राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश, तीन महीने में लागू हो हिरासत में मौत पर राहत योजना

Mukesh Sharma | Oct 27, 2026, 17:34 IST
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हिरासत में होने वाली मौत पर मुआवजा
हिरासत में होने वाली मौत पर मुआवजा

राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल में होने वाली मौतों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को कस्टोडियल डेथ रिलीफ स्कीम-2025को तीन महीने के भीतर लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही जेलों की सुरक्षा, निगरानी, स्वच्छता और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई अहम आदेश दिए हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हिरासत में होने वाली मौत पर मुआवजा देने के लिए राजस्थान कस्टोडियन डेथ रिलीफ स्कीम-2025 को अंतिम रूप देकर तीन महीने के भीतर लागू करने को कहा है। चीफ जस्टिस संजय के.अग्रवाल व जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश जेलों के हालात पर दर्ज 6 जनहित याचिकाओं का निपटारा करते हुए दिए।

इसके अतिरिक्त अदालत ने जेलों में सुरक्षा, स्वच्छता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति बनाने, सीसीटीवी से निगरानी करने, मोबाईल इस्तेमाल को रोकने के लिए औचक निरीक्षण करने, पर्याप्त संख्या में चालानी गार्ड लगाने, कैदियों को उचित मजदूरी देने, हिरासत में मौत राहत योजना लागू करने तथा महिला जेलों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने के निर्देश दिए हैं।

क्या था पूरा मामला

फरवरी 2012 में अजमेर जेल में बंद एक हिस्ट्रीशीटर आतिश गर्ग ने मोबाइल फोन के जरिए जयपुर के एक टायर कारोबारी पर गोलीबारी और रंगदारी की घटना की साजिश रची थी। वह जेल के भीतर से ही गोलियां चलाने की आवाज भी सुन रहा था। इस घटना ने जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए और अदालत ने जेलों को षड्यंत्रालय तक कहा था। इस घटना पर हाईकोर्ट ने स्व:प्रेरणा से जनहित याचिका दर्ज की थी।

बाद मामले में अदालत ने मामले का दायरा बढ़ा दिया था। इनमें कैदियों को मनरेगा (MNREGA) के समान न्यूनतम मजदूरी देने, बुनियादी सुविधाएं देने व स्वच्छ व निरंतर पानी की सप्लाई, महिला कैदियों के स्वास्थ्य अधिकारों और मुलाकात के अधिकारों से संबंधित मुद्दों सहित हिरासत में मौत जैसे मामले शामिल किए।

जगन गुर्जर हत्या सीसीटीवी बंद होने का परिणाम

अदालत ने 29 जून 2026 को विचाराधीन कैदी जगन गुर्जर की अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में साथी कैदी विष्णु ने तौलिए से गला घोंटकर हत्या करने की घटना पर आश्चर्य जताया है। अदालत ने कहा है कि सरकार के जवाब से ही साफ है कि यह घटना सीसीटीवी के बंद होने के कारण हुई थी।

सीसीटीवी कैमरों की कमी

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र प्रतीक कासलीवाल ने जेलों में अपर्याप्त सीसीटीवी स्थापना पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में डीजे की निरीक्षण रिपोर्टों से विभिन्न सुविधाओं में भारी कमियां उजागर हुईं।

विशेष रूप से अजमेर के महिला बंदी सुधार गृह में एक भी कैमरा नहीं था। बीकानेर केंद्रीय जेल में बजट की कमी के कारण 275 प्रस्तावित कैमरों में से केवल 16 कैमरे थे। जयपुर जिला जेल में आवश्यक कोटे से कम कैमरे थे। कोटा केंद्रीय जेल में मात्र 15 कैमरे थे और जोधपुर तथा उदयपुर में 37 कैमरे खराब थे। इसके अलावा चालानी गार्डों की पिछली भर्ती भीड़भाड़ की समस्या का समाधान करने में विफल रही है। यह भी कहा गया कि मोबाइल फोन तलाशी के लॉग तथा प्रिजन इनमेट कॉलिंग सिस्टम का सख्ती से सत्यापन से होना चाहिए।

