिर दिल्ली दरबार किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगा?
इसी बीच राज्यपाल बनने की चाह रखने वाले कई वरिष्ठ राजनीतिक और संगठनात्मक चेहरे भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। 8 जुलाई को पूरा हो रहा है राज्यपाल का कार्यकाल।
कई वरिष्ठ नेता राजभवन की दौड़ में बताए जा रहे हैं। अंतिम फैसला केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन के स्तर पर होगा। फिलहाल किसी नाम पर आधिकारिक पुष्टि नहीं।
दिल्ली दरबार में तेज हुई हलचल
सूत्रों के मुताबिक सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की संभावना को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश का राजभवन भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े कुछ अनुभवी चेहरे भी राज्यपाल बनने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक संकेत सामने नहीं आए हैं।
सबसे बड़ा सवाल-एक्सटेंशन या नया चेहरा?
राजनीतिक गलियारों में फिलहाल यही चर्चा है कि मंगूभाई पटेल को एक और कार्यकाल दिया जाएगा या फिर किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए अंतिम फैसला क्या होगा, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं माना जा रहा है।
संविधान क्या कहता है?
संविधान के अनुसार राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। हालांकि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक मौजूदा राज्यपाल अपने पद पर बने रह सकते हैं। ऐसे में यदि नई नियुक्ति में समय लगता है तो वर्तमान व्यवस्था जारी रह सकती है।
आदिवासी क्षेत्रों पर रहा फोकस
अपने कार्यकाल के दौरान मंगूभाई पटेल ने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों के दौरे किए। स्वास्थ्य, शिक्षा और सिकल सेल एनीमिया जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता चर्चा में रही। इसके अलावा विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों की भी नियमित समीक्षा करते रहे।
गुजरात से मध्य प्रदेश तक का सफर
मंगूभाई पटेल लंबे समय तक गुजरात की राजनीति और भाजपा संगठन से जुड़े रहे। जुलाई 2021 में उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और अब उनका पहला कार्यकाल पूरा होने जा रहा है।
पिछले वर्षों में कई बदलाव
पिछले डेढ़ दशक में मध्य प्रदेश के राजभवन में कई बदलाव हुए हैं। रामनरेश यादव के बाद ओम प्रकाश कोहली ने अतिरिक्त प्रभार संभाला। फिर आनंदीबेन पटेल, लालजी टंडन और दोबारा अतिरिक्त प्रभार के रूप में आनंदीबेन पटेल की नियुक्ति हुई। इसके बाद जुलाई 2021 में मंगूभाई पटेल ने जिम्मेदारी संभाली।
आगे क्या?
अब निगाहें दिल्ली के फैसले पर टिकी हैं। क्या मंगूभाई पटेल को दूसरा कार्यकाल मिलेगा या फिर किसी नए राजनीतिक या संगठनात्मक चेहरे की राजभवन में एंट्री होगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ जाएगा। फिलहाल 'एक अनार, सौ बीमार' जैसी स्थिति के बीच दावेदारों की सक्रियता राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर रही है।
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