एमपी NSUI में शह–मात का खेल: प्रदेश नेतृत्व ने प्रभारी को किया दरकिनार, नियुक्ति पर रोक

Ramanand Tiwari | Jan 25, 2026, 18:48 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश एनएसयूआई में आंतरिक कलह बढ़ गई है। प्रदेश अध्यक्ष ने बिना प्रभारी की मर्जी के नियुक्तियां कीं, जिस पर दिल्ली से रोक लगा दी गई है।

NEWS IN SHORT

  • एनएसयूआई में शह-मात, प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व में बढ़ी खींचतान
  • नेताओं के टकराव से एनएसयूआई में आई असमंजस की स्थिति
  • प्रदेश प्रभारी को दरकिनार कर की गई प्रवक्ता की नियुक्ति, फिर लगी रोक
  • मध्य प्रदेश एनएसयूआई में नेतृत्व संकट, राष्ट्रीय नेतृत्व ने लिया सख्त फैसला
  • एनएसयूआई में सत्ता-संतुलन की लड़ाई, क्या बनेंगे बदलाव?

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्य प्रदेश एनएसयूआई में इन दिनों संगठन नहीं, बल्कि सत्ता-संतुलन की लड़ाई चल रही है। बिना प्रदेश प्रभारी को विश्वास में लिए प्रदेश स्तर पर प्रवक्ता की नियुक्ति कर दी गई, लेकिन दो दिन के भीतर ही राष्ट्रीय नेतृत्व ने उस पर ब्रेक लगा दिया।



यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि प्रदेश एनएसयूआई और मध्य प्रदेश कांग्रेस अपनी-अपनी धुन में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश प्रभारी को हाशिये पर रखा जा रहा है। नतीजा संगठन में खींचतान, असमंजस और “शह-मात” जैसी स्थिति।



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प्रदेश प्रभारी को दरकिनार कर लिया फैसला

एनएसयूआई में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संगठनात्मक ढांचा तय है, तो प्रदेश प्रभारी को नजरअंदाज क्यों किया गया? 19 जनवरी को प्रदेश मीडिया विभाग में प्रवक्ता की नियुक्ति कर दी गई, लेकिन इसमें न तो प्रदेश प्रभारी की सहमति ली गई और न ही उन्हें औपचारिक रूप से अवगत कराया गया।



राष्ट्रीय नेतृत्व ने लगाई नियुक्ति पर रोक

21 जनवरी को राष्ट्रीय मीडिया विभाग की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी कर इस नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से होल्ड कर दिया गया। साफ संदेश दिया गया कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और बिना राष्ट्रीय या प्रभारी स्तर की मंजूरी कोई नियुक्ति मान्य नहीं होगी।



एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी शाहिल शर्मा ने दो टूक कहा कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना जारी कोई भी नियुक्ति पत्र अमान्य माना जाएगा। उन्होंने साफ किया कि संगठनात्मक निर्णय तय प्रक्रिया और अनुशासन के तहत ही होंगे, किसी भी तरह की जल्दबाजी या समानांतर फैसले स्वीकार नहीं किए जाएंगे।



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प्रदेश एनएसयूआई बनाम राष्ट्रीय लाइन?

इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रदेश एनएसयूआई और प्रदेश कांग्रेस अपनी अलग लाइन पर चल रहे हैं? सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश स्तर पर आपसी सामंजस्य का अभाव है और यही वजह है कि फैसले जल्दबाजी में लिए जा रहे हैं, जिन पर बाद में राष्ट्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।



कार्यकाल खत्म, फिर भी नियुक्तियां क्यों?

जानकारी के मुताबिक,एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल मई 2025 में ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद दिसंबर 2025 के बाद दो दर्जन से ज्यादा जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी चल रही थी। राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसी बिंदु पर संज्ञान लेते हुए सभी नियुक्तियों पर अस्थायी रोक लगा दी।



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संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी

इन घटनाओं के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश एनएसयूआई में पूरी तरह नई टीम के गठन की तैयारी में है।



सूत्रों का कहना है कि जल्द ही या तो नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित होगा या फिर संगठनात्मक चुनाव की घोषणा की जाएगी।



छात्र राजनीति में नई दिशा की कोशिश

राष्ट्रीय नेतृत्व अब ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है, जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हों और संगठन को विवादों से बाहर निकाल सकें। मकसद साफ है-छात्र राजनीति में विश्वसनीयता लौटाना और संगठन को फिर से सक्रिय बनाना।



मध्यप्रदेश एनएसयूआई में यह टकराव केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व संकट का संकेत है। प्रदेश स्तर पर लिए जा रहे फैसले जब राष्ट्रीय अनुशासन से टकराते हैं, तो परिणाम यही होता है-नियुक्तियां होल्ड, नेतृत्व पर सवाल और संगठन असमंजस में। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस “शह-मात” की स्थिति को कैसे सुलझाता



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