मंत्रियों के कामकाज पर खफा हुईं स्मृति इरानी, वर्किंग सुधारने के लिए डेडलाइन,एक एक से किया सवाल-जवाब

Arun Tiwari | Oct 27, 2026, 17:37 IST
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छत्तीसगढ़ में मंत्रियों पर स्मृति ईरानी सख्त
छत्तीसगढ़ में मंत्रियों पर स्मृति ईरानी सख्त

छत्तीसगढ़ भाजपा के मंत्रियों पर संगठन की सख्ती दिखी है। प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी ने अपने दौरे में तेवर साफ कर दिए। स्मृति इरानी का पहला दौरा मंत्रियों के लिए सख्त संदेश लेकर आया। उन्होंने मंत्रियों को डेडलाइन भी दे दी। दो दिनों में दर्जन भर बैठकें हुईं। इनमें कार्यकर्ताओं से लेकर सांसदों तक ने मंत्रियों की शिकायत की।

स्मृति सबसे ज्यादा इसी बात से नाराज थीं। अब मंत्रियों को जवाब देना होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • स्मृति इरानी ने दो दिन में दर्जन भर बैठकें कीं।
  • कार्यकर्ताओं और सांसदों ने मंत्रियों की खूब शिकायत की।
  • वे मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड साथ लेकर आई थीं।
  • उन्होंने मंत्रियों को कामकाज सुधारने की डेडलाइन दी।
  • अब प्रभारी मंत्री कार्यकर्ताओं के साथ भोजन करेंगे।

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल पर सवाल

स्मृति इरानी अपने साथ मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लेकर आई थीं। यानी मंत्रियों के कामकाज का पूरा लेखा-जोखा। उन्होंने बैठक में एक-एक मंत्री से सवाल-जवाब किए।

कुछ मंत्रियों को सार्वजनिक तौर पर भी सख्त हिदायतें मिलीं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आईं। स्मृति ने उनसे विभागीय सक्रियता पर सवाल किया।

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बीजेपी की बैठक में फूटा सांसदों का गुस्सा, स्मृति इरानी के सामने मंत्रियों के खिलाफ खोला मोर्चा
27 Oct 2026 ,
By Harrison Masih
छत्तीसगढ़ भाजपा की बैठक में सांसदों की शिकायत खुलकर सामने आई। प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी के सामने सांसदों ने मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनका आरोप है कि मंत्री उनकी सिफारिशें सुनते ही नहीं। इससे पहले पूर्व विधायक और पूर्व सांसद भी शिकायतें रख चुके थे। इस बैठक की खास बात यह रही कि मामला सीधे शीर्ष नेताओं तक पहुंचा।
छत्तीसगढ़ भाजपा की बैठक में सांसदों की शिकायत खुलकर सामने आई। प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी के सामने सांसदों ने मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनका आरोप है कि मंत्री उनकी सिफारिशें सुनते ही नहीं। इससे पहले पूर्व विधायक और पूर्व सांसद भी शिकायतें रख चुके थे। इस बैठक की खास बात यह रही कि मामला सीधे शीर्ष नेताओं तक पहुंचा।

विभाग में आपकी मौजूदगी दिखनी चाहिए

आप हैं या नहीं, यह विभाग में पता तो चलना चाहिए।- स्मृति इरानी, प्रदेश प्रभारी, छत्तीसगढ़ भाजपा

इस टिप्पणी को नसीहत के तौर पर देखा जा रहा है। संदेश साफ है कि मंत्री सिर्फ पद तक सीमित न रहें। विभाग में उनकी मौजूदगी और फैसलों का असर दिखे।

अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा जरूरी बताई गई। योजनाओं की निगरानी और शिकायतों का समय पर निराकरण (समाधान) भी प्राथमिकता है।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को कामकाज सुधारने की हिदायत मिली। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी यही हिदायत दी गई। मंत्रियों को संकेत मिला कि आकलन सिर्फ विभागीय आंकड़ों से नहीं होगा। जनता और कार्यकर्ताओं का अनुभव भी आधार बनेगा।

स्मृति ईरानी का सख्त संदेश: स्वागत-सत्कार छोड़िए, बूथ संभालिए! | Smriti Irani's Strict Message: Forget Welcomes, Focus on Booths!
स्मृति ईरानी का संगठन के नेताओं को सख्त संदेश, न होर्डिंग न हार, स्वागत-सत्कार छोड़िए, बूथ संभालिए
26 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने पहले दौरे में ही संगठन के नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया , कि पार्टी में अब औपचारिक स्वागत-सत्कार से ज्यादा अहमियत संगठनात्मक काम और बूथ की मजबूती को मिलेगी। रविवार को दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचीं स्मृति ईरानी का अंदाज अपेक्षा से बिल्कुल अलग रहा।
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने पहले दौरे में ही संगठन के नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया , कि पार्टी में अब औपचारिक स्वागत-सत्कार से ज्यादा अहमियत संगठनात्मक काम और बूथ की मजबूती को मिलेगी। रविवार को दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचीं स्मृति ईरानी का अंदाज अपेक्षा से बिल्कुल अलग रहा।