सुधार तो हुए हैं लेकिन

अदालत ने कहा है कि पिछले प्रयासों से राजस्थान प्रिजनर्स रूल्स 2022 और पैरोल रूल्स 2021 जैसे नियमों में संशोधन हुए हैं,लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि उच्च सुरक्षा वाली जेलों में गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों को रोकने के लिए संरचनात्मक सुधारों के वास्ते निरंतर निगरानी और तकनीकी जवाबदेही आवश्यक है।

यह हैं अदालत के निर्देश

राज्य-स्तरीय निगरानी समिति (State-Level Monitoring Committee)

प्रत्येक जिले के जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्थायी राज्य-स्तरीय निगरानी समिति का गठन। महानिदेशक (जेल),सदस्य सचिव (RALSA) और निदेशक (DOIT) इस समिति के अन्य सदस्य होंगे जो जेल की स्थितियों की निगरानी के लिए त्रैमासिक बैठक करेंगे।

CCTV निगरानी का निर्देश

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT),राजस्थान और RAJCOMP इन्फो सर्विसेज लिमिटेड (RISL) को तीन महीने का समय दिया गया है कि वे बीकानेर में 275 और जयपुर में 60 कैमरों सहित सभी प्रस्तावित सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा करें। खराब कैमरों की मरम्मत करें और पर्याप्त स्टोरेज बैकअप प्रणाली सुनिश्चित करें।

मोबाइल के लिए सघन तलाशी (Security Sweeps)

जेल विभाग को सभी जेलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए औचक तलाशी (surprise sweeps) के लिए SOP तैयार करें। बरामदगी का संस्था-वार रिकॉर्ड रखा जाए।

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जांच लंबित होने पर भी मिलेगी प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी | Rajasthan High Court's Big Decision: Provisional Pension and 50% Gratuity to be Provided Even if Investigation is Pending
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जांच लंबित होने पर भी मिलेगी प्रोविजनल पेंशन, 50% ग्रेच्युटी
27 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के पेंशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही लंबित होने से किसी कर्मचारी को पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस कुलदीप माथुर ने सहकारिता विभाग से रिटायर अर्जुन सिंह की याचिका स्वीकार कर ली। उन्होंने जरूरी दस्तावेज जमा होने के 60 दिन के भीतर अर्जुन सिंह को लाभ जारी करने के निर्देश दिए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के पेंशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही लंबित होने से किसी कर्मचारी को पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस कुलदीप माथुर ने सहकारिता विभाग से रिटायर अर्जुन सिंह की याचिका स्वीकार कर ली। उन्होंने जरूरी दस्तावेज जमा होने के 60 दिन के भीतर अर्जुन सिंह को लाभ जारी करने के निर्देश दिए।

मैनपॉवर और उचित वेतन

राज्य सरकार तीन महीने के भीतर वर्तमान कैदियों की संख्या के मुकाबले चालानी गार्डों की आवश्यकता का आकलन करके समयबद्ध भर्ती शुरू करे। कैदियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप मजदूरी दी जाए।

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27 Oct 2026 ,
By Jageshwar Prasad
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी पैरोल की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते अब आसाराम को आज शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण करना होगा।
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महिला जेलें और कैदियों की मुलाकात

सभी महिला जेलों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई जाएं और दो महीने के भीतर निकट संबंधी कैदियों की समय-समय पर मुलाकात की नीति को अंतिम रूप दिया जाए।

हिरासत में मौत पर राहत योजना (Custodial Death Relief Scheme)

राज्य सरकार राजस्थान कस्टोडियन डेथ रिलीफ स्कीम 2025 को अंतिम रूप देकर,स्वीकृत करना होगा और तीन महीने के भीतर औपचारिक रूप से नोटिफाई करना होगा।

पंचायत चुनाव: नामांकन खारिज होने पर हाईकोर्ट से राहत नहीं, चुनाव के बाद याचिका का विकल्प | Panchayat Elections: No relief from High Court on rejection of nomination, option of petition after election
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राजस्थान हाईकोर्ट की स्पेशल बैंच ने बुधवार को नामांकन खारिज होने की याचिका को खारिज किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतों का हस्तक्षेप नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता ने नामांकन पत्र में एक गलती बताई, जो तारीखों से संबंधित थी। अदालत ने पहले इस तरह के मामलों में भी यही कानूनी सिद्धांत दोहराया है।
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