एमपी में एक लाख सरकारी भर्तियों का रास्ता साफ, सीएम की सख्ती के बाद जीएडी ने मांगा खाली पदों का डेटा
मंगलवार, 06 अक्टूबर को मंत्रालय में जीएडी के अधिकारियों ने सभी विभागों की बैठक ली। जिन विभागों ने आधी-अधूरी जानकारी दी थी, उन्हें पूरी तैयारी के साथ रिपोर्ट देने को कहा गया है। यही रिपोर्ट आगे भर्ती की योजना का आधार बनेगी।
सीएम का जलेबी वाला तंज
सोमवार, 05 अक्टूबर को सीएम मोहन यादव ने कृषि विभाग के एक कार्यक्रम में जीएडी की कार्यप्रणाली पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि भगवान के बाद कर्मचारियों को सबसे ज्यादा डर इसी विभाग से लगता था। वहां न जाने कौन सी जलेबी बनती थी।
फिर उन्होंने साफ कहा कि सरकार यह जलेबी की दुकान बंद कराएगी। मतलब यह कि प्रक्रियाएं सरल की जाएंगी। सीएम का तर्क था कि कर्मचारियों को बेवजह परेशान नहीं होना चाहिए।
इसी कार्यक्रम में सीएम ने एक और बात कही थी। राज्य सरकार ने अगले साल तक विभिन्न विभागों में एक लाख नए पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा है। मौजूदा कार्यकाल में अब तक करीब 85 हजार नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द फिर पदोन्नति कराई जाएगी। इससे नए पद खाली होंगे।
जीएडी ने क्या जानकारी मांगी?
अगले ही दिन मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी हरकत में आया। विभागों से पूछा गया कि किन विभागों में अभी पदोन्नति नहीं हुई है। कहां प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, यह भी पूछा गया। किस विभाग में कितने पदों पर पदोन्नति बाकी है, इसका ब्योरा भी मांगा गया है।
जिन पदों पर पदोन्नति नहीं हो सकी, उसकी वजह भी बतानी होगी। यानी सिर्फ आंकड़े नहीं, देरी का कारण भी देना होगा।
इसके अलावा पदोन्नति के बाद खाली होने वाले पदों की जानकारी भी मांगी गई है। विभागों से यह भी पूछा गया है कि दिसंबर 2025 के बाद कितने पदों की भर्ती पूरी हो चुकी है। कितने पद अब भी खाली हैं, यह ब्योरा भी देना है।
एक लाख पदों की योजना कैसे?
जीएडी दो तरह का डेटा अलग-अलग तैयार करेगा। पहला, पदोन्नति के बाद खाली होने वाले पदों का आंकड़ा। दूसरा, सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध पदों का आंकड़ा। सीधी भर्ती यानी बाहर से सीधे नए उम्मीदवार चुनना।
इसी आधार पर अगले साल करीब एक लाख पदों की भर्ती योजना बनेगी। फिर रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दी जाएगी। सीएम के निर्देश पर खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पदोन्नति का सीधा असर भर्ती पर पड़ता है। जब किसी कर्मचारी को ऊंचा पद मिलता है, तो उसका पुराना पद खाली होता है। इसी खाली पद पर नई भर्ती हो सकती है। इसलिए जीएडी दोनों मामलों की जानकारी साथ ले रहा है।
सभी विभागों की बैठक
बैठक अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में हुई है। यह बैठक दो राउंड में हुई है। पहले राउंड में गृह, ऊर्जा, वन, राजस्व, स्कूल शिक्षा और लोक निर्माण जैसे बड़े विभाग शामिल थे। इनमें किसान कल्याण, नगरीय विकास, स्वास्थ्य और जल संसाधन विभाग भी रहे। जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और वित्त विभाग भी इसी राउंड में थे।
दूसरे राउंड में पशुपालन, पर्यटन, पर्यावरण, श्रम और जनसंपर्क विभाग के अधिकारी बुलाए गए था। आयुष, खेल, संस्कृति और विधि विभाग भी इस राउंड में थे। इनके साथ उद्यानिकी, सामाजिक न्याय और भोपाल गैस त्रासदी विभाग से भी जानकारी ली गई है।
बैठक में संसदीय कार्य, विमानन और लोक सेवा प्रबंधन विभाग भी शामिल थे। धार्मिक न्यास, एमएसएमई, नर्मदा घाटी विकास, वाणिज्यिक कर और खनिज साधन विभाग के अधिकारियों से भी ब्योरा लिया गया है। यानी लगभग हर विभाग को जानकारी देनी पड़ी।
उम्मीदवारों के लिए क्या मायने?
फिलहाल यह भर्ती का आदेश नहीं है। यह सिर्फ तैयारी का चरण है। अभी विभागों का डेटा जुट रहा है। फिर रिपोर्ट सीएम की समीक्षा बैठक में रखी जाएगी। उसके बाद ही भर्ती की प्रक्रिया तय होगी।
इसलिए उम्मीदवारों को अभी किसी अफवाह पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किस विभाग में कितने पद निकलेंगे, यह अभी साफ नहीं है। भर्ती की तारीख और परीक्षा का कार्यक्रम भी सामने नहीं आया है।
कर्मचारियों के लिए भी यह खबर काम की है। पदोन्नति की स्थिति सबके सामने आएगी। जिन विभागों में देरी हुई है, वहां जवाब देना पड़ेगा। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ा सकती है।
अब सबकी नजर सीएम की समीक्षा बैठक पर रहेगी। वहीं तय होगा कि रिपोर्ट कितनी पूरी है। इसके बाद ही पता चलेगा कि एक लाख पदों का लक्ष्य जमीन पर कैसे उतरेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
लाखों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं और भर्ती की खबरों पर निर्भर रहते हैं। यह खबर बताती है कि अभी योजना बन रही है, भर्ती का आदेश नहीं आया। पदोन्नति में पारदर्शिता कर्मचारियों के हक से भी जुड़ी है। यह खबर किसी विभाग को दोषी नहीं ठहराती। पाठक भर्ती की जानकारी सिर्फ आधिकारिक विज्ञापन और सरकारी पोर्टल से लें। अफवाह या फर्जी लिंक से बचें।