एमपी में नए मेगा हाईवे प्रोजेक्ट: सिंहस्थ और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर सरकार का बड़ा दांव
मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण का अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। करीब 13 हजार करोड़ रुपए की लागत से पांच बड़े हाईवे ऐसे मॉडल पर बनाए जाएंगे, जिसमें सरकार और निजी कंपनियां मिलकर निवेश करेंगी।
सबसे खास बात यह है कि भोपाल-उज्जैन-इंदौर बेल्ट को इस पूरे प्लान का केंद्र बनाया गया है। सरकार की रणनीति सिर्फ सड़क बनाने की नहीं, बल्कि धार्मिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर तैयार करने की है। एमपीआरडीसी ने इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
पहली बार क्यों खास है यह मॉडल?
प्रदेश में पहली बार हाईवे निर्माण के लिए हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल अपनाया जा रहा है। इस व्यवस्था में पूरा पैसा सरकार नहीं लगाएगी। परियोजना की लगभग 40 प्रतिशत राशि सरकार देगी, जबकि बाकी निवेश निजी डेवलपर करेंगे। निर्माण पूरा होने के बाद सरकार अगले 20 से 25 साल तक तय किस्तों में भुगतान करेगी। यानी कंपनियां सीधे टोल वसूली के बजाय लंबे समय तक सरकारी भुगतान मॉडल पर काम करेंगी।
असली फोकस उज्जैन और सिंहस्थ पर
सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता सिंहस्थ से पहले सड़क नेटवर्क को मजबूत करना है। हर बड़े आयोजन में इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा मार्ग पर भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है। कई बार श्रद्धालुओं और बाहर से आने वाले वाहनों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।
इसी वजह से इस बार ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर फोकस किया गया है, ताकि नए रास्ते सीधे खेतों और खाली जमीनों से निकाले जा सकें।
इंदौर-उज्जैन सफर में बड़ा बदलाव
सबसे ज्यादा चर्चा इंदौर-उज्जैन नए कॉरिडोर की हो रही है। प्रस्तावित फोरलेन ग्रीनफील्ड सड़क बनने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल जहां यात्रियों को ट्रैफिक और शहरों के दबाव से गुजरना पड़ता है, वहीं नए कॉरिडोर से सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। उज्जैन-जावरा हाईवे को भी तेज यातायात के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है।
सिर्फ सड़क नहीं, जमीन और रोजगार का खेल भी
नई सड़कें जिन क्षेत्रों से गुजरेंगी, वहां जमीन अधिग्रहण के साथ बड़े स्तर पर निर्माण गतिविधियां शुरू होंगी। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और आसपास इंडस्ट्रियल एवं वेयरहाउसिंग गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मालवा बेल्ट में कई नए निवेश क्षेत्र विकसित होने की संभावना भी जताई जा रही है।
प्रस्तावित प्रमुख सड़क परियोजनाएं
- उज्जैन-जावरा फोरलेन,इंदौर-उज्जैन फोरलेन
- नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग
- सागर-दमोह कॉरिडोर
- बड़वाह-धामनोद फोरलेन
सरकार को इस मॉडल में फायदा क्या?
इस मॉडल में ट्रैफिक और राजस्व का बड़ा जोखिम सरकार के पास रहता है, जबकि निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को दी जाती है।
सरकार का मानना है कि इससे बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे कराने में मदद मिलेगी और एक साथ कई हाईवे प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर पहले भी इस मॉडल पर कई सड़क परियोजनाएं बनाई जा चुकी हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे बड़े पैमाने पर पहली बार लागू किया जा रहा है।
आने वाले समय में बदल सकता है मालवा का पूरा रोड मैप
सूत्र बताते हैं कि इन परियोजनाओं को सिर्फ सड़क निर्माण के रूप में नहीं देखा जा रहा। भविष्य में इन्हें औद्योगिक कॉरिडोर, धार्मिक टूरिज्म और लॉजिस्टिक नेटवर्क से जोड़ने की भी तैयारी है। अगर परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो भोपाल-उज्जैन-इंदौर बेल्ट आने वाले वर्षों में प्रदेश का सबसे तेज कनेक्टेड आर्थिक क्षेत्र बन सकता है।
भरत यादव, एमडी, एमपीआरडीसी ने बताया कि प्रदेश में सड़क प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार इन हाईवे परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से मंजूरी दे चुकी है और धार्मिक आयोजनों से जुड़े प्रमुख मार्गों पर निर्माण गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। आने वाले समय में ये कॉरिडोर सिर्फ यात्रा आसान नहीं करेंगे, बल्कि प्रदेश के आर्थिक और पर्यटन नेटवर्क को भी नई गति देंगे।
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