3 IPS को डीजी बनाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर, Ex-Cadre के लिए नहीं ली गृह मंत्रालय की मंजूरी
Arun Tiwari | Oct 27, 2026, 17:10 IST
छत्तीसगढ़ आईपीएस प्रमोशन को लेकर विवाद
छत्तीसगढ़ आईपीएस प्रमोशन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार तीन आईपीएस अफसरों को डीजी स्तर पर पदोन्नत करने जा रही है। छत्तीसगढ़ कैबिनेट का फैसला इस प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका है। लेकिन गृह मंत्रालय की मंजूरी अभी नहीं मिली है। सरकार तीन नए एक्स कैडर डीजी पद बनाना चाहती है।
इन पदों पर 1994, 1995 और 1996 बैच के आईपीएस अफसर पदोन्नत होंगे। प्रस्ताव अब केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। सवाल यह है कि इतनी जल्दी क्यों?
डीजी (DG - Director General) पुलिस सेवा का शीर्ष स्तर है। आईपीएस (IPS - Indian Police Service) अफसर इसी सेवा के सदस्य होते हैं। एक्स कैडर पद यानी कैडर की तय संख्या से अलग बनाए गए पद। कैबिनेट ने ऐसे तीन पद बनाने का प्रस्ताव पास किया है।
Ex-Cadre DG पोस्ट के लिए केंद्र की पूर्व स्वीकृति जरूरी बताई गई है। खबर में कहा गया है कि राज्य ने बिना मंजूरी प्रस्ताव कैबिनेट में रखा। छत्तीसगढ़ के पास अभी डीजी कैडर के दो पद हैं। एक्स कैडर डीजी के भी दो पद हैं। ये चारों पद भरे हुए हैं।
आईपीएस कैडर समीक्षा 21 मई 2025 को हुई थी। यह समीक्षा राज्य सरकार से राय-मशविरे के बाद हुई। इसमें सिर्फ दो एक्स कैडर पदों की अनुमति का जिक्र बताया गया है। फिर तीन अतिरिक्त पद क्यों? इसी पर सवाल उठ रहे हैं।
डीजी कैडर में डीजीपी अरुणदेव गौतम और डीजी जीपी सिंह हैं। सिंह ट्रेनिंग और राज्य पुलिस अकादमी देखते हैं। एक्स कैडर में पवन देव और हिमांशु गुप्ता हैं। देव होमगार्ड, सिविल डिफेंस और फायर के डीजी हैं। गुप्ता जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के डीजी हैं।
जानकार बताते हैं कि कैडर की ताकत सिर्फ राज्य तय नहीं करता। इसमें केंद्र सरकार की भूमिका होती है। सीमा से ज्यादा एक्स कैडर पद पर नियुक्ति के लिए पूर्व स्वीकृति चाहिए। नियमों के मुताबिक बिना केंद्र की मंजूरी हुई नियुक्ति रद्द हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक शीर्ष स्तर पर ज्यादा पद होने से ढांचा ऊपर से भारी (top-heavy) हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नया पद बनाने से पहले तीन बातें साफ हों। असली प्रशासनिक जरूरत, कैडर समीक्षा और केंद्र की स्वीकृति।
4 दिसंबर 2017 को कैबिनेट ने तीन एक्स कैडर डीजी पद बनाए थे। तब कहा गया कि केंद्र की मंजूरी बाद में ली जाएगी। लेकिन गृह मंत्रालय ने इन पदों को स्वीकृति नहीं दी।
इसके बावजूद 6 अक्टूबर 2018 को तीन आईपीएस अफसरों को पदोन्नति दे दी गई। ये अफसर थे संजय पिल्लै, आरके विज और मुकेश गुप्ता। सरकार बदली तो भूपेश सरकार ने रमन सरकार का फैसला पलट दिया। उसने पदोन्नतियां रद्द कर दीं।
खबर के मुताबिक हाईकोर्ट ने पदोन्नति रद्द की थी। आगे कहा गया है कि कोर्ट ने भूपेश सरकार का फैसला सही माना। नतीजा यह रहा कि वे पदोन्नतियां वापस लेनी पड़ीं।
अब वही गलती दोहराने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि 2018 में पहले पद बने। केंद्र से मंजूरी नहीं मिली। फिर भी पदोन्नतियां दे दी गईं। आखिर में उन्हें वापस लेना पड़ा। ऐसे में आज की स्थिति को उसी की पुनरावृत्ति बताया जा रहा है।
मामला सिर्फ तीन पदों या तीन अफसरों का नहीं है। असल सवाल राज्य और केंद्र के बीच तय व्यवस्था के पालन का है। इस व्यवस्था की शिकायत पीएमओ (PMO – Prime Minister’s Office) में हो चुकी है।
