राजस्थान में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग होगी कल, 1.06 करोड़ वोटर डालेंगे वोट
Ashish Bhardwaj | Oct 27, 2026, 18:21 IST
दूसरे फेज की वोटिंग होगी कल
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग कल बुधवार, 28 अक्टूबर को होगी। इस वोटिंग में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए वोट डाले जाएंगे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। दूसरे फेज की वोटिंग में 22 जिला परिषदों में 532 वार्डों और 124 पंचायत समितियों के 2197 वार्डों के लिए चुनाव होंगे।
राजस्थान के 22 जिलों में दूसरे चरण के पंचायत चुनाव के लिए कल, बुधवार को मतदान होगा। पहला चरण का मतदान 22 अक्टूबर को हुई था। इस चरण में 16 जिलों की जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान हुआ था।
इस चुनाव में मतदाताओं को दो वोट डालने होंगे। पहला वोट जिला परिषद सदस्य के उम्मीदवार के लिए और दूसरा पंचायत समिति सदस्य के उम्मीदवार के लिए होगा। दोनों पदों के लिए मतदान ईवीएम (EVM) के जरिए क राया जाएगा।मतदान सुबह 7 बजे शुरू होगा और शाम 6 बजे तक चलेगा। तय समय पर मतदान केंद्र में प्रवेश कर चुके मतदाताओं को वोट डालने का मौका दिया जाएगा।
दूसरे चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति की सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। कई इलाकों में स्थानीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। उम्मीदवारों की नजर सिर्फ जीत पर नहीं, बल्कि आगे होने वाले प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव पर भी रहेगी।
पंचायत समिति के चुने गए सदस्य मिलकर प्रधान का चुनाव करेंगे। वहीं जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य जिला प्रमुख चुनेंगे। इसलिए इन चुनावों का महत्व केवल वार्ड की सीट जीतने तक सीमित नहीं है। इन नतीजों का असर स्थानीय निकायों में आगे बनने वाले नेतृत्व पर भी पड़ेगा।
मतदान के बाद
मतदान खत्म होते ही कई जगह राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को एकजुट रखने की कोशिश कर सकते हैं। कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं की ओर से उम्मीदवारों को होटल या रिसॉर्ट में ठहराने की तैयारी की चर्चा है। इसे आम तौर पर बाड़ेबंदी कहा जाता है।
इसकी वजह प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव हैं। इन पदों के लिए चुने गए सदस्य मतदान करते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अपने समर्थक सदस्यों को दूसरे खेमे के संपर्क में जाने से रोकने और संख्या बल बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, बाड़ेबंदी की तैयारी हर जगह होने की पुष्टि नहीं है। स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में रणनीति बदल सकती है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की मतगणना 20 नवंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रस्तावित है। इसके बाद प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल दूसरे चरण के मतदाताओं के पास अपने प्रतिनिधि चुनने का मौका है। मतदान के दिन वोटर की भागीदारी और उम्मीदवारों का प्रदर्शन तय करेगा कि स्थानीय राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहता है।
एक वोटर डालेगा दो वोट
बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला, निर्दलीय भी मैदान में
पंचायत समिति के चुने गए सदस्य मिलकर प्रधान का चुनाव करेंगे। वहीं जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य जिला प्रमुख चुनेंगे। इसलिए इन चुनावों का महत्व केवल वार्ड की सीट जीतने तक सीमित नहीं है। इन नतीजों का असर स्थानीय निकायों में आगे बनने वाले नेतृत्व पर भी पड़ेगा।
मतदान के बाद बाड़ेबंदी की तैयारी
इसकी वजह प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव हैं। इन पदों के लिए चुने गए सदस्य मतदान करते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अपने समर्थक सदस्यों को दूसरे खेमे के संपर्क में जाने से रोकने और संख्या बल बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, बाड़ेबंदी की तैयारी हर जगह होने की पुष्टि नहीं है। स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में रणनीति बदल सकती है।
नतीजों के लिए 20 नवंबर तक इंतजार
फिलहाल दूसरे चरण के मतदाताओं के पास अपने प्रतिनिधि चुनने का मौका है। मतदान के दिन वोटर की भागीदारी और उम्मीदवारों का प्रदर्शन तय करेगा कि स्थानीय राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहता है।
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