फर्जी फैकल्टी के सहारे चल रहे MP के 633 नर्सिंग कॉलेज, सीबीआई जांच में खुली पोल
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
- सीबीआई जांच में 633 कॉलेज फर्जी फैकल्टी पर चलते मिले।
- तीन साल में 1266 फैकल्टी की 3251 डुप्लीकेट एंट्रियां पकड़ी गईं।
- 1608 शिक्षकों का नर्सिंग काउंसिल में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
- सीबीआई ने नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि मिलाकर फर्जीवाड़ा पकड़ा।
ग्वालियर से बड़ी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा था। इस खुलासे ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। सीबीआई ने अपनी जांच में यह साफ किया है कि यह फर्जीवाड़ा सालों से चल रहा था।
क्या मिला सीबीआई की जांच में
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 633 नर्सिंग कॉलेज पूरी तरह फर्जी फैकल्टी के सहारे चल रहे थे। हैरानी की बात यह है कि कागजों में 1266 फैकल्टी मेंबर एक ही समय में कई कॉलेजों में पढ़ाते हुए दिखाए गए। यानी एक शिक्षक के नाम पर कई कॉलेजों में हाजिरी दर्ज थी।
इसे ही जादुई हाजिरी कहा जा रहा है। इसके अलावा 1608 शिक्षकों का मामला तो और गंभीर निकला। इन शिक्षकों का मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के डेटा में कोई रिकॉर्ड या रजिस्ट्रेशन ही नहीं मिला। सीबीआई ने नियमों और मानकों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों की विस्तृत जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है।
कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
सीबीआई ने सत्र 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के लिए एमपी ऑनलाइन से जुड़ी संबद्धता का डेटा जांचा। साथ ही नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल का डेटा भी खंगाला गया। डेटा फिल्टरिंग तकनीक की मदद से बारीकी से जांच की गई। फैकल्टी के नाम, पिता के नाम और जन्मतिथि का आपस में मिलान किया गया।
इसी मिलान में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। कई शिक्षकों की जानकारी अलग अलग कॉलेजों में एक साथ दर्ज मिली। यह साफ हो गया कि कागजों में सिर्फ नाम भरे गए थे। असल में इतने शिक्षक मौजूद ही नहीं थे।
तीन साल का पूरा आंकड़ा
सीबीआई की जांच में तीन शैक्षणिक सत्रों का डेटा खंगाला गया। सत्र 2020-21 में 561 कॉलेजों में 1060 शिक्षक डुप्लीकेट मिले। इनकी कुल 2527 बार एंट्री दर्ज थी। सत्र 2021-22 में 285 कॉलेजों में 275 फैकल्टी की 601 बार डुप्लीकेट प्रविष्टियां मिलीं। सत्र 2022-23 में 93 कॉलेजों में 59 शिक्षक 123 बार डुप्लीकेट पाए गए।
इस तरह तीन वर्षों में कुल 633 कॉलेजों में 1266 फैकल्टी की 3251 फर्जी और डुप्लीकेट एंट्रियां पकड़ी गईं। यह आंकड़ा साफ बताता है कि फर्जीवाड़ा किसी एक साल का नहीं, बल्कि लगातार तीन साल तक चला।
शहर दर शहर फर्जीवाड़े का हाल
ग्वालियर चंबल क्षेत्र में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली है। यहां के 8 जिलों में 194 कॉलेज डुप्लीकेट फैकल्टी के सहारे चल रहे थे। इस क्षेत्र में कुल 766 फर्जी फैकल्टी के नाम दर्ज मिले। राजधानी भोपाल भी इस फर्जीवाड़े से अछूती नहीं रही। यहां के 85 नर्सिंग कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी की 578 प्रविष्टियां पकड़ी गईं।
इंदौर में भी 41 नर्सिंग कॉलेजों की जांच हुई। इनमें 202 डुप्लीकेट फैकल्टी की एंट्री पाई गईं। जबलपुर में 22 नर्सिंग कॉलेजों के कुल 84 डुप्लीकेट फैकल्टी के नाम मिले। इस तरह पूरे प्रदेश में यह फर्जीवाड़ा फैला हुआ मिला।
ग्वालियर चंबल का जिलेवार आंकड़ा
ग्वालियर जिले में 114 कॉलेजों में कुल 468 डुप्लीकेट फैकल्टी मिलीं। दतिया के 25 कॉलेजों में 72 डुप्लीकेट एंट्री सामने आईं। शिवपुरी के 10 कॉलेजों में 55 डुप्लीकेट फैकल्टी मिलीं। भिंड के 9 कॉलेजों में 40 डुप्लीकेट एंट्री दर्ज हुईं।
अशोकनगर के 2 कॉलेजों में 10 डुप्लीकेट फैकल्टी पकड़ी गईं। मुरैना के 9 कॉलेजों में 67 डुप्लीकेट एंट्री मिलीं। श्योपुर के 7 कॉलेजों में 19 डुप्लीकेट फैकल्टी सामने आईं। यह पूरा आंकड़ा दिखाता है कि ग्वालियर सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ था।
एक फैकल्टी 24 कॉलेजों में दर्ज
जांच में एक चौंकाने वाला मामला भी सामने आया है। कई शिक्षक एक ही समय में दर्जनों कॉलेजों में पढ़ाते हुए दिखाए गए। एक फैकल्टी सदस्य का नाम तीन साल में कुल 24 कॉलेजों के रिकॉर्ड में मिला। सत्र 2020 में इनका नाम 11 कॉलेजों में दर्ज था। सत्र 2021 में यह नाम 10 कॉलेजों में और सत्र 2022 में 3 कॉलेजों में मिला।
इसके अलावा कई अन्य शिक्षकों के नाम भी 10 से 15 कॉलेजों में एक साथ दर्ज मिले। एक अन्य फैकल्टी 15 कॉलेजों में पदस्थ दिखाई गईं, जिनमें सत्र 2020 में 12 और 2021 में 3 कॉलेज शामिल थे। एक अन्य शिक्षक 12 कॉलेजों में दर्ज मिले, जिनमें सत्र 2020 में 9 और 2021 में 3 कॉलेज थे। दो अन्य शिक्षक 10-10 कॉलेजों में सत्र 2020 में ही एक साथ पदस्थ दिखाए गए।
हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े को गंभीरता से लिया था। कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सुनवाई और जांच का पूरा दायरा जबलपुर मुख्य पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने विस्तृत जांच करते हुए यह पूरी रिपोर्ट तैयार की।
यह रिपोर्ट अब हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई होने की उम्मीद है। जांच एजेंसी अब जिम्मेदार कॉलेज संचालकों की पहचान में जुटी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर विद्यार्थियों के भविष्य और स्वास्थ्य सेवा दोनों से जुड़ी है। नर्सिंग कॉलेज में फर्जी फैकल्टी से पढ़े छात्रों की योग्यता पर सीधा सवाल खड़ा होता है। यह मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मामला है। संविधान नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पाने का अधिकार देता है।
फर्जीवाड़ा इस अधिकार का सीधा उल्लंघन है। सीबीआई जांच से जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। दोषी कॉलेजों पर कार्रवाई से भविष्य में ऐसे मामले रुकेंगे। इसलिए यह खबर शिक्षा व्यवस्था और आम जनता दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
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