27% ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर जबलपुर में प्रदर्शन, विधानसभा में कानून पारित करने की मांग
वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछड़े वर्ग को आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए। उनका कहना है कि 27% आरक्षण प्रभावी नहीं होने से शिक्षा और रोजगार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।
कई सामाजिक संगठनों ने लिया हिस्सा
प्रदर्शन में कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने ओबीसी आरक्षण पर अपनी बात रखी। प्रदर्शन में अवाक संगठन, कुशवाहा समाज, कुर्मी समाज और विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा सर्वजनजाति सेवा, समाजवादी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, बौद्ध महासभा और पसमांदा कम्युनिटी के प्रतिनिधि भी पहुंचे। अलग-अलग संगठनों के लोगों ने एकजुट होकर अपनी मांगें रखीं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछड़े वर्ग को उसके अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर मिलकर आवाज उठाने की बात कही। उनका कहना है कि इस मामले में आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
जातिगत जनगणना कराने की भी मांग
प्रदर्शन में पिछड़ा वर्ग से जुड़ी कई मांगें उठाई गईं। इनमें जातिगत जनगणना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इससे पिछड़े वर्ग की स्थिति समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाई। इन सभी मांगों को ज्ञापन में शामिल किया गया। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने पिछड़े वर्ग के सामाजिक और आर्थिक हितों की रक्षा की बात कही। उन्होंने इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कई मांगें रखी गईं। ज्ञापन में जातिगत जनगणना, बैलेट पेपर से चुनाव और निजी संस्थानों में आरक्षण लागू करने की मांग शामिल थी।
मोर्चा ने इन मांगों पर ध्यान देने की अपील की। प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने 27% आरक्षण लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ प्रभावी तरीके से मिलना चाहिए। इससे पिछड़े वर्ग को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में फायदा मिल सकेगा।
विधानसभा में कानून पारित करने की मांग
संयुक्त पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने मध्य प्रदेश विधानसभा से इस मामले में पहल करने की मांग की है। मोर्चा ने सर्वसम्मति से कानून पारित कर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट को भेजने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ओबीसी रिजर्वेशन के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने मांगों पर उचित कार्रवाई करने की अपील की। मोर्चा ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। संगठनों ने 27% आरक्षण लागू करने समेत अन्य मांगों के लिए आवाज उठाते रहने की बात कही।
FAQs
- प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या थीं?
प्रदर्शनकारियों ने पिछड़े वर्ग को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, जातिगत जनगणना कराने, और निजी संस्थानों में आरक्षण लागू करने की मांग की। उन्होंने 27% आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने की भी मांग की। - कौन-कौन से संगठनों ने प्रदर्शन में भाग लिया?
प्रदर्शन में अवाक संगठन, कुशवाहा समाज, कुर्मी समाज, विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधि, सर्वजनजाति सेवा, समाजवादी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, बौद्ध महासभा और पसमांदा कम्युनिटी के लोगों ने भाग लिया। - प्रदर्शनकारियों ने सरकार से क्या अपील की?
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा करने, उनके मुद्दों पर ठोस कदम उठाने और समर्थन देने की अपील की। उन्होंने विधानसभा से कानून पारित करने की भी मांग की।