OBC आरक्षण पर अभी खत्म नहीं हुई लड़ाई! सुप्रीम कोर्ट जा सकती है मोहन सरकार, द सूत्र ने पहले ही दिए थे संकेत

Sumit Kumar | Oct 09, 2026, 17:07 IST
ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट जा सकती है मध्य प्रदेश सरकार
OBC Reservation: मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हाई कोर्ट के फैसले को सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Madhya Pradesh government may consider challenging the High Court verdict on OBC reservation in the Supreme Court.

वहीं, OBC पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियों का है।



दरअसल, द सूत्र ने अपनी पिछली खबर में बताया था कि हाई कोर्ट का फैसला किसी भी पक्ष में आए, दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। अब फैसला अनारक्षित वर्ग के पक्ष में आया है। इसके बाद OBC पक्ष ने भी फैसले को चुनौती देने की बात कही है।



इधर, सरकार के अगले कदम पर भी सबकी नजर है। हाई कोर्ट ने 13% होल्ड पदों को तीन महीने में भरने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार इन पदों पर नियुक्तियां शुरू करेगी या पहले सुप्रीम कोर्ट जाएगी?



सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की कर सकती है तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार OBC आरक्षण पर आए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के स्तर पर इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक अपील दायर करने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।



दरअसल, साल 2019 से ओबीसी आरक्षण (MP OBC Reservation) का मामला कानूनी विवाद में है। सरकार ने OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने का प्रावधान किया था। इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया।



अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति बदल गई है। अदालत ने 27% आरक्षण के लिए पेश किए गए आंकड़ों को पर्याप्त नहीं माना है। साथ ही 13% होल्ड पदों पर नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।



ऐसे में सरकार के सामने अब अगला कानूनी कदम तय करने की चुनौती है। यदि सरकार फैसले से सहमत नहीं होती है, तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।



द सूत्र ने पहले ही जताई थी सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना

ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) पर हाई कोर्ट का फैसला आने से पहले द सूत्र ने एक अहम संभावना बताई थी। खबर में बताया गया था कि फैसला किसी भी पक्ष में आए, मामला सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।



इसके पीछे दोनों पक्षों के अलग-अलग कानूनी दावे थे। अनारक्षित वर्ग 27% OBC आरक्षण का विरोध कर रहा था। वहीं, OBC पक्ष बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने की मांग कर रहा था।



अब हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद वही स्थिति बनती नजर आ रही है। अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों में खुशी है। दूसरी तरफ OBC पक्ष फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। हालांकि, सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।



महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट जाने पर नहीं दिया स्पष्ट जवाब

हाई कोर्ट के फैसले के बाद महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने 13% होल्ड पद तीन महीने में भरने के निर्देश दिए हैं।



इस दौरान द सूत्र ने महाधिवक्ता से एक अहम सवाल पूछा। क्या सरकार अब 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियां शुरू करेगी? या फिर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है?



इस सवाल पर महाधिवक्ता ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश 159 पन्नों का है। फिलहाल इस विस्तृत आदेश का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्लेषण के बाद कोई नई स्थिति बनती है, तो जानकारी दी जाएगी।



महाधिवक्ता के इस बयान से सरकार की अगली रणनीति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।



OBC पक्ष ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

हाई कोर्ट के फैसले के बाद OBC पक्ष के अधिवक्ता पुष्पेंद्र शाह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फैसले में अभी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। सबसे बड़ा सवाल होल्ड पदों पर नियुक्तियों को लेकर है। इन पदों को किस तरह भरा जाएगा? पहले से होल्ड अभ्यर्थियों की नियुक्ति का क्या होगा? ऐसे कई मुद्दों पर स्पष्टता आना बाकी है।



पुष्पेंद्र शाह ने बताया कि OBC पक्ष फैसले को लेकर चर्चा कर रहा है। उन्होंने जल्द सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही है। शाह ने कहा कि 27% आरक्षण का अधिनियम सरकार लेकर आई थी। इसलिए सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भी इस मामले में अपील करेगी।



13% होल्ड पदों पर नियुक्तियों का क्या होगा?

हाई कोर्ट के फैसले के बाद सबसे अधिक चर्चा 13% होल्ड पदों की है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं में इन पदों को रोककर रखा गया था। अब अदालत ने इन पदों को तीन महीने में भरने के निर्देश दिए हैं। इससे अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की उम्मीद बढ़ गई है।



हालांकि, नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। विभाग किस तरह पदों को भरेंगे? पहले से जारी भर्ती प्रक्रियाओं में क्या बदलाव होगा? अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र कब मिलेंगे?



इन सवालों पर संबंधित विभागों के निर्देशों से स्पष्टता आएगी।



अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है, तो स्थिति और महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार हाई कोर्ट के निर्देशों पर अंतरिम राहत की मांग कर सकती है। हालांकि, केवल अपील दायर करने से हाई कोर्ट का फैसला अपने आप नहीं रुकेगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अलग आदेश मिलना जरूरी होगा।



सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों पर हो सकती है बहस?

अगर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है, तो कई कानूनी सवाल महत्वपूर्ण होंगे। सबसे बड़ा मुद्दा 27% OBC आरक्षण की संवैधानिक वैधता का होगा। इसके साथ आरक्षण की 50% सीमा पर भी बहस हो सकती है।



हाई कोर्ट के फैसले में सरकार के पेश किए गए आंकड़ों को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में इन आंकड़ों की पर्याप्तता पर भी दलीलें दी जा सकती हैं। इसके अलावा 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियों का मुद्दा भी अहम रहेगा। सरकार या अन्य पक्ष इन निर्देशों को चुनौती दे सकते हैं।



हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग रखी जाएगी, यह अपील दाखिल होने के बाद ही स्पष्ट होगा।



OBC आरक्षण पर सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती

मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का मुद्दा लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों से जुड़ा है। कई भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण विवाद का असर पड़ा है। अब हाई कोर्ट के फैसले से नियुक्तियों का रास्ता खुलने की उम्मीद बनी है। वहीं, OBC पक्ष कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की तैयारी में है।



ऐसे में सरकार को भी अपनी अगली रणनीति तय करनी होगी। एक तरफ अदालत के निर्देशों का पालन करने का सवाल है। दूसरी तरफ 27% आरक्षण से जुड़ा कानूनी विवाद है। इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी है। OBC आरक्षण लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति का अहम मुद्दा रहा है।



फिलहाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की पुष्टि नहीं की है। महाधिवक्ता ने भी आदेश के विश्लेषण की बात कही है। ऐसे में अब नजर सरकार के अगले फैसले पर है।



सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार हाई कोर्ट का फैसला लागू करेगी या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। OBC पक्ष ने शीर्ष अदालत जाने की बात कही है। इसलिए आरक्षण विवाद की अगली कानूनी लड़ाई की संभावना बनी हुई है।

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