फर्जी तबादलों पर सवाल

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से विभाग के फर्जी तबादलों पर सवाल हुए। स्मृति इरानी ने पूछा कि ऐसे मामले सामने कैसे आ रहे हैं? उन्होंने इन्हें तत्काल रोकने के निर्देश दिए।

विभागीय व्यवस्था दुरुस्त करने को भी कहा गया। ऐसी शिकायतें सरकार और संगठन, दोनों के लिए असहज स्थिति बना सकती हैं। इसलिए जवाबदेही तय करने पर जोर रहा।

उनका संदेश था कि विभागीय फैसलों में पारदर्शिता (यानी फैसलों में खुलापन) चाहिए। अनियमितताओं की शिकायतें नजरअंदाज नहीं होनी चाहिए।

अन्य मंत्रियों को बजट के समयबद्ध उपयोग के निर्देश मिले। सरकार के पास उपलब्ध बजट तय समय में खर्च हो। इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे। इसके लिए विभागीय निगरानी बढ़ाने को कहा गया।

प्रभारी जिलों में दौरे पर सवाल

समीक्षा बैठकों में प्रभार वाले जिलों के नियमित दौरे का मुद्दा उठा। स्मृति इरानी यह ब्योरा लेकर आई थीं कि कौन मंत्री अपने जिले में कितनी बार गया। यह भी देखा गया कि संगठन और प्रशासन से कैसा समन्वय रहा।

प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिक समीक्षा नहीं है। वह सरकार और संगठन के बीच पुल का काम करता है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनना उसकी भूमिका है। विकास कार्यों की प्रगति देखना भी इसी में आता है।

स्मृति ने नियमित दौरे न करने वाले मंत्रियों से प्रभार वापस लेने की जरूरत बताई। उन्होंने इस पर खास जोर दिया।

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<b>Chhattisgarh BJP News:</b> छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले दौरे पर रायपुर पहुंचीं। उन्होंने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। स्मृति ईरानी ने साफ कहा कि पार्टी कार्यालय में केवल बुलाए गए लोग ही मौजूद रहें। बिना जरूरी काम के कार्यालय आने से बचें।
<b>Chhattisgarh BJP News:</b> छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले दौरे पर रायपुर पहुंचीं। उन्होंने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। स्मृति ईरानी ने साफ कहा कि पार्टी कार्यालय में केवल बुलाए गए लोग ही मौजूद रहें। बिना जरूरी काम के कार्यालय आने से बचें।

कार्यकर्ताओं के साथ भोजन की नई व्यवस्था

स्मृति की नाराजगी के बाद नई व्यवस्था की तैयारी हुई है। यह तैयारी सरकार और संगठन, दोनों ने की है। अब प्रभारी मंत्री कार्यकर्ताओं के साथ भोजन करेंगे। दीपावली पर दीवाली मिलन समारोह भी रखा जाएगा।

सरकार और संगठन में तालमेल की चिंता

स्मृति की बैठकों में उठे मुद्दे अहम संकेत देते हैं। भाजपा (BJP - Bharatiya Janata Party) नेतृत्व अब मंत्रियों से ज्यादा जवाबदेही चाहता है। जवाबदेही यानी काम का हिसाब देने की जिम्मेदारी।

शिकायतों को सिर्फ स्थानीय असंतोष कहकर टाला नहीं जा रहा। उनके आधार पर समीक्षा हो रही है। सरकार और संगठन में तालमेल बेहतर करना भी बड़ा मकसद माना जा रहा है।

सत्ता में रहते कार्यकर्ता मंत्रियों तक न पहुंच पाएं, तो नुकसान संभव है। विभागों में शिकायतें न सुलझें, तो भी यही खतरा है। इसका असर संगठन की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। जनता के बीच सरकार की छवि भी प्रभावित हो सकती है।

अब सिर्फ पद और राजनीतिक अनुभव के भरोसे काम नहीं चलेगा। विभागीय सक्रियता, बजट उपयोग, शिकायत समाधान और संगठन से समन्वय पर जवाब देना होगा।

छत्तीसगढ़ भाजपा (Chhattisgarh BJP) के मंत्रियों के लिए यह संदेश साफ है।

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