OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार
उन्होंने कांग्रेस सरकार के 27% आरक्षण (MP OBC Reservation) संबंधी अध्यादेश को कमजोर और त्रुटिपूर्ण बताया। साथ ही इसे जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया।
हाई कोर्ट के फैसले पर क्या बोले सीएम मोहन यादव?
27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हाई कोर्ट (MP High Court) ने साल 2019 से 2022 के बीच हुई नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कोर्ट ने 13% अतिरिक्त नियुक्तियों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आने वाली भर्तियों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, साल 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक हुई भर्तियों में 13% होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने को कहा है।
सीएम मोहन यादव ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27% OBC आरक्षण लागू किया था। यह अध्यादेश जल्दबाजी में लाया गया था। इसका नोटिफिकेशन कमजोर और त्रुटिपूर्ण था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसले से यह बात साबित हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश लाने से पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी सलाह नहीं ली थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, हाई कोर्ट के फैसले से कांग्रेस सरकार की 27% आरक्षण देने की मंशा पर भी सवाल उठे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले- OBC आरक्षण के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी सरकार
OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इंदौर में उन्होंने कहा कि साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने जल्दबाजी में तथ्य पेश किए थे। उन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट का फैसला आया है।
खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा सरकार OBC वर्ग को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मुद्दे पर उनकी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी बातचीत हुई है। सरकार ने आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक भी की है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार OBC आरक्षण के लिए वचनबद्ध है। इसके लिए जो भी जरूरी कदम उठाने होंगे, सरकार उठाएगी।
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस को घेरा, बोले- जल्दबाजी में लिया था फैसला
हाई कोर्ट के फैसले के बाद मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तत्कालीन कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा।
प्रहलाद पटेल ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर आया फैसला बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमलनाथ सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में फैसला लिया था। हाई कोर्ट ने उस फैसले को अवैध घोषित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है। वह केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम करती है। प्रहलाद पटेल के मुताबिक, अध्यादेश में कई संवैधानिक कमियां थीं। इसी कारण उसे निरस्त किया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों का भी जिक्र किया। पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सामूहिक प्रयास की पहल की थी। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
क्या है OBC आरक्षण का पूरा मामला?
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का विवाद साल 2019 से चल रहा है। उस समय प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने का फैसला लिया था। इसके लिए पहले अध्यादेश लाया गया। बाद में कानून में संशोधन किया गया।
सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। सवाल था कि OBC आरक्षण बढ़ने से कुल आरक्षण 50% की सामान्य सीमा से ऊपर पहुंच रहा था।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंदिरा साहनी मामले में आरक्षण की 50% सीमा तय की थी। इस सीमा से ज्यादा आरक्षण देने के लिए असाधारण परिस्थितियां साबित करना जरूरी है।
मध्य प्रदेश सरकार ने बढ़े हुए आरक्षण के समर्थन में अदालत में अपना पक्ष रखा। हालांकि, हाई कोर्ट ने पेश किए गए आंकड़ों को पर्याप्त नहीं माना। इसी आधार पर अदालत ने 27% OBC आरक्षण से जुड़े संशोधन को रद्द कर दिया। फैसले के बाद प्रदेश में OBC आरक्षण की सीमा फिर 14% रहने की बात सामने आई है।
13% होल्ड पद क्या हैं और अब क्या होगा?
OBC आरक्षण विवाद के कारण प्रदेश की कई सरकारी भर्तियां प्रभावित हुई थीं। इस समस्या के समाधान के लिए 87:13 का फॉर्मूला अपनाया गया था।
इसे आसान भाषा में समझें तो 100 पदों की भर्ती में 87 पदों के परिणाम जारी किए जाते थे। बाकी 13 पदों का परिणाम रोककर रखा जाता था। इन 13% पदों को ही होल्ड पद कहा जाता है। आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की नियुक्तियां अटकी हुई थीं।
अब हाई कोर्ट ने इन पदों को लेकर निर्देश दिए हैं। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के मुताबिक, अदालत ने 13% होल्ड पदों को तीन महीने में भरने को कहा है। इस फैसले से लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, नियुक्तियों की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। संबंधित भर्ती एजेंसियों को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
पहले से नियुक्त OBC अभ्यर्थियों की नौकरी का क्या होगा?
हाई कोर्ट ने पहले से नौकरी पा चुके कुछ OBC अभ्यर्थियों को भी राहत दी है। फैसले के मुताबिक, मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27% OBC आरक्षण के तहत हुई नियुक्तियों को सुरक्षित रखा गया है। इन नियुक्तियों को आने वाली भर्तियों में समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, 29 सितंबर 2022 के बाद हुई भर्तियों को लेकर अलग निर्देश दिए गए हैं। इस अवधि में 14% से अधिक OBC आरक्षण के आधार पर हुई नियुक्तियों की स्थिति भी फैसले से प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में पहले से नियुक्त कर्मचारियों और होल्ड अभ्यर्थियों की स्थिति को लेकर भर्ती एजेंसियों के अगले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
क्या अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान के बाद सरकार के अगले कदम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण करने की बात कही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
इससे पहले महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने भी सरकार की रणनीति पर जवाब दिया था। द सूत्र ने उनसे पूछा था कि सरकार 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियां शुरू करेगी या सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
इस सवाल पर महाधिवक्ता ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था। उन्होंने कहा था कि हाई कोर्ट का आदेश 159 पन्नों का है। फिलहाल इसका विश्लेषण किया जा रहा है।
अब मुख्यमंत्री ने भी कानूनी परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। ऐसे में सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
OBC पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
हाई कोर्ट के फैसले के बाद OBC पक्ष ने भी अपनी अगली रणनीति बताई है। OBC वर्ग की ओर से अधिवक्ता पुष्पेंद्र शाह ने कहा कि फैसले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि होल्ड पदों को किस तरह भरा जाएगा। अभ्यर्थियों को नियुक्तियां कैसे दी जाएंगी? इन मुद्दों पर अभी स्पष्टता आना बाकी है। पुष्पेंद्र शाह ने कहा कि OBC पक्ष फैसले को लेकर चर्चा कर रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा।
उन्होंने सरकार से भी फैसले को चुनौती देने की मांग की है। शाह का कहना है कि 27% आरक्षण का कानून सरकार लेकर आई थी। इसलिए सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जाने से क्या नियुक्तियों पर रोक लग जाएगी?
यदि सरकार हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देती है, तो नियुक्तियों पर असर पड़ने का सवाल उठ सकता है। हालांकि, केवल अपील दायर करने से हाई कोर्ट के फैसले पर अपने आप रोक नहीं लगेगी।
इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत लेनी होगी। यदि शीर्ष अदालत रोक लगाती है, तो संबंधित नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, रोक नहीं मिलने पर हाई कोर्ट के निर्देश लागू रहेंगे।
अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार और भर्ती एजेंसियों के अगले कदम पर है। एक तरफ 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियों का इंतजार है। दूसरी तरफ OBC पक्ष फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।