कमर्शियल टैक्स विभाग में 10 साल बाद प्रमोशन का विवाद खत्म, 50-50% का फॉर्मूला तय
Amresh Kushwaha | Sept 03, 2026, 09:27 IST
कमर्शियल टैक्स विभाग में प्रमोशन
मध्य प्रदेश के कमर्शियल टैक्स विभाग में 10 साल पुराना प्रमोशन विवाद हाईकोर्ट के दो फैसलों से खत्म हो गया है। अब टैक्स इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट दोनों एसीटीओ बन सकेंगे। विभाग में 432 में से 317 एसीटीओ पद अभी खाली हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में कमर्शियल टैक्स विभाग का प्रमोशन विवाद अब खत्म हो गया है।
- हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसलों से पूरी स्थिति साफ हो गई है।
- टैक्स इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट, दोनों अब एसीटीओ बन सकेंगे।
- विभाग में एसीटीओ के 432 पदों में से 317 पद खाली हैं।
- यह विवाद पिछले 10 साल से प्रमोशन रुकने के कारण बना था।
10 साल से अटका विवाद
साल 2013 के नियमों में साफ लिखा था कि खाली एसीटीओ पदों में से 50% इंस्पेक्टरों को और 50% असिस्टेंटों को प्रमोशन मिलेगा। लेकिन पिछले 10 साल से यह प्रमोशन प्रक्रिया रुकी हुई थी। इस कारण विभाग में एसीटीओ के 432 पदों में से 317 पद खाली पड़े हैं। यह आंकड़ा बताता है कि मामला कितना बड़ा और पुराना है। इतने पद खाली रहने से विभाग के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।
कामकाज कैसे चल रहा था
जबलपुर कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने यह भी कहा कि इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट की सैलरी भले ही बराबर हो, दोनों के काम के कानूनी अधिकार अलग-अलग हैं। हालांकि कोर्ट ने प्रमोशन के मौजूदा नियमों को रद्द नहीं किया। कोर्ट ने सिर्फ भर्ती योग्यता से जुड़े सवाल पर टिप्पणी की थी। इससे प्रमोशन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ता।
इंदौर कोर्ट का आदेश अब भी लागू
जबलपुर कोर्ट ने सिर्फ टैक्स असिस्टेंट की भर्ती योग्यता को चुनौती दी थी। प्रमोशन और उच्च प्रभार का विवाद इंदौर कोर्ट में ही तय हुआ था। इसलिए इंदौर कोर्ट का फैसला आज भी पूरी तरह लागू माना जाएगा। दोनों फैसलों को साथ पढ़ने से ही पूरी तस्वीर साफ होती है।
क्या टीए पद अस्थायी है
सुपरसीड होने का डर गलत
नियमों के मुताबिक 5 साल की नौकरी पूरी करने के बाद दोनों पद सीधे एसीटीओ बनने के पात्र हो जाते हैं। इसलिए इसे पद लांघना नहीं, बल्कि कोर्ट के तहत मिलने वाला सामान्य प्रमोशन ही माना जाएगा। कोर्ट ने इस भ्रम को दूर करने के लिए नियमों का हवाला भी दिया।
भर्ती को लेकर उठे सवाल
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला भी दिया। कोर्ट ने कहा कि जब नियम दोनों पदों को बराबर मानते हैं, तो भर्ती के तरीके को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। इससे भर्ती की वैधता पर लगे सारे सवाल खत्म हो गए हैं।
अब आगे क्या होगा
साथ ही विभाग का कामकाज भी बेहतर तरीके से चल सकेगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब प्रशासनिक स्तर पर भी प्रक्रिया तेज होनी चाहिए। जल्द फैसला लागू होने से विभाग की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
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