सूत्रों की मानें तो गृह मंत्री विजय शर्मा इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थे। इसकी आधिकारिक पुष्टि इस खबर में नहीं है। अब फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है। वह सहमति देती है या नहीं, यही देखना है। इस खबर में सरकार का पक्ष शामिल नहीं है।
बताया गया है कि 1994 बैच में एसआरपी कल्लूरी का नाम आता है। 1995 बैच में प्रदीप गुप्ता और 1996 बैच में विवेकानंद का नाम आता है। किस अफसर को पद मिलेगा, यह अभी तय नहीं बताया गया है। इन अफसरों का पक्ष खबर में शामिल नहीं है।
सूत्र दावा करते हैं कि कुछ आईपीएस अफसरों का एक समूह यह चाहता है। दावा है कि गृह विभाग पर प्रस्ताव कैबिनेट में लाने का दबाव बनाया गया। दावा यह भी है कि पसंदीदा अफसर को अगला पुलिस प्रमुख बनाना है। इन दावों की कोई पुष्टि नहीं है। किसी अफसर या समूह का नाम भी नहीं लिया गया है।
छत्तीसगढ़ आईपीएस प्रमोशन (CG IPS promotion) का यह मामला अब केंद्र के पाले में है। अब सबकी नजर गृह मंत्रालय के फैसले पर टिकी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने तीन नए एक्स कैडर डीजी पद बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
- इन पदों पर 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन अफसरों को पदोन्नति मिलेगी।
- प्रस्ताव अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
- बताया गया है कि इन पदों के लिए केंद्र की पूर्व स्वीकृति जरूरी है।
- इससे पहले 2018 में ऐसी ही पदोन्नति रद्द हो चुकी है।
तीन नए एक्स कैडर डीजी पद क्यों?
Ex-Cadre DG पोस्ट के लिए केंद्र की पूर्व स्वीकृति जरूरी बताई गई है। खबर में कहा गया है कि राज्य ने बिना मंजूरी प्रस्ताव कैबिनेट में रखा। छत्तीसगढ़ के पास अभी डीजी कैडर के दो पद हैं। एक्स कैडर डीजी के भी दो पद हैं। ये चारों पद भरे हुए हैं।
आईपीएस कैडर समीक्षा में क्या तय हुआ?
डीजी कैडर में डीजीपी अरुणदेव गौतम और डीजी जीपी सिंह हैं। सिंह ट्रेनिंग और राज्य पुलिस अकादमी देखते हैं। एक्स कैडर में पवन देव और हिमांशु गुप्ता हैं। देव होमगार्ड, सिविल डिफेंस और फायर के डीजी हैं। गुप्ता जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के डीजी हैं।
केंद्र की मंजूरी इतनी जरूरी क्यों?
सूत्रों के मुताबिक शीर्ष स्तर पर ज्यादा पद होने से ढांचा ऊपर से भारी (top-heavy) हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नया पद बनाने से पहले तीन बातें साफ हों। असली प्रशासनिक जरूरत, कैडर समीक्षा और केंद्र की स्वीकृति।
रमन सरकार की 2018 पदोन्नति
इसके बावजूद 6 अक्टूबर 2018 को तीन आईपीएस अफसरों को पदोन्नति दे दी गई। ये अफसर थे संजय पिल्लै, आरके विज और मुकेश गुप्ता। सरकार बदली तो भूपेश सरकार ने रमन सरकार का फैसला पलट दिया। उसने पदोन्नतियां रद्द कर दीं।
क्या हाईकोर्ट ने पदोन्नति रद्द की थी?
अब वही गलती दोहराने की आशंका जताई जा रही है।
पीएमओ तक पहुंची शिकायत, उठे सवाल
मामला सिर्फ तीन पदों या तीन अफसरों का नहीं है। असल सवाल राज्य और केंद्र के बीच तय व्यवस्था के पालन का है। इस व्यवस्था की शिकायत पीएमओ (PMO – Prime Minister’s Office) में हो चुकी है।
गृह मंत्री विजय शर्मा का रुख
तीन बैच के किन अफसरों के नाम आते हैं?
क्या जल्दबाजी के पीछे कोई वजह है?
छत्तीसगढ़ आईपीएस प्रमोशन (CG IPS promotion) का यह मामला अब केंद्र के पाले में है। अब सबकी नजर गृह मंत्रालय के फैसले पर टिकी है।
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