एमपी में ट्रांसफर विवाद: अफसर 67 दिन गायब, लोकेशन गलत... फिर भी तबादले

Amresh Kushwaha | Aug 03, 2026, 11:15 IST
एमपी में ट्रांसफर विवाद
मध्यप्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग में हुए 166 ट्रांसफर विवादों में हैं। जांच में सामने आया कि कई अफसर 92 दिन में से 67 दिन गैरहाजिर रहे। गलत लोकेशन देने और नोटिस पाने वालों के नाम भी ट्रांसफर सूची में थे। अब सभी आदेशों पर रोक लगाकर जांच जारी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग में ट्रांसफर विवाद गहरा गया है।
  • जांच में सामने आया कि कई अफसर 92 दिन में 67 दिन गैरहाजिर रहे।
  • गलत लोकेशन बताने वाले अफसरों के नाम भी ट्रांसफर सूची में थे।
  • इससे पहले मंत्री लखन पटेल से यह विभाग वापस लिया गया था।
  • अब 166 ट्रांसफर पर रोक लगाकर पूरे मामले की जांच हो रही है।

गड़बड़ी की परतें खुलीं

पशुपालन एवं डेयरी विभाग में हुए ट्रांसफर का विवाद अब गहरा गया है। उच्च स्तर से जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद कई परतें खुलने लगी हैं। पड़ताल में पता चला कि ट्रांसफर सूची में कई ऐसे नाम भी हैं, जो लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे थे। कुछ अफसरों ने गलत लोकेशन बताकर ड्यूटी की जानकारी दी। इनमें से कई को पहले ही नोटिस भी जारी हो चुके थे। इसके बावजूद इनके नाम ट्रांसफर लिस्ट में शामिल कर दिए गए।



विभागीय स्तर पर अब पूरी जानकारी खंगाली जा रही है। पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों के बारे में भी अहम बात सामने आई है। इनमें से ज्यादातर बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों में जमे हुए थे। इसके उलट दूर दराज के इलाकों में 70 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली पड़े थे। गैरहाजिर रहने वाले अफसरों ने सामान्य छुट्टियों को भी लंबी छुट्टी बना लिया था।



92 दिन में गैरहाजिर रहे अफसर

अखबार को मिले दस्तावेजों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 1 मई से 31 मई के बीच के 92 दिनों का रिकॉर्ड खंगाला गया। इसमें रामेश्वर कवाडी 67 दिन गैरहाजिर मिले। मनोज कुमरे 57 दिन ड्यूटी से नदारद रहे।



रविंद्र कवाडे की 49 दिन गैरहाजिरी दर्ज है। पूजा गवाल 46 दिन और लोकेंद्र सिंह हेलोत 41 दिन गैरहाजिर पाए गए। यानी इन अफसरों ने आधे से ज्यादा दिन छुट्टी पर बिता दी। इसके बावजूद इनके तबादले सामान्य प्रक्रिया के तहत कर दिए गए।



लोकेशन में भी गड़बड़ी मिली

सिर्फ गैरहाजिरी ही नहीं, लोकेशन को लेकर भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। संतोष अरमो की लोकेशन पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत गलत मिली। मुकेश चौरे की लोकेशन 98.63 प्रतिशत गलत बताई गई। चरण सिंह मरकाम के मामले में यह आंकड़ा 86.96 प्रतिशत रहा। रमेश सिंह पड़ा की लोकेशन 84.78 प्रतिशत गलत निकली।



इसके अलावा ओम प्रकाश गुप्ता, लोकेंद्र सिंह गेहलोत, रामलिन सिंह मराई, यशवंत गकले, माधो सिंह, बालू चौहान और ज्योति कटारिया के नाम भी इस सूची में हैं। इनकी लोकेशन 74 से 85 प्रतिशत तक गलत पाई गई। यानी ड्यूटी के दौरान ये अफसर तय जगह पर मौजूद ही नहीं थे।



30 से ज्यादा को नोटिस

जांच में 20 से ज्यादा पशु चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है। इन पर कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के काम में लापरवाही का आरोप है। कई अफसरों की फर्जी अटेंडेंस भी पकड़ी गई। कुछ फील्ड से बाहर मौजूद पाए गए। विभाग ने इन सभी मामलों में कार्रवाई की सिफारिश कर दी है।



खराब प्रदर्शन करने वालों में डॉ सीमा मौर्य, डॉ भारती वर्मा, डॉ मधुप्रभात, डॉ दीक्षा लाड, डॉ ज्योति उइके और डॉ अपेक्षा जैकब जैसे नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने सहित विभागीय दंड की कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक 11 मार्च 2026 को जेपी लखेर समेत 12 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए थे।



विवाद की पूरी टाइमलाइन

यह विवाद अचानक सामने नहीं आया है। जमीन आवंटन में सौदेबाजी के आरोपों के 18 दिन बाद ही यह मामला उठा। 14 जुलाई को पशुपालन मंत्री लखन पटेल से यह विभाग वापस ले लिया गया था। इसके बाद 31 जुलाई को विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृत्त हुए। उसी दिन 166 ट्रांसफर पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।



इनमें से पहले आदेश में 91 और दूसरे आदेश में 75 अफसरों के तबादले शामिल थे। तबादलों पर लगा प्रतिबंध 1 जून से 15 जून के लिए हटाया गया था। इसी दौरान आखिरी दिन 15 जून को यह विवादित आदेश जारी किए गए। सीएम (Chief Minister) ने बाद में यह अवधि एक दिन और बढ़ाई थी।



विभाग पहले भी विवादों में रहा है। स्वावलंबी गौशाला योजना में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इसके तहत 14 गौशालाओं के लिए टेंडर होना था। विभाग ने सात की प्रक्रिया शुरू की और चार के लिए एलओआई (Letter Of Intent) जारी की। इसी एलओआई को लेकर सौदेबाजी की शिकायत दिल्ली तक पहुंच गई थी।



एक बड़ा डेयरी प्रोजेक्ट भी अटका पड़ा है। एनडीडीबी (National Dairy Development Board) के साथ पांच साल में 1500 करोड़ रुपए का दुग्ध उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू होना है। सीएम की नाराजगी के बावजूद अब तक इस पर सहमति नहीं बनी है।



अब आगे क्या होगा

मंत्री से विभाग वापस लेने के बाद जिम्मेदारी बदल गई है। प्रमुख सचिव के रिटायर होने के बाद विभाग की कमान सचिव सुदाम पी खाड़े को सौंपी गई है। फिलहाल यह विभाग सीधे सीएम के पास है। अब सभी फाइलें सीएम के अनुमोदन के लिए भेजी जाएंगी। मंजूरी मिलने के बाद ही ट्रांसफर आदेशों पर आगे कार्रवाई होगी।



सूत्रों का कहना है कि जिन अफसरों की शिकायतें और अभ्यावेदन सही पाए जाएंगे, उन्हें राहत मिल सकती है। तब तक ट्रांसफर से पहले जो अफसर जहां पदस्थ था, उसे वहीं रहने दिया जाएगा।



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