MP में अफसरों को 10 साल बाद तो मिला प्रमोशन, लेकिन करना पड़ रहा वही पुराना काम

Amresh Kushwaha | Sept 03, 2026, 13:04 IST
MP में अफसरों को 10 साल बाद मिला प्रमोशन
MP में अफसरों को 10 साल बाद मिला प्रमोशन
मध्यप्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों को 10 से 15 साल बाद बड़ा पद तो मिला लेकिन काम अभी भी पुराना ही करना पड़ रहा है। पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्कूल शिक्षा और वित्त विभाग में 80 फीसद पदोन्नत कर्मचारी अभी भी पुराने पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में अफसरों को प्रमोशन तो मिली पर नई पोस्टिंग नहीं मिली।
  • 80 फीसद पदोन्नत कर्मचारी अभी भी पुराने पद पर काम कर रहे हैं।
  • यह हाल पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्कूल शिक्षा और वित्त विभाग में है।
  • निचले स्तर पर कर्मचारियों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है।
  • विभाग प्रमुखों को इस समस्या की कोई चिंता नहीं दिख रही।

पद बड़ा हुआ पर जिम्मेदारी नहीं बदली

मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में इन दिनों अजीब स्थिति बनी हुई है। कई अधिकारी-कर्मचारियों को 10 से 15 साल बाद बड़ा ओहदा तो मिल गया है। लेकिन वे अभी भी अपना पुराना और छोटा काम ही कर रहे हैं। यह समस्या सिर्फ एक विभाग की नहीं है।



पुलिस से लेकर लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) तक यही हाल है। स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग में भी यही स्थिति देखी जा रही है। विभागों ने जल्दबाजी में पदोन्नति तो कर दी, लेकिन नई पदस्थापना देने में देरी हो रही है।



80 फीसद अफसर पुराने पद पर ही अटके

एक बड़ी पड़ताल में सामने आया है कि पदोन्नत हो चुके 80 फीसद अधिकारी और कर्मचारी अभी भी पुराने पदों पर ही सेवाएं दे रहे हैं। यानी उनका पद तो बदल गया, लेकिन जिम्मेदारी और काम पहले जैसा ही है।



इस अव्यवस्था के कारण निचले स्तर पर कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। कई कर्मचारी इस बात से नाराज हैं कि उन्हें सिर्फ कागजी तरक्की दी गई है। ऐसे हालात में विभागों के खिलाफ कभी भी विरोध फूट सकता है।



पुलिस विभाग में स्टार तो लगे, काम नहीं मिला

पुलिस विभाग में सिपाही से हवलदार तक की पदोन्नति दी गई। हवलदार से एएसआई और एएसआई से एसआई बनाया गया। इसी तरह एसआई से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से डीएसपी के पद पर भी पदोन्नति हुई। बैतूल में डीएसपी पद पर पदोन्नत एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी बात रखी।



उनके मुताबिक पदोन्नति तो कर दी गई और स्टार भी लगा दिए गए, लेकिन बड़े ओहदे वाला पद अभी तक नहीं मिला है। हालांकि कुछ जिलों में टीआई (Traffic Inspector) जैसे बड़े पदों पर पदोन्नति के बाद नए अफसरों ने काम भी संभाल लिया है।



वित्त विभाग में 238 अफसर इंतजार में

वित्त विभाग में भी यही समस्या देखने को मिल रही है। यहां के 238 अधीनस्थ लेखाधिकारियों को नई पदस्थापना का इंतजार है। इन सभी को सहायक संचालक या लेखाधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया है।



इसके अलावा 20 से ज्यादा उप संचालकों को संयुक्त संचालक के पद पर पदोन्नति दी गई है। इसे काफी समय हो चुका है। फिर भी उन्हें नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यहां सिर्फ ऊंची पहुंच रखने वाले कर्मचारियों को ही अच्छी जिम्मेदारी मिल पाती है।



पीडब्ल्यूडी में नाम के कार्यपालन यंत्री

लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी ने 95 सहायक यंत्रियों को कार्यपालन यंत्री के पद पर पदोन्नत किया है। इसी तरह 100 से अधिक सब इंजीनियरों को अनुविभागीय अधिकारी या सहायक यंत्री बनाया गया है। लेकिन कई पदों पर सीआर यानी कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट को लेकर विवाद के चलते पदोन्नति की प्रक्रिया ही अटकी हुई है। जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिल चुकी है, उनसे भी पुराना काम ही कराया जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि सिर्फ पद बदला है, जिम्मेदारी नहीं।



स्कूल शिक्षा विभाग में कागज पर बने प्राचार्य

स्कूल शिक्षा विभाग ने भी कुछ संवर्गों में बड़ी संख्या में पदोन्नति दी है। करीब 2000 व्याख्याताओं को हाई स्कूल प्राचार्य बनाया गया है। इसके अलावा हाई स्कूल प्राचार्यों को हायर सेकेंडरी स्कूल का प्राचार्य बना दिया गया है।



इनमें से कई शिक्षकों का कहना है कि यह पदोन्नति सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। असल कामकाज में इसका कोई असर नहीं दिख रहा। इसकी वजह यह है कि नए पदों पर अभी तक पदस्थापना ही नहीं दी गई है।



वन विभाग का तरीका रहा अलग

दूसरे विभागों से अलग वन विभाग ने पदोन्नति के साथ ही नई जिम्मेदारी भी सौंप दी है। करीब 90 फीसद पदोन्नति मामलों में विभाग ने ऐसा ही किया है। जिन वन रक्षकों को वनपाल बनाया गया, उन्हें वनपाल का काम भी तुरंत दे दिया गया। इसी तरह वनपाल से उप वन क्षेत्रपाल बनाए गए कर्मचारियों को भी नई जिम्मेदारी मिल गई।



सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 और स्टेनो से लेखाधिकारी बने कर्मचारियों को भी नया काम सौंपा गया। भृत्य से दफ्तरी बनाए गए कर्मचारियों के साथ भी यही हुआ। हालांकि डिप्टी रेंजर से रेंजर पद पर होने वाली पदोन्नति की प्रक्रिया अभी आगे नहीं बढ़ पाई है।



असंतोष बढ़ने का डर

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि मैदानी स्तर पर कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। लेकिन विभाग प्रमुखों को इसकी कोई खास फिक्र नजर नहीं आ रही। कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ पद बदलने से उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन नहीं होता।



उन्हें नई जिम्मेदारी और सही वेतनमान भी मिलना चाहिए। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में विभागों के खिलाफ खुला विरोध देखने को मिल सकता है।



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